'सर्जिकल स्ट्राइक पहले भी लेकिन माना पहली बार'

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गुरुवार को भारतीय सेना ने एलओसी पर सर्जिकल स्ट्राइक कर चरमपंथी ठिकाने नष्ट करने और उन्हें बड़ा नुक़सान पहुँचाने का दावा किया. हालांकि पाकिस्तानी सेना ने इन दावों का खंडन किया है.

रक्षा विशेषज्ञ अजय साहनी ने बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव को बताया कि क्या होती है सर्जिकल स्ट्राइक और भारत की इस कार्रवाई में नया क्या है.

कोई भी ऐसा सैन्य ऑपरेशन जिसमें ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर किसी चिन्हित ठिकाने को नष्ट किया जाता उसे ही सर्जिकल स्ट्राइक कहते हैं. इसमें सिर्फ़ ठिकाने को नुक़सान पहुँचता है, उसके आस पास की इमारतों या नागरिकों को कोई नुक़सान नहीं होता है.

ऐसा नहीं है कि भारत ने पहली बार एलओसी के पार या सीमा पार ऐसा ऑपरेशन किया हो, ऐसा पहले भी होता रहा है लेकिन ये पहली बार है जब सर्जिकल स्ट्राइक को स्वीकार किया गया है. इससे पहले भी कई बार भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की है. जब भी दूसरी तरफ़ से कुछ कार्रवाई होती थी तो सर्जिकल स्ट्राइक उसका रूटीन रेस्पांस होता था.

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जब भारतीय सैनिकों को मारा गया था तब भी ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक की गईं थीं. लेकिन ये पहली बार हुआ है जब न सिर्फ़ सरकार ने इसे अधिकारिक तौर पर माना है बल्कि भारत के डीजीएमओ ने फ़ोन करके पाकिस्तान के डीजीएमओ को जानकारी भी दी है.

मुझे लगता है कि जिस तरह से इस ऑपरेशन का प्रचार किया जा रहा है उससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि इसका मक़सद जितना उस तरफ़ नुक़सान पहुंचाना था उतना ही था कि भारत में जो राजनीतिक लोग हैं उन्हें लुभाना या उसका रुख बदलना. क्योंकि एक तबके में ये ख़्याल आ रहा था कि ये सरकार नाकाम हो रही है. पाकिस्तान को लेकर जो वादे किए गए वो पूरे नहीं किए जा रहे हैं और मोदी ने जो स्ट्रांगमैन या सशक्त नेता की छवि पेश की है वो उस पर खरे नहीं उतर रहे हैं, वो भी बाक़ी सरकारों की तरह नकारा हैं.

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भारतीय सेना पहले भी इस तरह जवाब देती रही है लेकिन जिस तरह इस बार प्रचार किया जा रहा है उससे लगता है कि इसका मक़सद राजनीतिक है.

लेकिन इस ऑपरेशन का सिर्फ़ यही मक़सद नहीं है. इसका असर पाकिस्तान पर भी होगा और अंतरराष्ट्रीय असर भी होगा. पिछले दस दिनों में भारत ने ये साफ़ संदेश दिया है कि जो पुराना हमारा रेस्पांस देने का ढांचा था हम उससे बाहर निकल आए हैं. हम बात करेंगे या नहीं करेंगे के नकारा चक्र से बाहर निकल चुके हैं और ये साफ़ कर दिया है कि हम सैन्य और अन्य विकल्प भी देखेंगे.

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इस ऑपरेशन से ये संकेत बिलकुल साफ़ हो गया है कि अब सैन्य विकल्प पर भी चर्चा हो रही है और इसका इस्तेमाल भी किया जा सकता है.

एक और ख़ास बात ये है कि भारत ने इसके बारे में बहुत अधिक अधिकारिक जानकारी नहीं दी है. इतनी ही जानकारी दी गई है जिससे भारत के लोगों को तो पूरा संदेश मिल गया लेकिन बहुत ज़्यादा जानकारी न देकर और बहुत बड़े दावे न करके इसका खंडन करने की गुंजाइश भी छोड़ दी.

इसका भी रणनीतिक महत्व है. ज़रूरी नहीं है कि पाकिस्तान इसे बढ़ावा. पाकिस्तान अपने लोगों को ये बता सकता है कि ये कोई बड़ी बात नहीं है, जो गोलीबारी होती रही है ऐसा ही है. यानि पाकिस्तान को नाक बचाने का अवसर भी दिया गया है.

इसके ख़तरे भी हैं. यदि पाकिस्तान ने मुंहतोड़ जवाब दिया तो भारत को और भी कड़ा जवाब देना होगा और ये बिगड़ते हालात युद्ध तक पहुँच सकते हैं.

भारत और पाकिस्तान के युद्ध की जब भी बात आती है तो परमाणु हथियारों की भी बात होती है. लोगों के दिमाग़ में ये बात रहती है कि एक-नहीं तो दूसरा तो पागल है ही, परमाणु हथियारों का भी इस्तेमाल हो सकता है. ये एक अनदेखा डर है. ये डर भारत की ओर ज़्यादा है.

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परमाणु हथियारों के युग में भी युद्ध हो सकते हैं. यूक्रेन में संघर्ष चल रहा है. इराक़, सीरिया और लीबिया में संघर्ष चल रहा है. परमाणु हथियारों का ये मतलब नहीं है कि हाथ बांध कर बैठ जाएं.

इस ऑपरेशन का समय और योजना ऐसी रही है कि अंतरराषट्रीय समुदाय का बहुत अधिक दबाव भारत पर नहीं आएगा.

भारत ने पहले इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में बात की. पड़ोसी देशों अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान से भी बात की गई.

आज भारत की विश्वसनीयता और स्वीकार्यता पहले से कहीं अधिक ज़्यादा है.

भारत का प्रतिक्रिया देने का पुराना ढांचा ख़त्म हो चुका है और अब सरकार नए विकल्पों पर विचार करेगी. भारत की मौजूदा सरकार ये स्पष्ट दिखा रही है कि भले ही हम दो ढाई साल से कुछ न कर पाएं हों लेकिन अब हमारी नीति स्पष्ट है और सभी विकल्प खुले हैं.

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