क्या अन्नाद्रमुक को नया नेता चुन लेना चाहिए

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तमिलनाडु के राज्यपाल विद्यासागर राव ने अन्नाद्रमुक सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों से प्रशासन और कावेरी मुद्दे पर कुछ जानकारियां मांगी हैं जिन्हें लेकर राजनीतिक हलकों में कई सवाल उठ रहे हैं.

राज्यपाल के इस कदम से पहले मुख्यमंत्री जयललिता का इलाज कर रहे अस्पताल ने जानकारी दी कि उन्हें 'लंबे वक्त तक अस्पताल में रहना पड़ेगा.'

डॉक्टरों का एक दल बीते 14 दिनों से मुख्यमंत्री जयललिता का इलाज कर रहा है.

राज्यपाल ने जो जानकारियां मांगी हैं, वो उस तरह की हैं जैसे कि आम तौर पर प्रशासन का प्रमुख या फिर मुख्यमंत्री लेते हैं अथवा राज्य में राष्ट्रपति की शासन की स्थिति में मांगी जाती हैं.

इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या राज्यपाल अन्नाद्रमुक को ये संकेत देने की कोशिश कर रहे हैं कि पार्टी को नया नेता चुन लेना चाहिए.

उदाहरण के लिए राज्यपाल ने राज्य के मंत्री ओ पन्नीर सेल्वम और ई पलानीस्वामी से पूछा कि कावेरी जलाशय के जलस्तर के आकलन के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त टेक्निकल कमेटी के दौरे के लिए राज्य प्रशासन ने क्या रणनीति बनाई है.

डेक्कन क्रोनिकल के स्थानीय संपादक भगवान सिंह कहते हैं, '' यह पहली बार है कि जब राज्यपाल ने औपचारिक तौर पर बताया है कि प्रशासन अब राज भवन से चलाया जा रहा है. इस बात से इतना तो साफ है कि राज्यपाल, शासक दल पर मुख्‍यमंत्री जे. जयललिता के बजाए किसी को नया नेता चुनने का दबाव बना रहे हैं.''

वे कहते हैं, 'राज्यपाल ने मुख्य सचिव को एक दिन में दो बार तलब किया. उन्हें दो वरिष्ठ मंत्रियों के साथ भी तलब किया गया. राज्यपाल ने इन सभी से जयललिता के स्‍वास्‍थ्‍य, राज्‍य के सामान्‍य प्रशासन और कर्नाटक के साथ जल विवाद का निर्णय करने को लेकर भी जानकारी हासिल की."

उन्होंने कहा, "ये वो सवाल हैं जो सामान्य तौर पर मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों से करते हैं. लेकिन यही सवाल अस्पताल के ये जानकारी देने के बाद पूछे गए हैं कि उन्हें (जयललिता को) लंबे समय तक वहां रहना होगा. "

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किसी दूसरे राज्य में इस आधार पर नया मुख्यमंत्री चुन लिया जाता. कम से कम तब तक के लिए जब तक कि मुख्यमंत्री ठीक न हो जाएं लेकिन अन्नाद्रमुक जैसी पार्टियों के लिए दिक्कत ये है कि यहां जयललिता की जो हैसियत है, वो किसी और नेता की नहीं है. लोगों ने विधायकों को इस वजह से वोट दिया है कि वो उनकी नेता हैं.

राजनीतिक विश्लेषक मालन कहते हैं, "उस मेडिकल बुलेटिन के बाद सवाल उठ रहा है कि प्रशासन कौन चला रहा है. हां, हमारे यहां ऐसी सरकार महीनों चली है जबकि बीमार मुख्यमंत्री ने अपने विभाग वरिष्ठ मंत्रियों को दे दिए थे. ऐसा एमजी रामचंद्रन के मुख्यमंत्री काल में हुआ था."

मालन के मुताबिक तब कानूनी सलाह के तौर पर बताया गया था कि विभागों का बंटवारा मुख्यमंत्री के मौखिक निर्देश पर किया जा सकता है, इस बंटवारे के लिए लिखित निर्देशों की आवश्यकता नहीं है.

इसलिए तत्कालीन मुख्य सचिव ने राज्यपाल को सूचित किया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें, राज्यपाल को वरिष्ठ मंत्रियों के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर सलाह देने का मौखिक निर्देश दिया है.

इस बीच बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर चुके हैं.

उन्होंने ये मांग मुख्यमंत्री जयललिता के अस्पताल में भर्ती होने के बाद राज्य में प्रशासनिक अव्यवस्था होने का आरोप लगाते हुए की है.

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