अस्पतालों के पास नहीं फ़ायर सेफ़्टी लाइसेंस

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ओडिशा के 568 अस्पतालों में से सिर्फ़ 3 के पास फ़ायर सेफ़्टी लाइसेंस हैं, बाकी 565 अस्पताल बग़ैर इस लाइसेंस के ही काम कर रहे हैं.

राज्य के अग्निशमन विभाग के महानिदेशक विनय कुमार बेहेरा ने बीबीसी को यह जानकारी दी है.

राजधानी भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में बीते दिनों आग लगने से 25 लोगों की मौत हो गई और दूसरे कई लोग घायल हो गए.

घटना के बाद पता चला कि इस अस्पताल के पास फ़ायर सेफ़्टी लाइसेंस नहीं था.

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Image caption भुवनेश्वर के सम अस्पताल के आईसीयू में आग लगने से 25 लोगों की मौत हो गई थी.

इस मामले में अस्पताल के मालिक के साथ चार अधिकारियों को गिरफ़्तार किया गया.

चिकित्सा, शिक्षा और प्रशिक्षण विभाग के अधिकारी पीसी महापात्र ने बीबीसी से कहा कि जिन अस्पतालों के पास फ़ायर सेफ़्टी लाइसेंस नहीं है, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.

दूसरी ओर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भुवनेश्वर के निजी अस्पताल में अग्निकांड का जायज़ा लेने गए थे जहां उन्होंने कहा कि फ़ायर सेफ़्टी लाइसेंस के बग़ैर ही अस्पतालों का चलना आश्चर्य की बात है.

उन्होंने कहा कि इसे गंभीरता से लेना चाहिए और ठोस क़दम उठाए जाने चाहिए.

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Image caption ओडिशा के बड़े अस्पतालों के पास फ़ायर सेफ़्टी लाइसेस नहीं

बीबीसी ने इस मुद्दे पर राज्य के कई अस्पतालों से बात की.

कटक के सबसे बड़े निजी अस्पताल अश्विन हॉस्पिटल के प्रशासनिक अधिकारी पीके मिश्रा ने कहा कि लाइसेंस लेने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है. कई बार वेरिफ़िकेशन भी हुआ है लेकिन अभी तक़ लाइसेंस नहीं मिला है.

भुवनेश्वर के 100 बेड वाले मल्टी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल आदित्य केयर के पास भी यह लाइसेंस नहीं है. अस्पताल के चीफ़ ऑपरेटिंग ऑफ़िसर गौरव खुराना का कहना है कि नियम तो है, पर सरकार इस पर ज़ोर नहीं देती थी.

उन्होंने कहा, "बिना फ़ायर सेफ़्टी लाइसेंस के अस्पताल खोलने की अनुमति दी जा रही थी. सरकार क़ानून का कड़ाई से पालन करती तो इतने सारे अस्पताल बिना लाइसेंस के नहीं चल रहे होते."

भुवनेश्वर के 14 साल पुराने नीलांचल अस्पताल के अधिकारी दामोदर नंद ने कहा कि उन्होंने दो महीने पहले ही लाइसेंस के लिए आवेदन किया था. उनका कहना है कि अस्पताल खोलते वक़्त उन्हें इस लाइसेंस की ज़रूरत नहीं पड़ी थी.

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वहीं विवेकानंद अस्पताल के जन संपर्क अधिकारी प्रद्युम्न राय ने कहा कि उनका अस्पताल एक पुरानी इमारत में चल रहा है, इसलिए वे सुरक्षा के लिए ज़रूरी उपाय नहीं कर पा रहे हैं.

राज्य के अग्निशमन विभाग के महानिदेशक विनय कुमार बेहेरा ने बीबीसी से कहा, "क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत अस्पताल बनाने की अनुमति हासिल करने के लिए फ़ायर सेफ़्टी लाइसेंस अनिवार्य है. पर इसका खुला उल्लंघन हो रहा है. फ़िलहाल फ़ायर डिपार्टमेंट के पास लाइसेंस के लिए 271 आवेदन पड़े हुए हैं."

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