गांधी की आत्मकथा याद कर रहे हैं कैदी

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गुजरात के शहर अहमदाबाद की सेंट्रल जेल में 650 कैदी महात्मा गांधी की आत्मकथा पर आधारित परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं. इनमें 16 कथित चरमपंथी भी शामिल हैं जिन पर साल 2008 में अहमदाबाद में सिलसिलेवार धमाके करने का आरोप है.

साबरमती सेंट्रल जेल के अधीक्षक सुनील जोशी ने बीबीसी को बताया कि ये पहला मौका है जब इतनी बड़ी तादात में कैदी किसी एक परीक्षा की तैयारी में लगे हैं और वो भी गांधी आत्मकथा जैसे विषय को लेकर परीक्षा दे रहे है.

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महात्मा गांधी ने जिस नवजीवन ट्रस्ट की स्थापना की थी, उसने बीते कई महीनों से साबरमती जेल के कैदियों के बीच जाकर गांधी विचारधारा को आधार बनाकर काम शरू किया है. कुछ दिन पहले गांधीजी और कस्तूरबा के जीवन पर आधारित पुस्तकों का विचोमन भी कैदियों के बीच कराया गया था.

नवजीवन ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी विवेक देसाई ने बीबीसी को बताया कि साबरमती जेल के साथ महात्मा गांधी का संबंध पुराना है. आजादी की लड़ाई के दौरान सजा होने के बाद उन्हें साबरमती सेंट्रल जेल में ही रखा गया था. महात्मा गांधी को जहां रखा गया था, वह बैरेक आज भी गांधी खोली के नाम से जानी जाती है.

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देसाई ने बताया कि हमने सोचा महात्मा जिस स्थान पर रहे हों उस जगह पर गांधीजी के विचारों का अमल होना चाहिए. इसी कारण हमने साबरमती जेल के कैदियों के लिये महात्मा गांधी की आत्मकथा पर आधारित परीक्षा लेने का निर्णय किया है.

साबरमती जेल के कुल तीन हजार कैदियों में से 650 कैदी परीक्षा देंगे. अच्छे नंबर लाने वालों को 5 से 25 हजार रुपये तक का पुरस्कार भी दिया जायेगा.

कैदी भारत की किसी भी प्रादेशिक भाषा में परीक्षा दे सकते हैं. परीक्षा में शामिल हो रहे कैदियों ने अंग्रेजी, हिंदी, गुजराती और उर्दू भाषा का चयन किया है.

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