जो सरहद पर हैं उनकी चिंताएं कुछ और

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Image caption पंजाब के सीमावर्ती गांवों से पलायन करते लोग.

गुरुवार को भारतीय सेना के एलओसी पर सर्जिकल स्ट्राइक की जानकारी देने के बाद से भारतीय नेताओं ने अपनी प्रतिक्रियाओं में ख़ुशी का इज़हार किया है. लेकिन क्या हाल है उन इलाक़ों का जो पाकिस्तानी सीमा से सटे हैं?

पंजाब के सीमावर्ती गांवों से लोगों ने पलायन करना शुरू कर दिया है. यहां स्कूलों की भी छुट्टी कर दी गई है जबकि शिक्षकों की छुट्टियां रद्द हैं.

गुरुद्वारों से लोगों से सुरक्षित ठिकानों पर जाने की अपील किए जाने के बाद अटारी, रानिया, फिरोज़पुर और गुरदासपुर सेक्टर के कई गांवों से बच्चों और औरतों को रिश्तेदारों के यहां भेज दिया गया है.

स्थानीय संवाददाता रविंद्र सिंह रोबिन के मुताबिक पंजाब सरकार ने कई ज़िलों में पलायन के इंतज़ाम पर नज़र रखने के लिए सचिव स्तर के छह अधिकारी तैनात किए हैं.

वहीं पंजाब सीमा पर रहने वाले लोगों का कहना हैं कि उन पर दो तरफ़ा मार पड़ रही है. एक तो उन्हें अपनी खड़ी फ़सल छोड़नी पड़ रही हैं वहीं घर भी छोड़ना पड़ रहा है.

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Image caption पंजाब के सीमावर्ती गांवों में गुरुद्वारों से लोगों से सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचने की अपील की गई है.

पंजाब के सीमावर्ती गांव के एक युवक ने बताया, "गुरुद्वारे से दो ढाई घंटे के अंदर गांव खाली करने का ऐलान किया गया. ग़रीब लोग अपने बच्चों और थोड़े बहुत सामान को लेकर गांव से चले गए. बच्चों का स्कूल भी बंद कर दिया गया है. कोई कैंप भी नहीं है जहां जाकर रुक जाए."

स्थानीय संवाददाता रविंद्र सिंह रोबिन के मुताबिक पंजाब सरकार ने कई ज़िलों में पलायन के इंतेज़ाम पर नज़र रखने के लिए सचिव स्तर के छह अधिकारी तैनात किए हैं.

वहीं श्रीनगर में बीबीसी संवाददाता रियाज़ मशरूर ने बताया कि सीमावर्ती ज़िलों में लोग असमंजस में हैं.

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Image caption गोलीबारी की फ़ाइल तस्वीर

ख़ासतौर से बारामूला और कुपवाड़ा ज़िलों में लोगों ने 2003 में हुए युद्धविराम के टूटने का डर ज़ाहिर किया जा रहा है.

इन लोगों से बातचीत आप बीबीसी हिंदी के रेडियो कार्यक्रम में या यहां सुन सकते हैं.

एक बुजुर्ग ने कहा, "ख़तरा इस बात का है कि कहीं दोनों देशों की मुठभेड़ न हो जाए. जनता काफ़ी परेशान है. ख़ासकर मीडिया ने जो हौव्वा खड़ा किया है उससे लोग बहुत परेशान हैं. लोग बिखर जाते हैं, एक जगह से दूसरी जगह जाना पड़ता है. उससे बचने के लिए हम ये चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच आपसी बातचीत हो."

एक अन्य बुज़ुर्ग ने कहा, "आप कहते हैं सीज़फ़ायर तोड़ेंगे. किसी के बाप को पता नहीं है कि गोला कहां गिरेगा, बंकर में गिरेगा या हमारे ऊपर गिरेगा."

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लोगों में डर है कि कहीं गोलीबारी की क़ीमत उन्हें न चुकानी पड़े. एक बुज़ुर्ग ने कहा, "हमें लगता है कि अगर संघर्ष विराम का उल्लंघन हुआ तो सीमा पर रह रहे लोगों को बहुत दिक्कत हो जाएगी. लोग मरेंगे, ये अच्छा थोड़े ही होगा. बेहतर हो कि बातचीत से ही मामला ठीक हो जाए."

लोगों का ये भी कहना है कि बातचीत से हल निकलना चाहिए. एक नौजवान ने कहा, "इस तरह ज़बानी जंग नहीं होनी चाहिए. बैठकर बातचीत होनी चाहिए पूरी दुनिया को पता चलेगा कि कुछ हो रहा है. गोलीबारी से यहां भी जाने जाएंगी, वहां भी जानें जाएंगी."

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Image caption फ़ाइल तस्वीर

"जिन लोगों ने गोलीबारी नहीं देखी है वही बोल रहे हैं, जो सीमा पर रहते हैं वो जानते हैं गोलीबारी क्या होती है."

एक और बुज़ुर्ग ने कहा, "हम गोलीबारी नहीं चाहते हैं, इससे हमारा ज़्यादा नुकसान होता है. हम तो यहीं सीमा पर रहते हैं, कहां जाएंगे. हमारे पास पुराने तज़ुर्बे बहुत सख़्त है. जैसा कि मोदी ने कहा है कि हमें ग़रीबी से लड़ना चाहिए. वही सही है. मारधाड़ मसलें का हल नहीं हैं."

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Image caption भारत पाक सीमा पर गोलीबारी की फ़ाइल तस्वीर

लोगों का ये भी कहना है कि बमबारी से बचने के लिए सेना के पास तो बंकर हैं लेकिन आम लोगों के लिए कोई इंतज़ाम नहीं हैं.

एक युवा ने कहा, "सेना के पास तो छुपने के लिए बंकर हैं, लेकिन हमारे पास क्या है. हम तो मरे हुए हैं. प्रशासन कम से कम सीमा पर रह रहे लोगों के बारे में सोचे. जिस तरह फौज के लिए बंकर बनाए गए हैं वैसे ही गांव वालों के लिए भी बंकर बनाए जाने चाहिए."

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