सायरस को पूरे अधिकार दिए गए थे: टाटा संस

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सायरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन के पद से हटाए जाने और फिर उनके रतन टाटा पर आरोप लगाते हुए ईमेल के लीक होने से शुरू हुआ विवाद हर दिन नया मोड़ ले रहा है.

टाटा संस ने सायरस मिस्त्री के लगाए आरोपों का जवाब देते हुए गुरूवार को एक बयान जारी किया.

इसमें कहा गया है कि एक कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर सायरस को टाटा ग्रुप की कंपनियों को चलाने के लिए सभी अधिकार दिए गए थे.

ये भी कहा गया कि टाटा संस बोर्ड अपने अध्यक्ष को अवसरों और चुनौतियों के प्रबंधन के लिए पूर्ण स्वायत्ता देता है.

सायरस मिस्त्री ने बोर्ड को भेजे गए पांच पन्नों के एक ईमेल में लिखा था कि लगातार उनके काम में दख़लअंदाज़ी की जा रही थी जिससे वो लेम डक (नाम मात्र के) चेयरमैन रह गए थे.

टाटा संस ने बयान में कहा है कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें हटाए जाने के बाद ही सारे व्यापारिक निर्णयों के तथ्यों को लेकर आरोप लगाए गए. उन निर्णयों के बारे में भी बात की गई जिनमें पिछले एक दशक में ख़ुद पूर्व अध्यक्ष विभिन्न भूमिकाओं में शामिल रहे हैं.

टाटा संस ने अपने बयान में कहा- "अब लोगों और बोर्ड के ख़िलाफ़ उन कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मानदंडों की अनदेखी करने के आरोप लगाए जा रहे हैं जिनके फैसले कथित तौर पर पूर्व अध्यक्ष (सायरस) के कार्यालय में रहते हुए लिए गए.....पूर्व अध्यक्ष (सायरस) के कार्यकाल में ये पाया गया कि उन्होने कई बार समूह की कल्चर और कार्यशैली के अनुरूप काम नहीं किया."

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टाटा संस ने ये भी कहा है कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि मिस्त्री ने कई कारणों से बोर्ड के सदस्यों का विश्वास खो दिया.

बोर्ड ने अपने बयान में कहा कि टाटा ग्रुप की ताकत सिर्फ बोर्ड रूम के उसके मूल्यों और नैतिकता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि समूह के 6 लाख से ज़्यादा कर्मचारियों की निष्ठा और सहयोग पर नर्भर है.

टाटा संस ने आरोप लगाया कि मिस्त्री ने कर्मचारियों की नज़र में समूह की छवि को बिगाड़ने की कोशिश की है जिसे माफ़ नहीं किया जा सकता है.

सायरस मिस्त्री ने बोर्ड को भेजे गए पांच पन्नों के एक ईमेल में लिखा था कि लगातार उनके काम में दख़लअंदाज़ी की जा रही थी जिससे चेयरमैन पद पर उनकी स्थिति कमज़ोर हो रही थी.

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