गांव की महिलाओं तक पहुंचता इंटरनेट

राजस्थान के दौसा ज़िले की अनीता सिसोदिया देखने में भले आम औरतों जैसी हों, लेकिन काम बहुत ख़ास कर रही हैं.

अनीता अपने इलाके की महिलाओं को इंटरनेट और उसके उपयोग के बारे में सिखा रही हैं. उनके फ़ायदे बताती हैं और ग्रामीण महिलाओं को इंटरनेट से जोड़ रही हैं.

दरअसल, गूगल और टाटा ट्रस्ट के संयुक्त प्रयास से चलाए जा रहे अभियान 'इंटरनेट साथी' की सदस्य हैं अनीता.

गूगल ने अगले तीन सालों में भारत के तीन लाख गांवों तक पहुंचने का लक्ष्य बनाया है, यानी करीब भारत के आधे गांवों तक गूगल पहुंचना चाहता है. ज़ाहिर है मल्टीनेशनल कंपनियों की नज़र अब भारत के ग्रामीण इलाकों की ओर है.

गूगल इंडिया के भारत प्रमुख राजन आनंदन ने बीबीसी को बताया, "मौसम से जुड़ी सूचना, खेती किसानी के तरीके और सरकारी योजनाओं से जुड़ी सूचनाएं हम उन तक पहुंचाना चाहते हैं. ग्रामीण भारत को हम डिजिटल बनाना चाहते हैं, इसके लिए ऐसी सुविधाएं और ऐप विकसित कर रहे हैं जिससे ग्रामीणों का जीवन स्तर बेहतर हो."

भारत की ग्रामीण आबादी पर गूगल की ही नज़र नहीं हैं. पिछले साल फ़ेसबुक ने फ्री बेसिक्स की शुरुआत की थी, जिसमें इंटरनेट इस्तेमाल को कुछ हद तक मुक्त करने का प्रयास किया गया था.

लेकिन सरकार ने दूसरे सर्विस प्रोवाइडरों के साथ इसे भेदभाव मानते हुए इस पर पाबंदी लगा दी थी.

हालांकि कुछ जानकारों का मानना है कि देश को डिजिटल इंडिया बनाने के लिए कंपनियों की मदद की जरूरत है.

वेबसाइट मीडियानामा के संपादक निखिल पहवा कहते हैं, "यह कंपनियों के साथ साथ देश की भी जरूरत है. लोगों को ऑनलाइन लाने के लिए कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा से आम ग्राहकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी."

वैसे गूगल जैसी कंपनियों की इंटरनेट साथी जैसी कोशिश में मुनाफ़ा कमाने की चाहत भी शामिल है, लेकिन इससे ग्रामीण भारत को लोगों की क्षमता बढ़ती है और उनका संपर्क एक उन्नत दुनिया से भी होता है.

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