कावेरी के पानी का बंटवारा ही अकेला नहीं है

कावेरी नदी के पानी के बंटवारे पर बैंगलूरू में हाल ही में हिंसक विरोध प्रदर्शन इमेज कॉपीरइट Aijaz Rahi
Image caption कावेरी नदी के पानी के बंटवारे पर बैंगलूरू में हाल ही में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए

भारत में पानी को लेकर कई सुबाई सरकारों में मतभेद हैं. ज़्यादातर झगड़े दशकों पुराने हैं.

ऐसी कई नदियां हैं जिनके पानी का बंटवारा काफ़ी पुराना है:

कावेरी नदी

दक्षिण भारत की सबसे बड़ी नदी, कावेरी, कर्नाटक से शुरू हो कर तमिलनाडू से होते हुए क़रीब 300 किलोमीटर का सफ़र तय कर बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है.

इसके पानी के बंटवारे की लड़ाई मुख्य तौर पर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच रही है हालांकि केरल और केंद्र प्रशासित क्षेत्र पुड्डुचेरी भी अब दावेदार बन गए हैं.

बंटवारे के निपटारे के लिए 1990 में 'कावेरी वॉटर डिस्प्यूट्स ट्राइब्यूनल' बनाया गया जिसने 2007 में अपना आख़िरी फ़ैसला दिया.

सभी राज्यों को इस फ़ैसले के तहत दिया गया पानी का हिस्सा नाकाफ़ी लगा और इसको चुनौती देने के लिए वो सुप्रीम कोर्ट चले गए.

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को कर्नाटक सरकार ने चुनौती दी है.

Image caption उमा भारती मौजूदा सरकार में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री हैं.

कृष्णा नदी

महाराष्ट्र के महाबलेश्वर से शुरू होकर कृष्णा नदी कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से क़रीब 2,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है.

आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच इस नदी के पानी के बंटवारे के लिए 1969 में ट्राइब्यूनल बनाया गया जिसने पहले 1973 और फिर 2010 में अपना आख़िरी फ़ैसला दिया.

पर आंध्र प्रदेश का दो राज्यों में बंटवारा होने के बाद नए राज्य तेलंगाना ने एक बार फिर पानी के बंटवारे की मांग की.

अब इस विवाद को सुलझाने के लिए एक परिषद बनाई गई है. केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती की अध्यक्षता में दोनों राज्य सरकारों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है.

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Image caption आगामी विधानसभा चुनाव पर नज़र रखते हुए आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल ने पानी के बंटवारे में पंजाब का समर्थन किया है.

सतलुज, रावी और ब्यास नदियां

भारत के बंटवारे के बाद, पंजाब से बहने वाली नदियों के पानी के बंटवारे का सवाल उठा. 1960 में 'सिंधू जल संधि' के तहत भारत को तीनों पूर्वी नदियों, सतलुज, रावी और ब्यास का पानी मिल गया.

ये पानी पंजाब, दिल्ली और भारत प्रशासित कश्मीर के बीच बांटा गया. फिर 1966 में पंजाब के विभाजन से हरियाणा राज्य के बनाए जाने के बाद पानी के हक़ की लड़ाई फिर छिड़ गई.

'सतलुज-यमुना लिंक नहर' बनाकर इसे सुलझाने की कोशिश की गई. ये नहर हरियाणा की तरफ़ से तो बन गई पर आज तक पंजाब की ओर से पूरी नहीं की गई.

अब पंजाब विधान सभा ने उस नहर को बनाने के लिए अधिग्रहित की गई ज़मीन किसानों को वापस देने के लिए एक विधेयक पारित किया है जिसपर हरियाणा के अपील करने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है.

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महानदी

छत्तीसगढ़ से शुरू होकर महानदी ओडिशा से होते हुए क़रीब 900 किलोमीटर आगे बंगाल की खाड़ी में मिलती है.

1983 में मध्य प्रदेश और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों ने एक बैठक कर ये तय किया कि महानदी के पानी के बंटवारे के लिए 'संयुक्त नियंत्रण बोर्ड' बनाया जाए.

लेकिन इतने साल बाद भी बोर्ड का गठन नहीं हुआ है. मध्य प्रदेश का विभाजन होने के बाद अब महानदी का मामला छत्तीसगढ़ के तहत आ गया है.

हाल ही में ओडिशा ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ ने अपने इलाके में 94 बांध बना दिए हैं जिससे उन्हें महानदी का पानी नहीं मिल रहा है.

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती की अध्यक्षता में दोनों राज्य सरकारों के बीच सहमति बनाने की कोशिश कर रही हैं.

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