सपा के सियासी दंगल में कौन पड़ेगा भारी

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समाजवादी पार्टी में आए भूचाल के बीच पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने सोमवार को पार्टी के सांसदों, विधायकों, विधान पार्षदों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई है जिसमें मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम पर विचार किया जाएगा.

इस बैठक से पहले शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के समर्थकों के बीच झड़पें भी हुई हैं.

हालांकि ख़बरों के मुताबिक इस बैठक में मुलायम सिंह के बेटे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हिस्सा नहीं ले रहे हैं. इससे जानकार आशंका जता रहे हैं कि पार्टी कहीं टूट की ओर तो नहीं बढ़ रही?

तेज़ी से बदलते घटनाक्रम में रविवार को पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव और उनके समर्थक मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया.

उसके कुछ घंटे बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के आदेश पर पार्टी महासचिव डॉ. रामगोपाल यादव को पार्टी से छह साल के लिए बाहर निकाल दिया गया.

डॉ. रामगोपाल ने रविवार सुबह ही अखिलेश के समर्थन में एक पत्र जारी किया था.

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समाजवादी पार्टी में मचे घमासान पर पार्टी के वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल का कहना है कि 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है, हमने कभी नहीं सोचा था कि पार्टी में ऐसा कुछ होगा.'

उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी के बड़े नेता जनता की नब्ज़ को समझ नहीं पाए हैं. अगर जनता की नब्ज़ को समझा होता तो ये नौबत ही नहीं आती. पार्टी को सोचना चाहिए कि इस वक़्त मुख्यमंत्री को नज़रअंदाज़ करने से पार्टी का खड़ा होना बहुत मुश्किल है.

नरेश अग्रवाल ने अखिलेश यादव का बचाव करते हुए कहा कि 'पार्टी के जो नेता सोच रहे हैं कि अखिलेश यादव को हम धरातल पर ला देंगे, उनकी छवि ख़राब कर देंगे, वो उनकी ग़लतफ़हमी है. जनता के बीच अखिलेश सबसे लोकप्रिय व्यक्ति हैं.'

उनका कहना है कि ये ठीक है कि नेताजी का सभी सम्मान करते हैं, लेकिन जिस तरह से कुछ लोग पार्टी और परिवार को तोड़ रहे हैं, उसे पार्टी को समझना चाहिए.

नरेश अग्रवाल ने कहा, "आज मुख्यमंत्री ने ख़ुद जिस व्यक्ति पर आरोप लगाया है सबने उन नाम को सुना है, मैं उनका नाम नहीं लूंगा और रामगोपाल यादव पर जो आरोप लगे हैं मैं उन आरोपों को पूरी तरह से असत्य मानता हूं".

नरेश अग्रवाल ने कहा कि पार्टी का विवाद मीटिंगों से नहीं सुलझेगा, इसके लिए नेताजी को ख़ुद सबको आदेश दें.

वहीं उत्तर प्रदेश सरकार से बर्खास्त मंत्री नारद राय ने बीबीसी को बताया, "समाजवादी पार्टी को खून-पसीने से सींचकर नेता जी ने बनाया है. बहुत संघर्षों से समाजवादी पार्टी बनी है. मैंने भी इस पार्टी में 35 साल से काम किया है".

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उन्होंने आरोप लगाया कि, "वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सलाह देने वालों ने उल्टे-सीधे सलाह दिए हैं. वो जब जो मन में आता है फ़ैसला ले लेते हैं और उसी का परिणाम है कि पार्टी में इतनी बड़ी घटना हो गई जिसकी कभी संभावना भी नहीं थी. इससे हमें बहुत दुख है."

उनका कहना है, "अगर अकेले मुख्यमंत्री ने सारे फ़ैसले लिए तो मैं इसके बारे कुछ नहीं कहूंगा, लेकिन अगर अमर सिंह के क़रीबियों को निशाना बनाया जा रहा है तो मैं अमर सिंह का विरोध करने वालों में सबसे पहले था.

नारद राय ने कहा, "हमलोगों को बिना वजह बर्ख़ास्त किया गया है. नेताजी ने हमलोगों को भरोसा दिया है कि घबराना नहीं है".

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