मैं नहीं चाहता कि मेरी पिटाई हो: अमर सिंह

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उतर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया मुलायम सिंह यादव के परिवार में चल रही 'महाभारत' पर पहली बार पाटी महासचिव अमर सिंह ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. अमर इस पूरे प्रकरण में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के व्यवहार से ख़ासे आहत दिखे.

उन्होंने मीडिया में दिए एक इंटरव्यू में माना कि वह काफ़ी आहत महसूस कर रहे हैं. अमर सिंह के अनुसार, ''उन्हें दलाल शब्द के इस्तेमाल से काफ़ी तकलीफ़ पहुंची हैं. मेरी ऐसे घेराबंदी हो रही है जैसे मैं हत्या या बलात्कार का आरोपी हूं.''

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ अखिलेश के 'औरंगज़ेब' वाली ख़बर छपवाने के आरोप पर उन्होंने कहा कि आशु मलिक को वो नहीं जानते और मीडिया में खबरें छपने से उनका लेना देना नहीं है. दरअसल पिछले दिनों एक रिपोर्ट में मुलायम सिंह यादव को शहाजहां और अखिलेश यादव को औरंगज़ेब बताया गया था. ये आरोप लग रहे थे कि अमर सिंह की शह पर समाजवादी पार्टी के नेता आशु मलिक ने ये ख़बर प्लांट कराई थी.

अमर सिंह ने 'आउटसाइडर' कहे जाने पर साफ़ कहा, ''मैंने किसी से नहीं कहा था कि मुझे सपा में ले लो. अगर मेरी बलि से सपा की कलह ख़त्म होती है तो ले लें. मैं बलिदान को तैयार हूं, मैं मुलायम का साथ नहीं छोडूंगा, जब तक मुलायम नहीं कहेंगे तब तक मैं पार्टी नहीं छोड़ूंगा.''

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अमर सिंह का कहना था कि वो अखिलेश के साथ हैं, लेकिन सबसे पहले मुलायम का साथ देंगे.

अमर के अनुसार, ''अखिलेश को जब ज़रूरत होगी मैं उनके साथ हूं. अखिलेश भले ही मुझे गाली देते रहें मैं उसका कोई जवाब नहीं दूंगा. मैं सीएम अखिलेश के साथ नहीं बल्कि मुलायम के बेटे अखिलेश के साथ हूं. मुलायम मुझे भाई कहते हैं, अखिलेश मानें या न मानें मैं उनका अंकल हूं.''

अखिलेश के बदले व्यवहार पर हैरानी जताते हुए अमर ने कहा, ''मेरी तारीफ़ करने वाले अखिलेश अचानक मेरे आलोचक कैसे हो गए, पता नहीं अचानक बुराई कैसे करने लगे जबकि मैंने अखिलेश की शादी में उनका साथ दिया. इसका सबूत है कि उनकी शादी की हर फोटो में मेरी तस्वीर है. मैं उन्हें ऑस्ट्रेलिया लेकर गया.''

पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिए गए पूर्व महासचिव और अखिलेश के सबसे क़रीबी लोगों में से एक रामगोपाल यादव पर अमर सिंह का कहना था, ''मैं रामगोपाल जी से माफ़ी मांगता हूं, मैंने अपने जीवन में केवल दो बार उनके बारे में ओछी बातें की हैं. मैंने रामगोपाल को कभी नपुंसक नहीं कहा. पहली बार मैंने उन्हें बाल गोपाल कहा था और दूसरी बार जब मैंने शिवपाल जी के सामने कुछ ग़लत कहा था तो उन्होंने मुझे तभी टोक दिया था. लेकिन मैं रामगोपाल यादव की धमकी से नहीं डरा हूं.''

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राज्य सरकार के तीन नवंबर से शुरू हो रहे चुनावी अभियान के कार्यक्रम और पांच नवंबर के सपा के स्वर्ण जयंति समारोह में शामिल होने पर अमर ने कहा, ''मैं तीन तारीख़ के कार्यक्रम में नहीं जाऊंगा, मैं नहीं चाहता कि मेरी वहां पिटाई हो जाए और इसका ठीकरा मेरे भतीजे पर फूटे. मैं नहीं चाहता कि मेरे भतीजे पर कोई आरोप लगे. पांच नवंबर के कार्यक्रम में तभी जाऊंगा जब अखिलेश मुझे बुलाएंगे.''

बातचीत के अंत में अमर ने अपनी चिर परिचित शैली में कहकर बात ख़त्म की ''खाता न बही जो मुलायम कहें वही सपा में सही. रामगोपाल बाहुबली और बुद्धिबली भी हैं. मैं शिवपाल का गुनाहगार हूं. ''

समाजवादी पार्टी में पारिवारिक विवाद अपने चरम पर है और इस विवाद के पीछे अमर सिंह का हाथ होने के आरोप लगते रहे हैं.

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