'तब कोई भी करण जौहर हो सकता है'

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बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर करण जौहर ने भविष्य में पाकिस्तानी कलाकारों के साथ काम नहीं करने का वादा किया है.

ऐसा उन्होंने दक्षिणपंथी समूहों की ओर से उनकी हाल में आई फ़िल्म को सिनेमाघरों में दिखाए जाने का विरोध करने की धमकी के बाद कहा है.

उनकी इस फ़िल्म में पाकिस्तानी कलाकार फवाद ख़ान ने काम किया है. वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ भाटिया बता रहे है कि करण जौहर के इस बयान से कट्टरवादी ताकतों को हौसला मिलेगा. पढ़िए इस संदर्भ में उनकी राय:-

करण जौहर को एक वीडियो में बेचारों की तरह अपनी ग़लती मानते हुए देखकर कोई यह पूछे बिना नहीं रह सकता कि इस कहानी की स्क्रिप्ट किसने लिखी है और इसका निर्देशन किसने किया है?

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करण जौहर इस वीडियो में किसी गुमराह हो गए बच्चे की तरह दिख रहे हैं जो कान पकड़ कर अपनी ग़लती के लिए माफी मांग रहा हो कि उनसे ग़लती हो गई अब वो कभी भी 'पड़ोसी मुल्क' के कलाकारों को अपनी फ़िल्म में नहीं लेंगे.

इसे देखते हुए जेहन में सवाल उठता है कि कहां गए वो ठसक, आत्मविश्वास से लबरेज और जिंदादिल करण जौहर जिसे हम सभी जानते हैं और प्यार करते हैं.

इस मामले में उनकी हालत उस पीड़ित व्यक्ति की तरह हो गई है जिसे बहुत संभव है कि सज़ा मिलने से पहले यह मानना पड़ता है कि वो एक जासूस है.

वो एक ऐसे माहौल के शिकार हुए हैं जो सिर्फ़ एक राजनीतिक दल की ओर से खुलेआम मिलने वाली धमकी की वजह से नहीं तैयार हुआ है बल्कि हमारे उस राजनीतिक माहौल के शिकार हुए हैं जिसमें अब विचारों की विविधता के प्रति असहिष्णुता की भावना बढ़ती जा रही है.

कल तक 'असहिष्णुता' की चर्चा करने पर वो उखड़ जाते थे, आज 'पाकिस्तानी कलाकारों' के नाम पर गुस्सा हो रहे हैं और आने वाले कल में कुछ बिल्कुल ही अलग बात होगी जिसपर वो भड़क उठेंगे.

एक ही समय में इस भीड़ का एक हिस्सा सड़कों पर तैनात रहता है, तो एक टेलीविजन के स्टूडियो और सोशल मीडिया पर तो एक पूरे सीन के पीछे रहकर काम कर रहा होता है.

ये भीड़ यह तय करती है कि कोई तय किए गए एजेंडे से अलग नहीं जा सकता है और ना कहने वाले को कोई नहीं बचा सकता.

करण जौहर एक तेज़-तर्रार रचनात्मक बुद्धिवाले इंसान हैं. उन्होंने अपने बयानों और फ़िल्मों में अपनी इस प्रतिभा का परिचय दिया है.

महाराष्ट्र की क्षेत्रीय पार्टी नवनिर्माण सेना ने जब पहली बार उड़ी हमले के बाद यह मांग रखी थी कि पाकिस्तानी कलाकारों को बॉलीवुड छोड़कर वापस अपने देश लौट जाना चाहिए तब सभी पाकिस्तानी कलाकार भारत छोड़ चुके थे.

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तब करण जौहर ने कहा था कि पाकिस्तानी कलाकारों पर प्रतिबंध लगाना चरमपंथ की समस्या का हल नहीं है.

करण जौहर की फ़िल्म 'ऐ दिल है मुश्किल' में पाकिस्तानी कलाकार फवाद ख़ान ने काम किया है. लेकिन वो सिर्फ़ अपनी फ़िल्म की वजह से नहीं कह रहे थे. वो एक उसूल के लिए खड़े होने की बात कर रहे थे.

