'क्षेत्रीय सहयोग और चरमपंथ साथ साथ नहीं'

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भारत इस्लामाबाद में होने वाले सार्क सम्मेलन की बैठक में हिस्सा नहीं लेगा. यह बैठक नौ और दस नवंबर, 2016 को होने वाली है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है.

भारत ने इस बारे में सार्क सम्मेलन बैठक की अध्यक्षता कर रहे नेपाल को इसकी जानकारी दे दी है.

इतना ही नहीं भारत ने नेपाल से कहा है कि एक देश ने ऐसा माहौल बना दिया है जो शिखर बैठक के लिए उपयुक्त नहीं है.

भारत के विदेश मामलों के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने ट्वीट किया है, "क्षेत्रीय सहयोग और चरमपंथ एक साथ नहीं चल सकते, इसलिए भारत इस्लामाबाद सम्मेलन में शामिल नहीं होगा."

सार्क शिखर सम्मेलन, दक्षिण एशिया के आठ देशों के राष्ट्राध्यक्षों की होने वाली बैठक है. जो हर दो साल में आयोजित होती है.

इस्लामाबाद में होने वाली बैठक इस सम्मेलन का 19वां आयोजन है.

ज़ाहिर है भारत का निशाना पाकिस्तान पर है, हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम नहीं लिया है. इतना ही नहीं भारत ने ये भी संकेत दिया है कि इस सम्मेलन में एक और देश शामिल नहीं हो सकता है.

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इससे पहले भारत के विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को दोबारा तलब कर उड़ी हमले में पाकिस्तान की संलिप्ता से संबंधित सबूत सौंपे थे.

उड़ी घटना के बाद भारत ने लगातार कहा है कि इसके पीछे पाकिस्तान का हाथ है. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज़ ने इस मुद्दे को यूएन में भी उठाया है जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंधु जल संधि के बारे में कहा है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते.

इतना ही नहीं गुरुवार को होने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक में पाकिस्तान को सर्वाधिक तरज़ीही राष्ट्र का दर्जा दिए जाने के फैसले पर पुनर्विचार की भी संभावना जताई जा रही है.