कावेरी मुद्दे पर देवेगौड़ा की हड़ताल ख़त्म

इमेज कॉपीरइट Kashif Masood

केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा और अनंत कुमार से आश्वासन मिलने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म कर दी है.

पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा शनिवार सुबह इस मांग के साथ भूख हड़ताल पर बैठे थे कि कावेरी के पानी के बंटवारे पर जारी विवाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दखल करना चाहिए.

केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा और अनंत कुमार ने बेंगलुरु में देवेगौड़ा को भरोसा दिलाया है कि प्रधानमंत्री मोदी कावेरी नदी जल विवाद मामले पर नज़र बनाए हुए हैं.

इससे पहले, भूख हड़ताल के दौरान 84 वर्षीय देवेगौड़ा ने बीबीसी से कहा, ''साल 2007 में कावेरी जल प्राधिकरण के फैसले के बाद मैंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की थी. तब उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार डीएमके के समर्थन पर निर्भर है, इसलिए वे कुछ नहीं कर सकते. लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के पास लोकसभा में 282 सीटें हैं और उन्हें तमिलनाडु पर निर्भर होने की कोई ज़रूरत नहीं है.''

देवेगौड़ा ने कहा, ''मैं न्यायपालिका पर सवाल नहीं उठा रहा हूं. मैं एक साधारण आदमी हूं. कर्नाटक तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने के लिए तैयार है. तथाकथित मॉनिटरिंग कमेटी को दोनों राज्यों में जाने दीजिए और तय करने दीजिए कि पानी पर्याप्त मात्रा में है या नहीं.''

इमेज कॉपीरइट Getty Images

कर्नाटक ने जब कावेरी प्राधिकरण के फैसले के मुताबिक तमिलनाडु के लिए पानी नहीं छोड़ा, तो तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई. कर्नाटक ने कहा कि ख़राब मॉनसून की वजह से उसके हिस्से में पानी की कमी हो गई है.

इसके बाद कोर्ट के आदेश पर कर्नाटक 15,000 क्यूसेक पानी छोड़ने पर राज़ी हुआ, लेकिन बाद में उसने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाते हुए पानी की मात्रा घटाकर 10,000 क्यूसेक करने का आग्रह किया.

लेकिन कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक को फिलहाल 12,000 क्यूसेक पानी तमिलनाडु के लिए छोड़ना ही होगा. कोर्ट ने सुपरवाइज़री कमेटी से भी इस मामले को देखने के लिए कहा.

कमेटी ने दोनों राज्यों में पानी की स्थिति देखते हुए 3000 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया. लेकिन कोर्ट ने इसे बढ़ाकर 6000 क्यूसेक कर दिया. साथ ही केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वो एक महीने के भीतर कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड का गठन करे.

इसके बाद कर्नाटक ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित करके कहा कि उसके जलाशयों में मौजूद बाकी पानी को सिर्फ पेयजल आपूर्ति के लिए ही छोड़ा जाएगा.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)