नागपुर में मराठा मार्च में शामिल हुए हज़ारों लोग

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Image caption नागपुर में मूक मराठा मार्च में जमा हुए हज़ारों लोग.

महाराष्ट्र की दूसरी राजधानी नागपुर में मंगलवार को सकल मराठा समाज की ओर से मराठा मार्च आयोजित किया गया जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए.

ख़ास तौर पर डिज़ाइन की गई अलग-अलग रंगों की टी-शर्टस इस मूक मोर्चे की ख़ासियत थीं.

ऐसी ही एक टी-शर्ट पहने सुमित काले ने बताया कि उन्हें टी-शर्ट मंगलवार सुबह मिली. मराठाओं के लिए आरक्षण की माँग को लेकर मोर्चे में शामिल हुए सुमित आईटीआई की पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन उसके बाद नौकरी कहाँ मिलेगी, यह चिंता उन्हें सता रही है.

उनके साथ चेतन काले ने मूक मोर्चे के प्रतीकस्वरूप हाथ में काली पट्टी बाँध रखी थी.

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बी-कॉम कर चुके अनमोल आनंद कदम अपनी मोटरसाइकिल से नागपुर ज़िले के वाड़ी इलाक़े में पहुंचे. बाइक पर झंडा लगा था लेकिन ख़ास बात थी, उनकी विशेष शिवाजी महाराज शैली की दाढ़ी.

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पूछने पर अनमोल ने बताया, ''मैंने ख़ास मोर्चे के लिए दाढ़ी बढ़ाई है. मुझे लगता है सबका आरक्षण हटना चाहिए. फॉर्म में जो कैटेगरी पूछी जाती है वो बंद होना चाहिए. यहाँ आकर 400 साल पहले का सा एहसास हो रहा है.''

इस मूक मोर्चे में महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के मामलों में कड़ी सज़ा की मांग कर रही महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं.

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आर्किटेक्चर की छात्रा नेहा भालेराव और फ़ोरेंसिक सायन्स की छात्रा पारुल वाडीभस्मे ने कहा कि कोपरडी में नाबालिग़ लड़की के बलात्कार और हत्या के मामले में दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सज़ा दी जाए.

महाराष्ट्र के कई स्थानों पर मराठा मूक मोर्चा को स्थानीय राजघरानों से सक्रिय समर्थन मिला है.

यहाँ भी नागपुर के भोंसले राज घराने के मुधोजी राजे भोंसले और अन्य सदस्य मोर्चे की अगुवाई करने वालों में शामिल थे.

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Image caption नागपुर के भोंसले राज घराने के मुधोजी राजे भोंसले.

मुधोजी राजे के अनुसार, ''यह इतिहास का तथ्य है कि उस ज़माने से महाराष्ट्र के राज घरानों ने मराठाओं के हितों की रक्षा की है. उस समय में मराठा समाज ने भी एक होकर राज घरानों की रक्षा की थी, अब हमें समाज के लिए काम करना पड़ेगा. ''

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Image caption शिवाजी महाराज की मां जीजाबाई की वेशभूषा में एक बच्ची.

नागपुर में 14 दिसंबर के दिन महाराष्ट्र विधानमंडल के शीत सत्र के दौरान राज्य स्तरीय मार्च होगा और उसके बाद एक राज्य स्तरीय मार्च मुंबई में भी होगा.

विदर्भ में कुनबी मराठाओं की संख्या अधिक है, उन्हें ओबीसी के तहत आरक्षण की सुविधाएँ भी प्राप्त हैं.

कुछ कुनबी संगठन इस मार्च में शामिल नहीं हुए. वजह पूछने पर कुनबी महासंघ की ओर से बीबीसी को बताया गया कि आयोजकों की ओर से मार्च में मराठा के साथ कुनबी शब्द शामिल नहीं किया गया लिहाज़ा, कुनबी समाज ने हिस्सा नहीं लिया, हालांकि मराठा आरक्षण की मांग का हम विरोध नहीं करते.

कुनबी महासंघ की ओर से राजेन्द्र तिजारे और पंकज पांडे ने बीबीसी को बताया, ''हमारे आरक्षण को हाथ ना लगाते हुए उन्हें आरक्षण दिया जाए.''

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