'दो-चार मीटिंग से चीन-पाक रिश्ते नहीं टूट सकते'

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गोवा में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत के लिए आतंकवाद का मुद्दा ख़ासा अहम था. भारत के लिए ये ख़ासतौर से पाकिस्तान के संदर्भ में अहम था.

लेकिन मैं नहीं समझता कि पूरा सम्मेलन पाकिस्तान या आतंकवाद के मुद्दे पर केंद्रित रहा. अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और पांचों देशों के आपसी समन्वय के मुद्दा भी चर्चा में हुई होगी.

चीनी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के मुद्दे पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है और बहुत ही औपचारिक सा बयान दिया है. लेकिन भारत इससे ज़्यादा की उम्मीद भी नहीं कर सकता था.

चीन का पाकिस्तान के साथ रिश्ता काफ़ी मज़बूत है. भारत दो चार मीटिंग से चीन-पाकिस्तान के 50 साल पुराने रिश्ते को तोड़ देगा, ऐसा नहीं हो सकता.

लेकिन भारत की तरफ से दवाब बनाने की जो कोशिश की जा रही है, मेरे ख़्याल से वो जारी रहेगी.

जहां तक सुरक्षा परिषद का सवाल है तो इसके लिए भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ़्रीका की दावेदारियां अपनी जगह हैं और चीन ने खुले तौर पर कभी उसका विरोध नहीं किया है.

चीन एनएसजी जैसे मुद्दे पर भी भारत के रास्ते में बाधाएँ खड़ी कर सकता है और उसके बाद भी कहता है कि आपको (भारत को) बातचीत जारी रखनी चाहिए.

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रूस और पाकिस्तान के बीच नज़दीकियां बढ़ीं हैं, लेकिन वो इतनी आगे नहीं बढ़ी हैं कि भारत और रूस के रिश्ते में कोई दरार आए.

ये बात सच है कि पिछले कुछ साल से भारत और रूस के रिश्ते थोड़े कमज़ोर हुए हैं, लेकिन उसके पीछे केवल भारत और अमरीका के बीच बढ़ती नज़दीकियां नहीं हैं.

इस दौरान रूस की तरफ से भी कुछ ऐसी चीजें हुई हैं जिनकी वजह से भारत के लिए रक्षा उकरण मुहैया कराने की रूस की विश्वसनीयता में थोड़ी कमी आ गई.

अब रूस के साथ जो रक्षा सौदे हुए हैं, उनसे रूस की आशंकाएं काफ़ी हद तक दूर होंगीं और भारत-रूस के संबंध बेहतर होंगे.

भारत ने ब्रिक्स सम्मेलन में अपने हितों के मुताबिक़ लंबी तैयारी की होगी. लेकिन जब इतनी बड़ी मीटिंग होगी तो संभव है कुछ मुद्दों पर एक देश का हित दूसरे देश के हित से टकराया होगा.

अब उसको आप कैसे संभालते हैं यह बहुत अहम हो जाता है.

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भारत ने ब्रिक्स सम्मेलन में अपने हितों के मुताबिक़ लंबी तैयारी की होगी. लेकिन जब इतनी बड़ी मीटिंग होगी तो संभव है कुछ मुद्दों पर एक देश का हित दूसरे देश के हित से टकराया होगा.

अब उसको आप कैसे संभालते हैं यह बहुत अहम हो जाता है.

( बीबीसी संवाददाता सलमान रावी के साथ बातचीत पर आधारित)

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