दीनदयाल उपाध्याय पर टिप्पणी भारी पड़ी

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Image caption शिव अनंत तायल की फेसबुक पोस्ट

जनसंघ के विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर टिप्पणी करना भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी शिव अनंत तायल को भारी पड़ गया है.

कांकेर में ज़िला पंचायत के मुख्य कार्यपालक अधिकारी शिव तायल को सरकार ने उनके पद से हटाते हुए राजधानी रायपुर के मंत्रालय में अटैच कर दिया है.

फेसबुक पर की गई उनकी टिप्पणी को सिविल सेवा आचरण संहिता का उल्लंघन मानते हुये सरकार ने शिव अनंत तायल को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है.

तायल ने शुक्रवार को अपनी फेसबुक वाल पर दीनदयाल उपाध्याय के बारे में लिखा था कि उनका लेखक या विचारक के रूप में एक भी ऐसा काम नहीं, जिससे उनकी विचारधारा समझी जा सके.

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Image caption तायल की फाइल फोटो

आईएएस तायल ने फेसबुक पोस्ट में कहा था ''वेबसाइटों में एकात्म मानववाद पर उपाध्याय के सिर्फ चार लेक्चर मिलते हैं. वह भी पहले से स्थापित विचार थे. उपाध्याय ने कोई चुनाव भी नहीं लड़ा. इतिहासकार रामचंद्र गुहा की पुस्तक मेकर्स ऑफ मार्डन इंडिया में आरएसएस के तमाम बड़े लोगों का जिक्र है लेकिन उसमें उपाध्याय कहीं नहीं है. मेरी अकादमिक जानकारी के लिए कोई तो पंडित उपाध्याय के जीवन पर प्रकाश डाले.''

हालांकि जब विवाद बढ़ा तो तायल ने शुक्रवार देर रात को अपना पोस्ट हटा दिया और अपने पोस्ट के लिए माफ़ी भी मांगी. लेकिन इस माफ़ीनामे का कोई असर नहीं हुआ.

राज्य की भारतीय जनता पार्टी की सरकार के कई मंत्री और विधायक तायल के ख़िलाफ़ मैदान में उतर आए हैं. पार्टी प्रवक्ता और विधायक श्रीचंद सुंदरानी ने कहा कि तायल को फिर से प्रशिक्षण के लिए भेजे जाने की ज़रूरत है. वहीं वरिष्ठ मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने भी नाराज़गी जताई.

भारतीय जनता पार्टी के ही प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने पूरे मामले पर तायल के ख़िलाफ़ मानहानि का मामला दर्ज करने की बात कही है. उपासने ने कहा, "मैं पंडित दीनदयाल उपाध्याय का अनुयायी हूं और इस तरह की टिप्पणी मेरा निजी अपमान है."

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कुछ दिनों पहले ही बलरामपुर ज़िले के कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन ने भी फेसबुक पर दलितों को लेकर न्यायपालिका में होने वाले भेदभाव पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने कई नोटिस जारी किए थे.

मेनन ने पिछले सप्ताह ही इस मामले में सरकार से लिखित माफ़ी मांगी, जिसके बाद विवाद खत्म हुआ था.

फेसबुक पर ये विवाद ऐसे समय में सामने आए हैं, जब केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया में किए जाने वाले पोस्ट को भी सरकारी कर्मचारियों की सेवा संहिता में शामिल करने संबंधी क़ानून बनाने की पहल की है.

इस क़ानून को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने भी अपनी सहमति दे दी है.

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