भारत ने पाकिस्तान को दिए उड़ी हमले के सबूत

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भारत ने उड़ी हमले के बाद पाकिस्तान पर दबाव की रणनीति जारी रखते हुए मंगलवार को पाकिस्तानी उच्चायुक्त को दोबारा तलब किया और उड़ी हमले पर भारत का औपचारिक विरोध दर्ज कराया है.

भारत का कहना है कि उसने उड़ी में सेना के ब्रिगेड मुख्यालय पर हमला करने वाले लोगों के सीमा पार से संबंध होने के सबूत पाकिस्तानी अधिकारियों के हवाले किए हैं.

उड़ी में हुए चरमपंथी हमले में 18 जवान मारे गए थे जिसके बाद से भारत ने दूसरी बार पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब किया है. मंगलवार को न केवल औपचारिक विरोध जताया गया बल्कि पाकिस्तानी उच्चायुत अब्दुल बासित के समक्ष सबूत भी रखे गए.

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने बताया, ''विदेश सचिव एस जयशंकर ने बासित से मुलाकात की और उन्हें अवगत कराया कि प्राथमिक जांच में ही उड़ी के एक हमलावर हाफिज़ अहमद की पहचान हो गई है जो मुज़फ्फराबाद के फिरोज़ का पुत्र है और उसे पाकिस्तान से ही नियंत्रित किया जा रहा था.''

विकास स्वरूप के अनुसार 21 सितंबर को ही स्थानीय लोगों ने दो और लोगों को पकड़ा था और भारतीय सेना के हवाले किया था. इन दोनों लोगों की पहचान फैज़ल हुसैन और यासिन खुर्शीद के तौर पर की गई है.

भारत के अनुसार ये दोनों भी पाकिस्तान के मुज़फ्फराबाद के रहने वाले थे.

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विकास स्वरूप का कहना था कि विदेश सचिव एस जयशंकर ने पाकिस्तानी उच्चायुक्त से ये भी कहा कि भारत इन तीनों लोगों को पाकिस्तानी दूतावास से बातचीत की सुविधा देने को भी तैयार है.

इस मुलाकात में भारत के अनुसार विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा, ''हम एक बार फिर पाकिस्तान से अपील करते हैं कि वो अपनी ज़मीन से भारत के खिलाफ़ आतंकी कार्रवाई न होने देने की अपनी प्रतिबद्धता को गंभीरता से ले.''

उड़ी घटना के बाद भारत ने लगातार कहा है कि इसके पीछे पाकिस्तान का हाथ है. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज़ ने इस मुद्दे को यूएन में भी उठाया है जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंधु जल संधि के बारे में कहा है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते.

इतना ही नहीं गुरुवार को होने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक में पाकिस्तान को सर्वाधिक तरज़ीही राष्ट्र का दर्जा दिए जाने के फैसले पर पुनर्विचार की भी संभावना जताई जा रही है.