जजों की फ़ोन टैपिंग: केजरीवाल और सरकार में ठनी

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Image caption केजरीवाल ने पीएम मोदी की मौजूदगी में जजों की नियुक्ति पर केंद्र को घेरा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद की मौजूदगी में जजों की कथित फोन टैपिंग का मामला उठाकर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की.

दिल्ली हाई कोर्ट की 50वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ देश, संविधान और लोकतंत्र किसी के लिए भी अच्छी बात नहीं.

केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने कई मौक़ों पर जजों को आपस में बात करते सुना है कि उनके फ़ोन टैप होते हैं.

उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि ये सच है या गलत. लेकिन अगर ये इतना व्यापक डर है और अगर ये सच है तो ये काफी खतरनाक है. फिर न्यायपालिका की स्वतंत्रता कहाँ रह गई."

लेकिन क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस आरोप को पूरी तरह ख़ारिज कर दिया. उन्होंने कहा, "मैं पूरे अधिकार के साथ इस आरोप से इनकार करता हूँ कि जजों के फ़ोन टैप किए जाते हैं. मैं दो साल तक संचार मंत्री रहा हूँ. मैं इससे इनकार करता हूँ कि कभी भी जजों के फ़ोन टैप किए गए."

इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर भी मौजूद थे.

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Image caption दिल्ली हाई कोर्ट की 50वीं वर्षगांठ पर हुए कार्यक्रम में पीएम मोदी भी मौजूद थे

केजरीवाल ने जजों की नियुक्ति को लेकर हो रही देरी का मामला भी उठाया.

उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने कई महीने पहले सिफारिशें करके भेजा था. लेकिन क्या कारण रहा केंद्र सरकार में कि वो अभी तक भरी नहीं गई. वो सिफारिशें अभी तक सरकार के पास है."

केजरीवाल ने कहा कि ये चिंता का विषय है क्योंकि ये तरह-तरह की अफवाहों को जन्म देता है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा, ''मुझे लगता है कि अगर कार्यपालिका का जजों की नियुक्ति में एक प्रतिशत भी दखलंदाजी होती है, तो ये न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए अच्छा नहीं. न्यायपालिका को कार्यपालिका से पूर्ण स्वतंत्र रहना चाहिए.''

उन्होंने कहा कि कॉलेजियम से सिफारिश आने के 48 घंटे के अंदर जजों की नियुक्ति हो जानी चाहिए.

पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने भी जजों की नियुक्ति में हो रही देरी पर अपनी नाराज़गी जताई थी.