कश्मीर: सौ दिन की हड़ताल, करोड़ों के कारोबार का नुकसान

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भारत प्रशासित कश्मीर में पिछले सौ दिनों से भी ज़्यादा लंबे वक़्त से लगतार हड़ताल और कर्फ्यू की वजह से अब तक कश्मीर के कारोबार को करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है.

जुलाई महीने में दक्षिणी कश्मीर में हिज़बुल मुज़ाहिदीन का कथित कमांडर बुरहान वानी एक मुठभेड़ में मारा गया था. इसके बाद कश्मीर में हिंसा, प्रदर्शन, कर्फ्यू और बंद का सिलसिला लगातार जारी रहा है.

अब तक इन प्रदर्शनों में 91 आम नागरिकों की मौत सुरक्षाबलों की कारवाई में हो चुकी है. इसके अलावा सैकड़ों की संख्या में सुरक्षा बलों के जवान और आम नागरिक इन प्रदर्शनों में घायल हुए हैं.

कश्मीर चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स के प्रमुख मुश्ताक़ अहमद के मुताबिक़ कश्मीर को इस दौरान एक हज़ार करोड़ से ज़्यादा का नुकसान उठाना पड़ा है.

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इस नुकसान में कश्मीर का हर तरह का कारोबार शामिल है.

चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स के आंकड़ों के मुताबिक़ कश्मीर के हस्तशिल्प उद्योग को पिछले 100 दिनों से ज़्यादा के बंद और कर्फ्यू की वजह से 400 करोड़ से ज़्यादा का नुकसान उठाना पड़ा है.

कश्मीर होटल एंड रेस्टोरेन्ट एसोसिएशन का कहना है, "जो पांच सौ होटल हमारे पास हैं , उनके सभी 3 हज़ार कमरे पिछले 100 दिनों से खाली पड़े हैं. इनमें हर कमरे का किराया प्रतिदिन 2,500 रुपये है. "

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कश्मीर के पर्यटन उद्योग को भी यहाँ पिछले तीन महीने के तनाव भरे हालात से भारी नुकसान हुआ है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ 8 जुलाई से पहले हर रोज़ 12 हज़ार के क़रीब सैलानी कश्मीर आते थे, जबकि आज की यह तादाद 700 है.

कश्मीर पर्यटन विभाग के डायरेक्टर महमूद अहमद शाह ने बीबीसी को बताया "आठ जुलाई से अब तक कश्मीर में क़रीब साढ़े चार लाख सैलानियों को आना था, जो यहाँ के खराब हालात की वजह से नहीं आ सके. हम इस नुकसान के आंकड़े तो बता नहीं सकते, लेकिन जो नुकसान बीते तीन महीनों में हुआ है वह करोड़ों का है".

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कश्मीर के सेब उद्योग को भी तीन महीने के बंद और कर्फ्यू की वजह से हज़ारों करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है. कश्मीर में हर साल सेब का कारोबार 6 से 7 हज़ार करोड़ का होता है.

कश्मीर फ्रूट ग्रोअर्स और डीलर यूनियन के मुखिया बशीर अहमद का कहना है, "आठ जुलाई के बाद पहले दो महीनों में कर्फ्यू की वजह से हमें बहुत नुकसान उठाना पड़ा. इस दौरान हमारे सेब पर ख़राब मौसम की वजह से बीमारियों का हमला हुआ. कर्फ्यू की वजह से हम अपने बागों में जा नहीं सके और समय पर दवाई नहीं छिड़क सके".

उनके मुताबिक इससे सेब की क्वालिटी नहीं बन सकी और क्वालिटी न बनने की वजह से सेब की कीमत भी गिर रही है.

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चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स के आंकड़ों के मुताबिक़ इस आर्थिक नुकसान में कश्मीर का पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी शामिल है.

कश्मीर घाटी का ट्रांसपोर्ट उद्योग भी पिछले तीन महीनों से अब तक बहुत ज़्यादा प्रभावित हुआ है. नौ जुलाई से ही कश्मीर का पूरा पब्लिक ट्रांसपोर्ट ठप है.

राजधानी श्रीनगर में 5 हज़ार मिनी बसें हैं जो 9 जुलाई से ही अपने अपने ठिकानों पर खड़ी हैं.

अलगाववादी बीते 8 जुलाई से हर हफ्ते हड़ताल का कैलेंडर जारी करते हैं. ये कैलेंडरों वो समय बताता है जब दिन में कुछ घंटों की ढील भी दी जाती है जिसमें दुकानें खोली जाती हैं.

लेकिन इतने कम समय में पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपना काम बहाल नहीं कर पाया है.

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