'सार्क में पाक की रुकावट, भारत अन्य संगठनों का रुख़ करेगा'

इमेज कॉपीरइट Reuters

भारत ने इस्लामाबाद में होने वाले सार्क सम्मेलन की बैठक में हिस्सा नहीं लेने का फ़ैसला लिया है. यह बैठक इस साल नौ और दस नवंबर को होने वाली है.

भारत ने कहा है कि एक देश ने ऐसा माहौल बना दिया है जो शिखर बैठक के लिए उपयुक्त नहीं है.

ज़ाहिर है भारत का निशाना पाकिस्तान पर है, हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम नहीं लिया है.

भारत के पाकिस्तान में उच्चायुक्त रह चुके जी पार्थसार्थी कहते हैं कि उड़ी हमले के बाद यह एक स्वभाविक कदम है.

पढ़िए भारत के इस कदम पर जी पार्थसार्थी की राय-

"उड़ी से पहले भी भारत सार्क में नहीं जाने के विकल्प के बारे में सोच रहा था. भारत दो क्षेत्रीय संगठनों सार्क और बिमिटेक का सदस्य है.

बिमिस्टेक में भारत के पूर्व में स्थित सात देश हैं. इसमें भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका म्यांमार और थाईलैंड हैं.

इमेज कॉपीरइट AFP

इस संगठन का मकसद यह है कि आर्थिक एकीकरण की दिशा में एक साझा बाज़ार तैयार हो. इसके अलावा ऊर्जा के क्षेत्र में एक साझा ग्रिड बनाने का भी लक्ष्य है.

भारत मानता है कि पाकिस्तान की रूकावट की वजह से सार्क में आर्थिक और ऊर्जा लक्ष्यों से जुड़े उद्देश्यों को पूरा नहीं किया जा पा रहा है इसलिए भारत बिमिस्टेक के विकल्प के बारे में गंभीर है.

बिमिस्टेक के कई सदस्य सार्क के भी सदस्य हैं. गोवा में होने वाले ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन में सार्क की बजाए बिमिस्टेक के सदस्यों को आमंत्रण दिया गया है.

मतलब साफ़ है कि भारत का ध्यान सार्क की बजाए बिमिस्टेक की ओर है. भारत के इस कदम के साथ बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान खड़े हैं.

मैं मानता हूँ कि भारत की इस नीति पर भूटान और नेपाल भी उसके साथ आ जाएंगे. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अभी जो सार्क के तहत सहयोग है उससे भारत हटने वाला है.

इमेज कॉपीरइट AFP

पाकिस्तान का मकसद है कि चीन को भी सार्क में शामिल किया जाए, जबकि चीन दक्षिण एशियाई देश ही नहीं है.

जहां तक द्विपक्षीय बातचीत का सवाल है तो पाकिस्तान जब तक चरमपंथ पर लगाम नहीं लगाता, तब तक उसके साथ द्विपक्षीय बातचीत का सवाल ही नहीं उठता.

पाकिस्तान अपनी गतिविधियों से भारत के क्षेत्रीय सहयोग के रिश्तों पर कोई प्रभाव नहीं डाल सकता है और ना ही भारत ऐसा करने देगा.

भारत ने पहले ही तय कर लिया था कि जरूरत पड़ने पर सार्क को एक तरफ रखकर दूसरे क्षेत्रीय संगठनों को आगे ले जाएगा. "

(पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रह चुके जी पार्थसार्थी के साथ बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन की बातचीत पर आधारित. ये उनके निजी विचार हैं.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)