'इंदिरा गांधी होतीं तो मैं कांग्रेस में होता'

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Image caption शत्रुघ्न सिन्हा

भाजपा नेता और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तारीफ़ कर एक बार फिर अपना पार्टी भाजपा नेताओं की नाराज़गी मोल ली है.

शत्रुघ्न सिन्हा अपने ऊपर लिखी गयी किताब 'एनीथिंग बट खामोश' के विमोचन के लिए जमशेदपुर आए थे. विमोचन के औपचारिक समारोह से पहले उन्होंने पत्रकारों को लंच पर बुलाया और इंदिरा गांधी से अपने संबंधों की खुलकर चर्चा की. शत्रुघ्न सिन्हा ने बताया कि इंदिरा गांधी उन्हें बहुत मानती थीं.

उन्होंने कहा कि वो इंदिरा गांधी से बेहद प्रभावित हैं. उन्होंने कहा है कि इंदिरा गांधी नैतिक मूल्यों पर चलने वाली राजनीतिज्ञ थीं. इस कारण वे सबसे अलग थीं.

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा , ''अगर इंदिरा गांधी जिंदा होतीं, तो मैं शायद कांग्रेस पार्टी में होता. मैंने राजनीति का ककहरा भी कांग्रेस के सुबोधकांत सहाय से सीखा है. यह अलग बात है कि 2-4 लोगों के कारण मैं भाजपा में आ गया और अब इस पार्टी का सांसद हूं.''

इस बयान के सार्वजनिक होने के बाद अधिकतर भाजपा नेताओं ने विमोचन समारोह से खुद को दूर रखा. ऐसे लोग आमंत्रण के बावजूद विमोचन समारोह में शामिल नहीं हुए.

शत्रुघ्न सिन्हा की इस किताब का विमोचन पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा को करना था. इसके लिए बांटे गए कार्ड पर भी उनका नाम था. लेकिन वे कार्यक्रम में नहीं आए. उन्होंने हजारीबाग में अपनी व्यस्तता का हवाला देकर खुद को इससे अलग कर लिया.

उनकी गैरमौजूदगी में कांग्रेस के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने इस किताब का विमोचन किया. उनके साथ झारखंड सरकार के वरिष्ठ मंत्री सरयू राय भी मंच पर मौजूद रहे. इन दोनों लोगों के नाम आमंत्रण पत्र में नहीं छापे गए थे. शत्रुघ्न सिन्हा ने समारोह से पहले सुबोधकांत सहाय को अपना राजनीतिक शिक्षक बताया था.

इधर लोग यशवंत सिन्हा के विमोचन समारोह में नहीं आने और सुबोधकांत सहाय के अचानक आने को शत्रुघ्न सिन्हा के इंदिरा गांधी वाले बयान से जोड़कर देख रहे हैं. सोशल मीडिया में इसकी खूब चर्चा हो रही है.

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