'सिमी' के सदस्य होने पर गिरफ़्तार, बाद में बरी

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भारत के विभिन्न हिस्सों में समय समय पर कई ऐसे नौजवानों को गिरफ़्तार किया गया, जिन्हें 'सिमी' का सदस्य बताया गया.

लेकिन कई मामले ऐसे भी हैं, जिनमे 'सिमी' के कार्यकर्ता के रूप में गिरफ़्तार लोगों को अदालतों ने 'बा-इज़्ज़त' बरी कर दिया.

कुछ मामले -

हुबली (कर्नाटक)

वर्ष 2015 मई में हुबली के एक ट्रायल कोर्ट के जज गोपाल कृष्ण कोली ने कथित रूप से सिमी के 17 मुस्लिम युवाओं को रिहा कर दिया था.

कर्नाटक पुलिस ने इन्हें 2008 में प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) का सदस्य बताकर आतंकवादी और आपराधिक साजिश रचने के आरोप में गिरफ़्तार किया था.

इन 17 लोगों में ज्यादातर मेडिकल और इंजीनियरिंग के छात्र थे, जो सात साल तक जेल में रहने के बाद बरी कर दिए गए.

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Image caption मालेगांव धमाका

हुबली ट्रायल कोर्ट से रिहा हुए कुछ लोग

* केरल के मल्लापुरम के रहने वाले 39 साल के याहया कमुकुट्टी (इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर).

* कर्नाटक के हुबली के रहने वाले 30 साल के अल्लाहबक्श यादवाड (मेडिकल छात्र)

* बेंगलुरु के 40 साल के सैयद सादिक समीर, जिन्होंने कॉलेज में दाख़िले के बाद पढ़ाई छोड़नी पडी.

* हैदराबाद के 30 साल के रज़ीउद्दीन नासिर, जिनपर आरोप था कि उन्होंने पाकिस्तान जाकर लश्कर-ए-तैयबा से ट्रेनिंग ली.

* पेशे से इंजीनीर कर्नाटक के हाफ़िज़ हुसैन को भी कोर्ट ने रिहा कर दिया.

* पेशे से इंजीनियर याहया कमुकुट्टी केरल के रहने वाले हैं.

* केरल के ही दो सगे भाई पीडिकल शिबली (37) और पीडिकल शादुली भी बरी कर दिए गए.

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Image caption मुंबई ट्रेन धमाका

इसके अलावा कर्नाटक मेडिकल छात्र मोहम्मद आसिफ (30), मिर्ज़ा अहमद बेग़ (31), होम्योपैथी छात्र असदुल्लाह अख्तर (30) और मुनरोज जमान (30) को हुबली कोर्ट ने रिहा कर दिया.

सिमी के सचिव सफ़दर नागोरी के भाई कमरुद्दीन नागोरी (41), केरल के मोहम्मद अंसार, (33) कर्नाटक के शकील अहमद माली (36), सादिक समीर (40), मोहम्मद यासीन (33) और कथित सिमी नेता अब्दुस शुभान क़ुरैशी उर्फ तौक़ीर को भी कोर्ट ने रिहा कर दिया था.

3 अक्तूबर, 2012

खंडवा ज़िला अदालत ने अक़ील ख़िलजी को अक्तूबर 2012 में रिहा कर दिया था. उन्हें दस साल पहले यानी 2001 में गिरफ़्तार किया गया था. वे 10 सालों तक जेल में बंद रहे.

ख़िलजी पर पुलिस ने आरोप लगाया था कि वो साम्प्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे. ख़िलजी पर 'सिमी' का कार्यकर्ता होने का आरोप भी लगा.

अदालत का कहना था कि पुलिस अपने आरोपों के पक्ष में कोई सबूत पेश नहीं कर पाई. लिहाज़ा, उन्हें भी रिहा किया जाता है.

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Image caption सिमी के गिरफ़्तार कार्यकर्ता

23 अक्तूबर, 2012

मुंबई के एक कोर्ट ने कथित रूप से सिमी के तीन सदस्यों को रिहा कर दिया था.

साजिद अंसारी, उनके भाई ख़ालिद अंसारी और इरशाद ख़ान पर 2006 में ट्रेन में हुए विस्फोट में शामिल होने का आरोप भी था. पुलिस ने इन तीनों को मुंबई के बाहरी इलाक़ों में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ़्तार किया था.

जुलाई, 2012

मध्य प्रदेश में 12 साल तक केस चलने के बाद 6 मुस्लिम युवाओं को कोर्ट ने रिहा कर दिया गया. वर्ष 2000 में पुलिस ने इन्हें मस्जिद में आपत्तिजनक पोस्टर चिपकाने के आरोप में गिरफ्तार किया था.

मगर इतने साल बाद भी पुलिस इनके ख़िलाफ़ अदालत में प्रयाप्त सबूत पेश करने में नाकाम रही. इन में से एक सिमी के पूर्व महासचिव मुनीर देशमुख समेत अरशद बिलग्रामी, खालिद नयीम, अब्दुल रज़ाक, मोहम्मदी अलीम और शोहराब अहमद थे. अब ये आज़ाद हैं.

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Image caption फ़ाइल फ़ोटो- अहमदाबाद में अगस्त 2008 में गिरफ़्तार किए गए सिमी नेता सफ़दर नागोरी और उनके साथी

मार्च, 2015

दिल्ली के एक कोर्ट ने 'सिमी' के पूर्व अध्यक्ष शाहिद फ़लाही को 14 साल पुराने केस में रिहा कर दिया था.

इन पर आपत्तिजनक साहित्य के माध्यम से दो समुदायों में दुश्मनी फैलाने का आरोप था. शाहिद पर 19 मई, 2001 को मुक़दमा दर्ज किया गया था, जिसके बाद वो लगातार जेल में थे.

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