भारत-पाक संबंधों में एमएफ़एन दर्जे की अहमियत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में भारत की ओर से पाकिस्तान को दिए गए एमएफ़एन दर्जे की समीक्षा अगले हफ़्ते होगी.

भारत प्रशासित कश्मीर के उड़ी में सेना के शिविर पर हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के महौल में ऐसा हो रहा है.

इसी बढ़े हुए तनाव के कारण भारत ने दक्षिण एशियाई देशों के समूह सार्क की इस्लामाबाद में होने वाली बैठक में भाग न लेने का फ़ैसला किया है.

मोस्ट फेवर्ड नेशन यानी सर्वाधिक वरीयता प्राप्त देश का दर्जा मिलने का मतलब क्या है और भारत-पाकिस्तान संबंधों में इसकी क्या अहमियत है?

  • एमएफ़एन दर्जा मिलने वाले देश को व्यापार संबंधी सुविधाएं मिल जातीं हैं. व्यापार संबंधी फ़ायदों का मतलब कम कीमतें और आयत को बढ़ावा देने वाले कदम होता है.
  • विश्व व्यापार संगठन यानी डब्लूटीओ के सदस्य देश आपस में एक दूसरे को एमएफ़एन का दर्जा दे सकते हैं.
  • इसके तहत अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का पालन करना होता है और आम धारणा ये है कि आर्थिक रूप से थोड़े कमज़ोर देशों की अर्थव्यवस्थाओं को इससे लाभ पहुँच सकता है.
  • अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के मुक्त व्यापार क्षेत्र, आबकारी संघ और साझा बाज़ारों को एमएफ़एन प्रावधानों से छूट दी गई है.
  • सरल भाषा में सर्वाधिक वरीयता प्राप्त देश का दर्जा 'विशेष और बेहतर व्यवहार' देने या प्राप्त करने के लिए होता है. दरअसल इसका मतलब है व्यापार में भेदभाव न करना.
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भारत-पाकिस्तान और एमएफ़एन

  • विश्व व्यापार संगठन में भारतीय प्रतिबद्धताओं के अनुसार 1996 में पाकिस्तान को एमएफ़एन का दर्ज दिया गया.
  • वर्ष 2015-16 में भारत के 641 अरब डॉलर के अंतरराष्ट्रीय निर्यात में पाकिस्तान का हिस्सा महज़ 2.67 अरब डॉलर का था.
  • ऐसोचैम के मुताबिक़ पाकिस्तान के साथ होने वाला व्यापार भारत के कुल अंतरराष्ट्रीय व्यापार का 0.41% है.
  • जबकि भारत में होने वाले आयात में से पाकिस्तान से होने वाला आयात सिर्फ़ 0.13 % है.
  • पाकिस्तान ने अभी तक भारत को एमएफ़एन का दर्ज नहीं दिया है.
  • जानकारों के अनुसार डब्लूटीओ में 'सुरक्षा सबंधी कारणों' वाले प्रावधान के चलते कोई सदस्य देश किसी को दिए गए एमएफ़एन दर्जे में कुछ व्यापारों पर प्रतिबंध लगा सकता है.