'दुनिया के हर तीन गरीब में से एक भारत में'

वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम में हिस्सा ले रहे बिजनेस लीडर्स का मानना है कि भारत में विकास दर बढ़ने से गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों की सख्या में कमी आई है लेकिन अभी भारत को इस दिशा में काफी कुछ करने की जरुरत है.

वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम का सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित किया गया है जिसमें बिजनेस लीडर्स के अलावा सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि और कई देशों के राजनेता भी हिस्सा ले रहे हैं.

वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत की कुल आबादी का 30 फीसदी हिस्सा गरीबी रेखा के नीचे ज़िंदगी बसर करता है.

वर्ल्ड बैंक ने साल 2013 के आंकड़ों के आधार पर जानकारी दी है कि दुनिया के तीन गरीबों में से एक गरीब भारत का है.

इस परिभाषा के मुताबिक दुनिया में करीब 76 करोड़ गरीब हैं. दुनिया के सबसे ज्यादा गरीब अफ्रीका में हैं. भारत मे यह संख्या करीब 22 करोड़ है.

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Image caption फाइल चित्र

वर्ल्ड बैंक ने साल 2030 तक अति गरीबी को खत्म करने का लक्ष्य रखा है. लेकिन वैश्विक तौर पर आर्थिक मंदी वर्ल्ड बैंक के लिए चिंता का मामला है.

बात भारत की करें तो यहां आर्थिक विकास की वजह से मध्य वर्ग का दायरा बढ़ा है. भारत का घरेलू बाज़ार बड़ा है और दुनिया भर के निवेशक भारत की तरफ देख रहे हैं.

भारत में गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों की संख्या में भी कमी आई है. लेकिन अभी उम्मीद के मुताबिक नतीजे हासिल नहीं हुए हैं.

इकॉनमिक फोरम में जुटे प्रतिनिधि इसी बात पर विमर्श कर रहे हैं कि लोगों को गरीबी की रेखा से ऊपर कैसे लाया जाए.

फोरम में हिस्सा ले रहीं हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर गीता गोपीनाथ कहती हैं, "भारत में विकास (ग्रोथ) का गरीबी पर बहुत सकारात्मक प्रभाव हुआ है. इसने कई लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है. लेकिन ये काफी नहीं है."

भारत में गरीबी उन्मूलन के लिए कई कार्यक्रम चलाए गए हैं लेकिन गीता गोपीनाथ उनके नतीजों से ज्यादा प्रभावित नहीं हैं.

वो कहती हैं, "अतीत में लक्ष्य हासिल करने के लिहाज से ये ज्यादा प्रभावी साबित नहीं हुए हैं."

हालांकि, वो 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' स्कीम को लेकर उत्साहित हैं.

गीता गोपीनाथ कहती हैं, "मेरे लिए सबसे ज्यादा उम्मीद जगाने वाली बात ये है कि अब हमारे पास नागरिकों को यूनीक आईडी देकर उनकी विशेष तौर पर पहचान है. भारत में अब हम लाभ हासिल करने वाले को सटीक तौर पर लक्षित कर सकते हैं."

गीता गोपीनाथ बताती हैं कि वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम का सम्मेलन भारत के डिजीटल रूपांतर को लेकर है. इसमें जानकारी दी जा रही है कि डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करते हुए किस तरह विकास हासिल हो सकता है.

रोजगारों के नए अवसर पैदा करना भी भारत के लिए बड़ी चुनौती है.

इस पर गीता गोपीनाथ कहती हैं, "भारत जो दो साल से कर रहा है, उसे आगे भी करते रहना होगा. मसलन व्यापार करने के रास्ते आसान बनाना, दुनिया के बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बनना, अगर भारत ऐसा करता रहता है तो इससे वृद्धि स्थिर होगी और नौकरियों के अवसर पैदा होंगे."

अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव जैसे बाहरी मुद्दों के भारत पर असर के सवाल पर वो कहती हैं कि बाहरी घटनाओं की भारतीय बाज़ारों खासकर स्टॉक मार्केट पर प्रतिक्रिया नज़र आती है. निश्चित तौर पर इसका प्रभाव होगा.

सम्मेलन में श्रीलंका के रणनीतिक विकास और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मलिक समरविक्रमा ने भारत और पाकिस्तान से साथ काम करने के तरीके तलाशने को कहा.

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