लेकिन कुछ ही दिनों में उन्होंने हथियार डाल दिए. ना सिर्फ मीडिया में बयान देकर बल्कि वीडिया रिलीज़ कर के उन्होंने इस बात की घोषणा कि वो कभी भी किसी पाकिस्तानी कलाकार को अपनी फ़िल्म में अब नहीं लेंगे.

आख़िर अचानक से यह सब इतना बदल कैसे गया?

कोई इस बात का सिर्फ़ अंदाज़ा ही लगा सकता है कि वाकई में क्या हुआ होगा लेकिन सार्वजनिक रूप से ऐसा कुछ हुआ है जिसमें इस बदलाव के संदर्भ खोजे जा सकते हैं.

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Image caption फ़िल्म 'जागो हुआ सवेरा' के एक दृश्य में अभिनेत्री तृप्ति मित्रा

तीन दिन पहले सोमवार को जब 18वें जियो मियामी फेस्टिवल (मुंबई एकेडमी ऑफ़ मूविंग इमेज) की शुरुआत हुई तो इवेंट के आयोजकों ने 57 साल पुरानी पाकिस्तानी फ़िल्म 'जागो हुआ सवेरा' को फेस्टिवल के दौरान दिखाई जाने वाली फ़िल्मों की सूची से हटा दिया.

फेस्टिवल की प्रेस विज्ञप्ति में इस संबंध में एक छोटा सा नोट लिखा हुआ है कि 'मौजूदा हालात' की वजह से फ़िल्म को हटाया जा रहा है.

उसी दिन मुकेश अंबानी ने एक समारोह में कहा कि "उनके लिए राष्ट्र पहले है न कि कला और संस्कृति."

अंबानी की कंपनी जियो इस फ़िल्म फेस्टिवल की मुख्य प्रायोजक है. 'जागो हुआ सवेरा' 1959 में बनी थी. यह फ़िल्म भारत-पाकिस्तान की साझा कला-संस्कृति का बेहतरीन उदाहरण है.

ख़ुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रशंसक बताने वाले अभिनेता अजय देवगन इस बहस में कूदते हुए कहते हैं कि वो पाकिस्तानी कलाकारों के साथ काम नहीं करने को लेकर व्यक्तिगत रूप से सहमत है.

वो कहते हैं, "हम ख़ुद को राष्ट्र से अलग नहीं कर सकते."

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देवगन की ख़ुद की फ़िल्म शिवाय 28 अक्टूबर को रिलीज़ होने के लिए तैयार है. और इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि उनके बयान को कई लोग करण जौहर की फ़िल्म को इसी वक़्त थियेटर में जाने से रोकने की सोची-समझी तरकीब मानते हैं.

मुंबई में सिनेमाघरों के मालिकों ने घोषणा की है कि वो डर के माहौल में फ़िल्म को अपने सिनेमाघरों में नहीं दिखाएंगे क्योंकि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ता उनके सिनेमाघरों में तोड़फोड़ कर सकते है.

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के 12 कार्यकर्ताओं को सिनेमाघरों के कर्मचारियों को डराने-धमकाने की वजह से गिरफ़्तार किया गया है.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि किसी भी तरह के हिंसक विरोध-प्रदर्शन की इजाज़त नहीं दी जाएगी.

राज्य सरकार ने बॉलीवुड में पाकिस्तानी कलाकारों के काम करने को लेकर किसी भी तरह के बयान नहीं दिए हैं और ना ही केंद्र सरकार ने कुछ कहा है.

हालांकि केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री वंकैया नायडू ने कहा है, "भारत में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ गुस्से का माहौल है और सभी क्षेत्र के लोगों को इस बात का ख्याल रखना चाहिए."

(उन्होंने उम्मीद भी जताई कि मीडिया को राष्ट्र हित समझना चाहिए.)

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Image caption प्रियंका चोपड़ा ने पाकिस्तानी कलाकारों पर प्रतिबंध का विरोध किया है.

