'वाघा बॉर्डर पर तनाव नहीं, राजनीति है'

रविवार को भारत-पाकिस्तान की वाघा-अटारी सीमा पर रोज़ाना होने वाले बीटिंग रिट्रीट को देखने के लिए चार दिनों बाद लोगों को अनुमति मिली.

हालांकि इस दौरान पाकिस्तानी दर्शकों की तरफ से पत्थर फेंके गए और कश्मीर के समर्थन में नारे लगाए गए.

घटना के तुरंत बाद भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच पाकिस्तान के दर्शकों के व्यवहार को लेकर फ्लैग मीटिंग हुई है.

इसी बीच बीबीसी ने वाघा-अटारी बॉर्डर पर मौजूद कुछ लोगों से बातचीत की.

Image caption गुरुविंदर सिंह

अटारी बॉर्डर ट्रक एसोसिएशन के गुरुविंदर सिंह ने बीबीसी को बताया, "यहां लड़ाई का वैसा कोई माहौल नहीं है, जैसा कि करगिल युद्ध के समय में था, जब यहां पर फ़ौज जमा थी. यहां माहौल बिलकुल ठीक है और लड़ाई की कोई बात नहीं है."

गुरुविंदर सिंह का कहना है, "हमारे एसोसिएशन के पास 450 ट्रक है. इस तनाव का हमारे काम पर कोई असर नहीं पड़ा है. काम रोज़ की तरह ही चल रहा है. यह सब राजनीतिक स्टंट है, लोगों से 10 किलोमीटर पीछे जाने को कहा जा रहा है. कहां जाएंगे लोग? किसानों की पकी हुई फ़सल खेत में पड़ी है, उसे छोड़कर कहां जाएं?"

लोगों का कहना है कि पंजाब की अर्थव्यवस्था खेती पर निर्भर है और ऐसे में लोगों से अपने खेत छोड़कर जाने को कहा जा रहा है.

Image caption कंवलजीत सिंह

वाघा बॉर्डर के क़रीब ही दुकान चलाने वाले कंवलजीत सिंह का कहना है, "इस जगह पर एक हज़ार लोग काम करते हैं. जो दुकान, रेहड़ी या पार्किंग से पैसे कमा कर अपना गुज़ारा करते हैं, लेकिन चार दिनों से सारा काम बंद पड़ा है."

वहीं शो पीस की दुकान चलाने वाले कुलदीप ने बीबीसी को बताया, "चार दिनों के बाद स्थिति थोड़ी बदली है, क्योंकि बीएसएफ़ वाले पीछे से ही लोगों को इस तरफ नहीं आने देते थे. लेकिन अब कुछ लोग इस तरफ आ रहे हैं. यहां कोई ख़तरा नहीं है."

Image caption कुलदीप

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सरहद पार से आने वाले ट्रक ड्राइवरों ने भी बताया है कि सीमा के उस पार ऐसा कोई माहौल नहीं है.

लोग आरोप लगा रहे हैं कि सरकार जबरन सबको 10 किलोमीटर दूर जाने को कह रही है.

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