काटजू कोर्ट में पेश हों : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू को सौम्या मर्डर केस में अदालत में पेश होने को कहा है.

सोमवार को न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति पीसी पंत और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की पीठ ने पूर्व न्यायाधीश काटजू के ब्लॉग का स्वत: संज्ञान लेते हुए उन्हें निजी तौर पर अदालत में पेश होने को कहा है.

जस्टिस काटजू ने अपने ब्लॉग में सौम्या हत्याकांड के फैसले की आलोचना की थी.

काटजू ने अपने ब्लॉग में लिखा था कि सौम्या दुष्कर्म और हत्या मामले में कोर्ट का फैसला गंभीर गलती था. उन्होंने लिखा था कि लंबे समय से क़ानूनी जगत में रह रहे न्यायाधीषों से ऐसे फैसले की उम्मीद नहीं थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जस्टिस काटजू व्यक्तिगत रूप से अदालत में आएं और बहस करें कि कानूनी तौर पर वह सही हैं या अदालत.

अदालत ने कहा कि पूर्व न्यायाधीश काटजू के प्रति उनके दिल में बहुत सम्मान है और कोर्ट चाहता है कि वे कोर्ट में आएं और खुली अदालत में बहस करें.

खंडपीठ ने कहा, "वह (जस्टिस काटजू) सम्मानित व्यक्ति हैं. हम उनसे आग्रह करते हैं कि वो व्यक्तिगत तौर पर आएं और अपनी पोस्ट में की गई आलोचना पर बहस करें. चलिए उन्हें अदालत में आने देते हैं और हमारे फैसले में मूलभूत कमियों के बारे में बहस करने देते हैं."

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कोर्ट ने कहा कि वह केरल सरकार और सौम्या की मां की समीक्षा याचिकाओं पर फैसला जस्टिस काटजू से बहस करने के बाद ही करेगी.

यह पहला मामला है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को फैसलों की आलोचना करने के लिए तलब किया है.

जस्टिस काटजू ने 15 सितंबर को ब्‍लॉग में लिखा कि बैंच ने मान लिया कि सौम्‍या ट्रेन से कूदी थी ना कि गोविंदस्‍वामी ने उसे धक्‍का दिया था. उन्‍होंने लिखा, "लॉ कॉलेज का एक छात्र भी जानता है कि अफवाही सबूत अस्‍वीकार्य होते हैं."

ब्‍लॉग में जस्टिस काटजू ने फैसले पर खुली अदालत में बहस करने की ज़रूरत भी बताई थी.

फरवरी 2011 को केरल में 23 साल की सौम्या के साथ रेप हुआ था. त्रिशूर स्थित फास्ट ट्रैक अदालत ने गोविंदास्‍वामी को मौत की सजा सुनाई थी.

केरल हाई कोर्ट ने भी उनकी मौत की सजा को बहाल रखा था. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि गोविंदास्वामी का इरादा लड़की की हत्या का नहीं था. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उसे हत्या का दोषी नहीं मानते हुए उसकी मौत की सजा को उम्र कैद में बदल दिया था.

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