...और चौकीदार का बेटा बन गया अरबपति

Image caption अपने दफ्तर में आचार्य बालकृष्ण

भारत में लोकप्रिय योग गुरु बाबा रामदेव के करीबी सहयोगी आचार्य बालकृष्ण की कहानी किसी किवदंती की तरह लगती है. एक ग़रीब नेपाली चौकीदार के परिवार में पैदा हुए बालकृष्ण को हाल में भारत के 50 शीर्ष अरबपतियों की फ़ोर्ब्स सूची में शामिल किया गया है.

44 साल के आचार्य बालकृष्ण भारत की सबसे तेज़ रफ्तार से आगे बढ़ती उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनी पतंजलि आर्युवेद लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हैं. फ़ोर्ब्स के मुताबिक आचार्य बालकृष्ण भारत के 48वें अमीर व्यक्ति हैं, जिनकी कुल संपत्ति ढाई अरब अमरीकी डॉलर है.

उनकी कंपनी शैंपू से लेकर अनाज और साबुन से लेकर नूडल्स तक, हर चीज़ बेचती है. हरिद्वार में नेपाली माता-पिता के घर जन्मे आचार्य बालकृष्ण एक आम सी ज़िंदगी जीते हैं और पतंजलि आयुर्वेद के रोज़मर्रा का कामकाज उन्हीं के ज़िम्मे है.

Image caption पतंजलि योगपीठ की मुख्य इमारत सद्भावना

हरिद्वार के अपने दफ्तर में बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि कंपनी की संपत्ति उनकी निजी नहीं है, बल्कि उस ब्रांड की है जो समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सेवा प्रदान करता है.

वृद्धि

आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड में 97 फीसदी के स्वामित्व के साथ फ़ोर्ब्स सूची में इसी साल सितंबर में जगह बनाई. इस कंपनी की स्थापना उन्होंने साल 2006 में भारत के सबसे लोकप्रिय योग गुरु बाबा रामदेव के साथ मिलकर की थी.

रामदेव इस कंपनी में निजी हैसियत से कोई मालिकाना हक़ नहीं रखते, लेकिन हाई-प्रोफ़ाइल योग गुरु, पतंजलि आयुर्वेद का चेहरा भी हैं. कंपनी के ब्रांड एंबेसडर के तौर पर रामदेव इसके उत्पादों का प्रमोशन और विज्ञापन करते हैं.

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Image caption योगगुरु स्वामी रामदेव पतंजलि आयुर्वेद का मुख्य चेहरा हैं

बालकृष्ण का कहना है कि अरबपतियों की सूची में उनका नाम आना, पतंजलि में भारतीय उपभोक्ताओं के बढ़ते भरोसे का सबूत है, जो बाज़ार में क़रीब साढ़े तीन सौ उत्पाद बेचती है.

उन्होंने कहा, "कंपनी की संपत्ति किसी की निजी संपत्ति नहीं है. ये समाज और समाज सेवा के लिए है."

आचार्य बालकृष्ण पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के महासचिव भी हैं, जो क़रीब 5,000 पतंजलि क्लीनिक की देखभाल करती है और एक लाख से ज्यादा योग कक्षाओं का संचालन करती है.

बालकृष्ण पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति भी हैं, जिसकी योजना जड़ी-बूटी पर आधारित दवाओं की शिक्षा का विस्तार करने की है. वो पतंजलि योगपीठ के मुख्यालय की मुख्य इमारत में बने अस्पताल की पहली मंज़िल पर स्थित साधारण से दफ्तर से काम करते हैं.

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Image caption आचार्य बालकृष्ण

उनके दफ्तर का वातावरण बाबा रामदेव की तस्वीरों, एक बौद्ध पेंटिंग, कुछ किताबों और स्मारिकाओं की वजह से आध्यात्मिक-सा लगता है. आचार्य बालकृष्ण के दफ्तर में कोई कंप्यूटर या लैपटॉप नहीं है और वो कहते हैं कि उनके पास भी ये चीज़ें नहीं हैं.

अरबपति बालकृष्ण बताते हैं कि उनके सहयोगी उनके लिए कंप्यूटर का ज़रूरी काम करते हैं और संवाद के लिए वो एक आईफ़ोन इस्तेमाल करते हैं. वो ये भी बताते हैं कि उन्होंने अपने काम से एक दिन के लिए भी छुट्टी नहीं ली है.

