'गांव तो छोड़ दिया लेकिन डर अभी भी है'

Image caption तारसेम सिंह

पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने पाकिस्तानी सीमा से सटे गांवों का मुआयना किया है.

इन गांवों के लोग सेना की मदद से बाहर निकल चुके है और उन्होंनें दूसरी जगहों पर शरण ले ली है.

बीबीसी ने इनमें से कुछ लोगों से मुलाकात की. इन्होंने अपने बारे में बताया और कहा कि उन्हें किन हालात में अपना घर छोड़ना पड़ा.

बीबीसी से बात करते हुए 50 साल के तरसेम सिंह ने कहा, "हम मज़दूरी करते हैं. हमारे परिवार में सात सदस्य हैं. यहाँ गाँव में बहुत डर है. हम आसपास अपने रिश्तेदारों के घर जा रहे हैं. गांव में बच्चे सुरक्षित नहीं हैं."

Image caption कुलवंत कौर

दूसरी ओर 39 साल की कुलवंत कौर ने कहा कि उनके पास एक गाय और एक भैंस है. उन्हें ले जाने के लिए उन्होंने 2000 रुपए में किराए पर एक गाड़ी ली है.

वे कहती हैं, "हमें समझ नहीं आ रहा कि क्या करें. यहाँ ख़तरा है."

Image caption इंद्रजीत सिंह

इंद्रजीत सिंह ने बीबीसी से कहा, "हमारे परिवार में सात लोग हैं. टीवी में जे ख़बरें आ रही हैं उन्हें देखकर लग रहा है कि यहाँ ख़तरा है. सभी बोल रहे हैं कि ख़तरा है. सरकारी अधिकारी गांव आए थे. उन्होंने यहाँ से चले जाने को कहा."

Image caption शिंदे सिंह

वहीं, 47 साल के शिंदे सिंह के परिवार में दस लोग हैं. उनका कहन है कि पूरा का पूरा गांव ही खाली हो रहा है. सरकारी अधिकारियों ने उनसे गांव छोड़ कर चले जाने को कहा है.

Image caption जोगिंदर सिंह

जोगिंदर सिंह ने बीबीसी से कहा, हम मेहनत मज़दूरी करते हैं. हमारी पाँच लड़कियाँ हैं. यहाँ गाँव में एक बेटी की ससुराल है. हम उसके परिवार को लेने आए हैं. यहाँ से बलटोहा गाँव जाएँगे. यहाँ सभी डरे हुए हैं.

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