गोरक्षा मुद्दा- अख़लाक की हत्या के एक साल बाद कुछ बदला?

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ठीक एक साल पहले दिल्ली से सटे दादरी के बिसाड़ा गांव में एक मुसलमान परिवार पर हमला हुआ था और 52 साल के मोहम्मद अख़लाक की हत्या कर दी गई थी. उनके 22 साल के बेटे दानिश बुरी तरह ज़ख़्मी हो गए थे.

जिस भीड़ ने हमला किया था, वो आरोप लगा रही थी कि मोहम्मद अख़लाक ने एक गाय को मारा था और उसका मांस उसके घर में रखा गया था. अख़लाक का परिवार इन आरोपों से इनकार करता है.

इस मामले की चर्चा न सिर्फ़ भारत बल्कि दूसरे मुल्कों में भी हुई लेकिन ऐसा नहीं कि अख़लाक की हत्या के बाद इस जैसी घटनाओं में रोक लग गई.

झारखंड के लातेहार में मार्च में एक पेड़ से दो मुसलमान 'मवेशी व्यापारियों' का शव लटका पाया गया. इस मामले में पुलिस ने पांच लोगों को हिरासत में लिया.

रिपोर्टों के अनुसार एक व्यक्ति का ताल्लुक़ स्थानीय गोरक्षा समिति से था. अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार मारे गए लोगों के नाम मज़लूम (35) और इनायतुल्ला ख़ान (12) थे.

पुलिस ने कहा कि वो मामले की जांच कर रही है. अभियुक्तों को ज़मानत मिल गई है.

जनवरी में मध्य प्रदेश के खिड़किया रेल स्टेशन पर तथाकथित गोरक्षा समिति के सदस्यों ने एक मुसलमान दंपत्ति पर हमला किया.

इनका आरोप था कि दंपत्ति अपने सामान में गोमांस ले जा रहे थे. मोहम्मद हुसैन ने समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि वो अपनी पत्नी नसीमा बानो के साथ हैदराबाद जा रहे थे जब उन पर हमला हुआ.

जून में एक वीडियो सामने आया जिसमें फ़रीदाबाद-दिल्ली सीमा के निकट रिज़वान और मुख़्तियार नाम के दो व्यक्ति हाईवे के निकट बैठकर गाय का गोबर खा रहे हैं.

उनके चेहरे फूले हुए थे और एक व्यक्ति को उल्टी सी आ रही है. तथाकथित गोरक्षा दल के लोगों का आरोप था कि रिज़वान और मुख़्तियार ट्रक पर गोमांस ले जा रहे थे और दल के लोग उन्हें सबक़ सिखाना चाहते थे.

रिपोर्टों के मुताबिक़ गोबर खिलाने के बाद इस दल के लोग इन दोनों को फ़रीदाबाद पुलिस के पास ले गए, जहां उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया. लेकिन दल के लोगों के खिलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई.

जुलाई में एक वीडियो सामने आया जिसमें कुछ लोग दलितों की पिटाई कर रहे थे. इन दलितों पर एक मृत गाय की चमड़ी उतारने का आरोप था.

दलितों का कहना है कि वो सालों से इस काम से जुड़े हैं. पुलिस ने इस मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लिया और जांच के आदेश दिए. गुजरात सीआईडी की जांच में पुलिस वालों को भी दोषी बताया गया.

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जुलाई में मध्य प्रदेश में दो मुसलमान महिलाओं पर रेलवे स्टेशन पर तथाकथित गोरक्षकों की एक भीड़ ने हमला कर दिया. ये हमला राजधानी भोपाल से 350 किलोमीटर दूर मंदसौर में हुआ.

इन महिलाओं पर आरोप था कि वो गोमांस ले जा रही थीं. घटना के एक मोबाइल वीडियो में भीड़ में से कुछ महिलाएं इन दोनों को मारते हुए दिखीं. पुलिस का दावा था कि उन्हें इन महिलाओं के बारे में गुप्त जानकारी मिली थी. ये मामला संसद में भी उठा.

अगस्त में गोरक्षकों के बढ़ते हमलों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "मैं इन लोगों से कहना चाहूंगा, अगर आपको हमला करना है, मुझ पर हमला कीजिए. मेरे दलित भाइयों पर हमला करना बंद करें. अगर आपको गोली मारनी है, मुझे मारिए, मेरे दलित भाइयों को नहीं. ये खेल रुकना चाहिए. "

नरेंद्र मोदी ने देश को नकली गौरक्षकों से बचने को कहा था.

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अगस्त में इंडियन एक्सप्रेस में गुड़गाव में आयोजित एक कबड्डी टूर्नामेंट से जुड़ी ख़बर छपी. टूर्नामेंट का मक़सद था जातियों के बीच सद्भाव को बढ़ाना.

रिपोर्ट के मुताबिक़ दलितों और यादवों के बीच कबड्डी मैच में जब यादव पिछड़ने लगे तो उन्होंने कथित तौर पर दलित खिलाड़ियों के खिलाफ़ हिंसा की, उन पर बंदूकें तान दीं.

सितंबर में गुजरात में एक गर्भवती दलित महिला और उनके परिवार को कथित तौर पर पीटा गया जब उन्होंने गाय के कंकाल को हटाने से मना कर दिया.

महिला के परिवार का आरोप है कि ठाकुर समुदाय के लोग अहमदाबाद से 180 किलोमीटर दूर मोटा कार्गा गांव स्थित उनके घर आए और वहां एक मृत गाय के अवशेष को हटाने को कहा.

उना की घटना के बाद दलित ये काम करने से मना कर रहे हैं. उनके ना कहने पर कथित तौर पर उच्च जाति के लोगों ने दलित परिवार की पिटाई कर दी.

इस साल सितंबर में ही गुजरात के अहमदाबाद में 29 साल के व्यक्ति मोहम्मद अयूब को कथित तौर पर गोरक्षकों ने मार दिया. गोरक्षकों का आरोप था कि मोहम्मद अयूब और समीर शेख अपनी गाड़ी में एक गाय और बछड़े को ले जा रहे थे.

रिपोर्टों के मुताबिक़ गोरक्षकों का आरोप था कि रात तीन बजे जब मोहम्मद अयूब की कार की टक्कर हुई तो बछड़ा मार गया. मोहम्मद अयूब ने भागने की कोशिश की लेकिन कुछ लोगों ने उनकी पिटाई कर दी जिससे उसकी मौत हो गई.

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