बालकृष्ण कहते हैं, "मेरी अपने लिए कोई योजना नहीं है. इसीलिए अगर मैं छुट्टी लूं भी तो क्या करूंगा. मैं हर दिन सुबह से देर शाम तक काम करता हूं और अपनी ऊर्जा और समय का शत-प्रतिशत अपने काम को देता हूं."

आचार्य बालकृष्ण बताते हैं कि वो और बाबा रामदेव 11,000 कर्मचारियों वाली कंपनी से कोई तनख़्वाह नहीं लेते.

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Image caption रामदेव का योग शिविर

बचपन

आचार्य बालकृष्ण ने अपना बचपन पश्चिमी नेपाल के सियांग्जा ज़िले में बिताया, जहां उन्होंने कक्षा पांच तक पढ़ाई की. उन्होंने बताया कि वो भारत के हरिद्वार में पैदा हुए, जब उनके पिता वहां एक चौकीदार के रूप में काम करते थे. उनके माता-पिता अभी भी नेपाल के पुश्तैनी घर में रहते हैं.

भारत लौटने के बाद हरियाणा में खानपुर के एक गुरुकुल में पढ़ाई करने के दौरान वे 1988 में बाबा रामदेव के मित्र बन गए. उसके बाद से दोनों साथ काम कर रहे हैं. जून 2011 में सीबीआई ने बालकृष्ण के ख़िलाफ़ एक मामला दर्ज किया. उनपर आरोप लगा कि उनकी ज़्यादातर डिग्री और काग़ज़ात जाली हैं, जिसमें उनका पासपोर्ट भी शामिल था.

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि उन्होंने कुछ भी ग़लत नहीं किया. उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ़ लगाए गए आरोप यूपीए सरकार का एक 'योजनाबद्ध षड्यंत्र' था.

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Image caption योग गुरु रामदेव योगाभ्यास करते हुए

उन्होंने कहा कि उनके पास वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से मिला प्रमाण-पत्र है. काग़ज़ातों को संभालकर रखने और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें पेश करने की ज़िम्मेदारी विश्वविद्यालय की है.

साल 2012 में जब सीबीआई ने धोखाधड़ी के एक मामले उन्हें तलब किया तो बालकृष्ण कथित रूप से फ़रार हो गए. उसके बाद उनके खिलाफ़ गैर-कानूनी रूप से पैसे के कथित हेरफेर का मामला दर्ज किया गया.

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार में छपी ख़बर के मुताबिक 2014 में एनडीए सरकार के सत्ता में आने के बाद उनके खिलाफ़ दर्ज मामले बंद कर दिए गए. उनके आलोचक भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी को बढ़ावा देने और स्थानीय ब्रांड के बीच एक लिंक देखते हैं.

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Image caption पतंजलि आयुर्वेद के उत्पाद

लेकिन आचार्य बालकृष्ण कहते हैं कि पतंजलि के विकास और बीजेपी सरकार के बीच कोई संबंध नहीं है. वो कहते हैं कि कंपनी की तरक़्क़ी दरअसल दो दशक के कठिन परिश्रम का परिणाम है.

जड़ी-बूटी

पतंजलि की वेबसाइट पर आचार्य बालकृष्ण का परिचय आयुर्वेद, संस्कृत भाषा और वेद के महान ज्ञाता के रूप में है, जिन्होंने जड़ी-बूटियों पर कई किताबें और शोध-पत्र लिखे हैं. बालकृष्ण कहते हैं कि पतंजलि ने क़रीब 100 वैज्ञानिकों को जड़ी-बूटियों के शोध के काम में लगा रखा है और 'जड़ी-बूटियों का एक विश्वकोश' तैयार करने का काम भी कर रही है.

वो ये भी बताते हैं कि उन्होंने क़रीब 65,000 किस्म की जड़ी-बूटियों पर काम किया है और दावा करते हैं जड़ी-बूटियों के औषधीय गुण पर लिखी उनकी एक किताब की एक करोड़ प्रतियां बिक चुकी हैं.

उन्होंने ये भी बताया कि जड़ी-बूटियों के जिस विश्वकोश पर वो काम कर रहे हैं वो क़रीब डेढ़ लाख पन्नों की होगी. आचार्य बालकृष्ण ने कहा, "मुझ पर मेरी मां का गहरा प्रभाव है और वो मेरी प्रेरणास्रोत भी हैं. जड़ी-बूटियों के मेरे ज्ञान का आधार मां के घरेलू नुस्खे हैं." पतंजलि योगपीठ में आचार्य बालकृष्ण का जन्मदिन जड़ी-बूटी दिवस के रूप में मनाया जाता है.

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