पंपोर में चरमपंथियों ने किलेबंदी कर ली थी

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पंपोर की इमारत में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ सेना का अभियान समाप्त हो गया है. इस अभियान और हमले से जुड़े 7 सवालों का जवाब हमने सेना के सूत्रों से हासिल की:

इमारत का इस्तेमाल बंकर की तरह?

सेना के सूत्रों का कहना है कि दोनों चरमपंथी सात मंजिली इमारत में प्रवेश के बाद पहली मंजिल में आग लगा दी थी. उसके बाद दोनों ने सातवीं मंजिल पर पनाह ली. जहां के अलग अलग कमरों में उन्होंने विस्फोटक लगा दिए.

इसके बाद सेना का मुक़ाबला करने के लिए वे सातवीं मंजिल पर बार बार अपने कमरे बदलते रहे. लेकिन बाद में उनके पास विस्फोटक और गोली कम होते गए.

कौन हैं ये चरमपंथी?

सेना के सूत्रों के मुताबिक मारे गए दो चरमपंथियों के शव मिल गए हैं, लेकिन अभी तक उनकी पहचान के बारे में कुछ ख़ास पता नहीं चल पाया है.

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कहां चल रही थी मुठभेड़?

ये मुठभेड़ श्रीनगर से 15 किलोमीटर दूर इंटरप्रिन्योर डेवलपमेंट इंस्टीच्यूट की इमारत में चल रही थी. दरअसल यह इंस्टीच्यूट साढ़े तीन एकड़ के दायरे में फैला हुआ है और उसमें तीन इमारतें थीं.

मुख्य इमारत फरवरी में हुई मुठभेड़ में तबाह हो गई थी. इस बार मुठभेड़ सात मंजिली इमारत में चल रही थी, जो इंस्टीच्यूट का हॉस्टल है. इसमें कुल 60 कमरे थे.

इमारत में कैसे घुसे?

इमारत में चरमपंथियों के प्रवेश को लेकर अब तक दो तरह की बातें सामने आ रही हैं. पहली थ्योरी के मुताबिक दोनों चरमपंथी इमारत के पास से गुजरने वाली झेलम दरिया के रास्ते नाव से आए.

वहीं दूसरी थ्योरी के मुताबिक दोनों सुबह चार- पांच बजे के करीब हाईवे के रास्ते इमारत में कार से घुसे.

इमारत में किसी ने रोका नहीं?

यह इंस्टीच्यूट बीते तीन महीने से बंद चल रहा था. हॉस्टल में भी कोई लड़का मौजूद नहीं था. इमारत की सुरक्षा एकमात्र चौकीदार के ज़िम्मे थी, जिसने पहली मंजिल पर आग देखने के बाद पुलिस को फ़ोन किया.

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ख़ाली इमारत पर ध्यान क्यों नहीं?

इस इमारत में बीते फरवरी में भी चरमपंथियों के साथ मुठभेड़ हुई थी. लेकिन उस घटना में भी यह इमारत टारगेट नहीं थी. चरमपंथियों ने सीआरपीएफ जवानों पर हमला किया और भागते हुए इस इमारत में घुस आए थे.

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फिर भी सुरक्षा के इंतज़ाम नहीं किए गए. पर इस बार चरमपंथियों ने पहले से ही इमारत को अपना ठिकाना बनाया, ऐसे में ये सवाल ज़रूर खड़ा हो गया है कि ख़ाली पड़ी इमारतों को चरमपंथियों की शरणगाह बनने से रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने इंतज़ाम क्यों नहीं किए.

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