यूपी चुनाव: मिलेंगे कांग्रेस और मुलायम के हाथ?

उत्तर प्रदेश में आगामी विधान सभा चुनाव को देखते हुए गठबंधन की एक और दिलचस्प कोशिश शुरू हुई है. सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी और अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही कांग्रेस पार्टी अभी तक गठबंधन की बात को सिरे से नकार रही थीं, लेकिन अब इन दोनों पार्टियों ने एक साथ चुनाव लड़ने की कोशिशें तलाशनी शुरू कर दी हैं.

नई दिल्ली में मंगलवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर के बीच हुई मुलाक़ात की राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा है. हालांकि सपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेता आधिकारिक तौर पर इस मुलाक़ात की पुष्टि नहीं कर रहे हैं, लेकिन जानकारों का कहना है कि ये मुलाक़ात हुई है और इसमें गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा भी हुई है.

कांग्रेस के लिए विधान सभा चुनाव में रणनीति तैयार कर रहे प्रशांत किशोर अभी तक कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को अकेले ही विधान सभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार कर रहे थे, लेकिन लगता है अब उन्हें सहयोगी दलों की ज़रूरत दिखने लगी है.

यही नहीं, अभी तक समाजवादी पार्टी किसी भी गठबंधन में शामिल न होने की बात कर रही थी, लेकिन अब गठबंधन की वो ख़ुद पहल कर रही है.

Image caption प्रशांत किशोर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रमुख रणनीतिकार हैं.

पिछले दिनों समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने इसी सिलसिले में जनता दल यूनाइटेड नेता शरद यादव और आरएलडी नेता अजित सिंह से मुलाक़ात की थी. लेकिन मंगलवार को प्रशांत किशोर और मुलायम सिंह यादव की मुलाक़ात को भी काफी अहम माना जा रहा है.

हालांकि सपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां इस मुलाक़ात को लेकर कुछ नहीं कह रही हैं. कांग्रेस नेता वीरेंद्र मदान कहते हैं, "इस तरह की बातें अभी तक चैनलों और अख़बारों के ही माध्यम से सुनने में आई हैं. न तो कांग्रेस पार्टी के किसी नेता ने और न ही किसी अन्य पार्टी के नेता ने इस मुलाक़ात और गठबंधन के बारे में कुछ नहीं कहा है. जहां तक कांग्रेस की बात है तो हमने अभी तक यही फ़ैसला किया है कि हम 2017 का चुनाव अकेले लड़ेंगे."

आधिकारिक तौर पर तो समाजवादी पार्टी के नेता भी इस मुलाक़ात की जानकारी न होने की बात कर रहे हैं, लेकिन जानकारों का कहना है कि ये मुलाक़ात हुई भी है और गठबंधन के संबंध में चर्चा भी हुई है. गठबंधन से अभी तक सपा भले ही मना करती आ रही थी, लेकिन अब उसे इसकी ज़रूरत महसूस हो रही है.

पार्टी नेता मोहम्मद शाहिद कहते हैं, "2014 के बाद से जिस तरह से देश में सांप्रदायिक शक्तियां मज़बूत हुई हैं, उन्हें देखते हुए गांधीवादी और लोहियावादी दलों का साथ आना ज़रूरी है."

Image caption शीला दीक्षित यूपी में कांग्रेस की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार हैं

शाहिद कहते हैं कि राजनीति में पहले क्या कहा, अब क्या कह रहे हैं, ये बहुत मायने नहीं रखता.

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार श्रवण शुक्ल कहते हैं कि समाजवादी पार्टी अब गठबंधन की संभावनाएं इसलिए तलाश रही है क्योंकि पिछले दो महीने से पार्टी के भीतर जो कुछ भी हुआ, उसे लेकर पार्टी में काफी डर है. लेकिन वो कहते हैं कि इस गठबंधन की संभावनाएं काफी कम हैं क्योंकि बिहार के विपरीत यहां कई दल हैं और सभी के अपने अलग-अलग एजेंडे, अपेक्षाएं और विवशताएं हैं. ऐसे में गठबंधन ज़मीन पर उतरता नहीं दिखता.

समाजवादी पार्टी नेताओं ने इससे पहले जदयू और आरजेडी के नेताओं से जब मुलाक़ात की थी तब उन्होंने महागठबंधन में कांग्रेस को भी शामिल करने की बात कही थी. मुलायम सिंह यादव की ये पहल उसी दिशा में देखी जा रही है.

वैसे जानकारों का कहना है कि इन पार्टियों का गठबंधन होगा या नहीं- ये कहना मुश्किल है, लेकिन ये कोशिशें किस दिशा में जा रही हैं, इसका अंदाज़ा पांच नवंबर को हो जाएगा जब समाजवादी पार्टी अपना 25वां स्थापना दिवस मनाएगी.

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