'सपा के घमासान का सीधा फायदा भाजपा को'

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उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी में मचा घमासान खत्म होता नज़र नहीं आ रहा है. चाचा-भतीजा और बाप-बेटे की तू-तू-मैं-मैं घर से निकलर पार्टी के टूट का कारण बन सकती है.

क्या है इस घमासान की वज़ह बता रहीं हैं वरिष्ठ राजनीतिक विशेषज्ञ नीरजा चौधरी

समाजवादी पार्टी में मचा घमासान मुलायम सिंह के राजनीतिक करियर में बहुत बड़ा धब्बा साबित हो सकता है.

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मुलायम सिंह इस पार्टी के सर्वेसर्वा हैं उन्होंने पार्टी को बनाया है ऐसे में पार्टी में मचा घमासान उनके लिए बहुत ही दुख की बात है.

पिछले तीन वर्षों में अखिलेश यादव के प्रशंसकों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है. उन्होंने जो काम किया है इससे लोगों में उनकी छवि बहुत अच्छी बन चुकी है.

अखिलेश की छवि समाजवादी पार्टी के दायरे से काफी बड़ी हो गई है जिसे समाजवादी पार्टी के धुरंधर नेता पचा नहीं पा रहे हैं.

शिवपाल यादव की राजनीति आज भी मुलायम सिंह की राजनीति से प्रभावित है और उनपर ही निर्भर है. जबकि अखिलेश की राजनीति मुलायम सिंह की राजनीति से बहुत बड़ी हो चुकी है.

अखिलेश की यही प्रसिद्धि और बढ़ती प्रशंसको की संख्या सपा के कई नेताओं के गले नहीं उतर रही है.

मुलायम सिंह पिछले 50 साल से राजनीति कर रहे हैं और पार्टी हो या घर-परिवार उन्हें सभी सुनते हैं और उनकी बात मानने के लिए तैयार हो जाते हैं.

और जब मुलायम सिंह यादव पार्टी में सुलह नहीं करा पा रहे हैं तो इसका मतलब है कि पार्टी कहीं न कहीं आत्महत्या करने पर उतारू हैं.

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मुलायम सिंह यादव की क्या मजबूरी है क्यों वो इस पूरे मामले को संभालने में नाकाम साबित हो रहे हैं.

मुलायम का अमर प्रेम भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है?

अमर सिंह पहले कई सालों तक पार्टी से बाहर रहे और अब जब वापिस आए तब उन्हें राज्यसभा की सदस्यता तक दे दी गई है.

पार्टी में जो बवाल हुआ है उसकी जड़ भी कहीं न कहीं अमर सिंह ही हैं. पिछले दिनों अमर सिंह के यहां एक पार्टी हुई थी और तभी से पार्टी में फूट पड़ी और आज यहां तक पहुंच गई है.

सवाल ये उठता है कि क्यों अमर सिंह इतने जरूरी हैं मुलायम सिंह के लिए. चुनाव से महज़ दो महीने पहले इस तरह की बातें किसी भी पार्टी की छवि को खराब करने के लिए काफी हैं.

सपा के इस घमासान का सीधा फायदा भाजपा को होगा.

लेकिन भाजपा को बहुत खुश नहीं होना चाहिए क्योंकि अगर सपा पूरी तरह से टूट जाती है तो मुस्लिम तबका सीधे तौर पर मायावती को विकल्प के तौर पर देखेगा और मुस्लिम दलित का गठजोड़ मायावति के साथ होगा तो भाजपा के लिए कठिनाई हो सकती है.

(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत पर आधारित)

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