मिनहाज पोस्टमार्टम: शरीर में ख़ून के थक्कों के निशान

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Image caption इस अस्पताल में मिनहाज की मौत हुई थी और उसके बाद पोस्टमार्टम हुआ था.

झारखंड के जामताड़ा के दिघारी गांव निवासी मिनहाज अंसारी की पोस्टमार्टम के मुताबिक़ उनके पैर में ख़ून के थक्कों के निशान पाए गए हैं और मौत के वक़्त उनका पेट खाली था.

जामताड़ा के उपायुक्त रमेश कुमार दुबे ने इस बात की पुष्टि की है.

नारायणपुर थाने के दिघारी गांव के 25 वर्षीय मिनहाज को वाट्सएप पर कथित तौर पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोप में चार अक्तूबर को गिरफ्तार किया गया था.

नौ अक्टूबर को इलाज के दौरान रांची के सरकारी अस्पताल रिम्स में उनकी मौत हो गई.

मृतक मिनहाज मोबाइल एसेसरीज़ की दुकान चलाते थे.

उपायुक्त का कहना है कि अब बिसरा रिपोर्ट का इंतजार है.

मिनहाज का बिसरा सुरक्षित रखा गया है और उसे जांच के लिए फोरेंसिक लेबोरेट्री भेज दिया गया है.

उपायुक्त ने कहा है कि बिसरा की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही हम ठोस नतीजे पर पहुंच सकते हैं.

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मृतक के खाली पेट के सवाल पर उपायुक्त कहते हैं, "संभव है कि इलाज के दौरान उन्हें तरल पदार्थ पर रखा गया हो. उनकी दवाइयां तो चल ही रही थीं."

उधर जामताड़ा के पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार सिंह कहते हैं कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिनहाज अंसारी के पेट के अंदरूनी अंगों में क्षति होने की बात सामने नहीं आई है.

पुलिस अधीक्षक जोर देकर ये बात कहते हैं कि तेज बुखार की हालत में ही उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

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Image caption प्रशासन के लोग मृतक मिनहाज के परिजनों को मुआवजा देते हुए.

पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार सिंह का कहना है कि धर- पकड़ की वजहों से मृतक के पैरों पर ये निशान हो सकते हैं.

उनका कहना है कि आगे की कार्रवाई के लिए उन्हें बिसरा रिपोर्ट का इंतजार है और इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की गाइड लाइन के तहत जांच की जा रही है.

उधर मृतक के परिवारवालों का आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद मिनहाज की पुलिस पिटाई से मौत हुई है.

इस मामले में युवक के घर वालों को दो लाख बीस हजार रुपए का मुआवजा दिया गया है.

वहीं लिखित आवेदन के आधार पर पुलिस के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया है.

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Image caption दिघारी गांव के लोग

मिनहाज के पिता उमर मियां कहते हैं, '' सब लोग हकीकत छुपा रहे हैं. पूरा गांव इसे जानता है कि कितनी बेरहमी से मेरे बेटे की पुलिस ने पिटाई की थी. किसी को देखने तक नहीं दिया गया. वह और उनकी पत्नी जब थाने गए, तो उनके साथ बदसलूकी गई. मेरे बेटे को भूखा रखा गया."

वह कहते हैं, ''मुआवजा देने भर से मुझे इंसाफ नहीं मिल सकता. हम लोग तो इसे लेने से भी मना कर रहे थे." ये सब कहते हुए वे रो पड़ते हैं.

दिघारी गांव के नूर मोहम्मद कहते हैं कि मिनहाज कतई बीमार नहीं थे. अगर उन्हें इंसेफेलाइटिस होता, तो गांव वालों को भी पता होता.

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Image caption स्थानीय विधायक दिघारी गांव में

पुलिस की पिटाई के बाद ही उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और किसी को मिलने तक नहीं दिया.

जामताड़ा के विधायक इरफान अंसारी का आरोप है कि बुरी तरह से पिटाई के बाद पुलिस ने अपनी करतूत छिपाने के लिए मिनहाज को पहले जामताड़ा फिर धनबाद के अस्पताल में भर्ती कराया और हालत बिगड़ने पर रांची के रिम्स भेजा दिया था.

अन्य विपक्षी दल और सामाजिक संगठन भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

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