इन पंक्तियों के बीच के आशय को समझना मुश्किल नहीं है.

मुंबई फ़िल्म इंडस्ट्री कई भागों में बंट चुकी है. लेकिन यह भी सही है कि शायद ही कभी बॉलीवुड किसी मुद्दे पर एकजुट होता है.

अब जो नई बात हो रही है, वो यह है कि बॉलीवुड का सार्वजनिक तौर पर ध्रुवीकरण हो रहा है.

राष्ट्रवादी जहां एक तरफ कड़ा रूख अपना रहे हैं तो ज्यादातर दूसरे लोग शांत रहना ही सही समझ रहे हैं क्योंकि वो इस बात से अच्छी तरह से वाकिफ है कि उनकी टिप्पणी को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा सकता है.

उन्मादी तरीके से उनकी आलोचना की जा सकती है और राजनेता उस पर गंदे तरीके से राजनीति कर सकते हैं.

टेलीविजन शो में फ़िल्मी दुनिया के जो लोग सरकार से अलग रूख अपना रहे हैं उनसे सरकार का साथ देने वाले कलाकार बुरी तरह से भिड़ रहे हैं.

बॉलीवुड में सलमान खान, अनुराग कश्यप और प्रियंका चोपड़ा जैसे कुछ गिने-चुने नामों ने इस पर स्पष्ट रूख अपनाया है.

फ़िल्म अभिनेत्री एश्वर्या राय भी करण जौहर की फ़िल्म में काम कर रही हैं लेकिन ससुर अमिताभ बच्चन ने पूरे मामले में खामोशी बरती हुई हैं.

हाल में आई ख़बरों के मुताबिक़ उन्होंने राज ठाकरे की बनाई ख़ुद की पेंटिंग के लिए उनके बेटे को एक घड़ी गिफ्ट में दी है.

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Image caption शाहरूख ख़ान की आने वाली फ़िल्म रईस में पाकिस्तानी अभिनेत्री माहिरा ख़ान काम कर रही हैं.

ऐसे हालात में इसमें कोई अचरज की बात नहीं कि करण जौहर ने ख़ुद को फंसा हुआ और डरा हुआ महसूस किया हो.

उनकी आलोचना करना तो बहुत आसान है लेकिन उनकी बड़ी रकम दांव पर लगी हुई थी और इसके साथ ही हिंसा भड़कने का भी ख़तरा था.

लेकिन कोई ज़रूरी नहीं है कि उनके पीछे हटने के साथ ही यह विवाद ख़त्म हो जाए क्योंकि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने फ़िल्म की रिलीज़ का विरोध जारी रखने की बात कही है और सिनेमाघर के मालिकों ने फ़िल्म दिखाए जाने को लेकर आशंका जाहिर की है.

बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरूख ख़ान की आगामी फ़िल्म रईस में पाकिस्तानी कलाकार माहिरा ख़ान अभिनय कर रही हैं और संभव है कि उन्हें भी सिनेमाघरों के मालिकों के प्रस्तावित प्रतिबंध का सामना करना पड़े.

निश्चित तौर पर अपनी राजनीति चमकाने को लेकर व्याकुल राज ठाकरे मौजूदा हालात से खुश होंगे लेकिन 'राष्ट्र' के नाम पर असहिष्णुता का यह माहौल तैयार करना उनकी खुशी से कहीं आगे जाएगा.

निश्चित तौर पर फ़िल्म इंडस्ट्री एक सॉफ्ट टारगेट है क्योंकि किसी भी दबाव में ये आसानी से झुक जाती है. लेकिन इसमें कोई अचरज की बात नहीं है कि जल्दी ही पाकिस्तानी लेखकों को पढ़ना या फ़ेसबुक पर पाकिस्तानी दोस्त होने या पाकिस्तान के बारे में कुछ लिखने से आप राष्ट्रद्रोही घोषित कर दिए जाएं.

हममें से तब कोई भी करण जौहर की तरह पलट सकता है.

(सिद्धार्थ भाटिया 'द वायर' के संस्थापक संपादक हैं.)

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