अब 'लव टेम्पल' में नहीं होगा प्रेम विवाह

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दिलीप राव दुखी हैं कि करीमनगर के प्रसिद्ध मंदिर ने अपने "यहां प्रेम विवाह करना मना है" की तख्त़ी लटका दी है.

उन्हें दुख इसलिए नहीं है कि वो 'लव मैरिज टेम्पल' के नाम से मशहूर इस मंदिर में शादी करना चाहते हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि उन्होंने 13 साल पहले इसी टापला लक्ष्मीनरसिम्हा स्वामी मंदिर में अपनी प्रेमिका, दीप्ति से शादी की थी.

दोनों के परिवार को इस शादी पर आपत्ति थी.

राव ने बीबीसी से कहा, "अब उन प्रेमी-प्रेमिकाओं के लिए मुश्किलें खड़ी होंगी जो प्रेम-विवाह करना करना चाहते हैं."

राव और दीप्ति की मुलाक़ात भी इसी मंदिर के आसपास हुई थी और उनका प्यार भी यहीं फला-फूला. बाद में उन्होंने प्रेम विवाह का फ़ैसला भी यहीं किया.

दोनों के परिवार वालों को उनकी शादी से ऐतराज़ था क्योंकि दिलीप पिछड़ी जाति के थे तो दीप्ति का तालुक्क़ ऊंची जाति से था.

लेकिन दोनों अपने इरादे पर डटे रहे और उनकी मुलाक़ात एक मंदिर से हुई जिसने शादी का मुहूर्त निकाला.

राव बताते हैं, "हमने पहले बालाजी मंदिर में शादी करना तय किया था. वहां बेहतर सुविधाएं थीं. लेकिन मुहूर्त से ठीक पहले पंडित गायब हो गया. वह मेरी पत्नी के परिवार वालों की राजनीतिक पहुंच और सामाजिक रुतबे से डर गया था. उसे सरकारी अफसरों वाले मेरे परिवार से भी भय हो गया था."

लेकिन दोनों के दोस्त मुहूर्त की तारीख़ और समय को लेकर बेहद गंभीर थे. वो चाहते थे कि इसका कड़ाई से पालन हो.

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दिलीप ने कहा, "फिर हम इस मंदिर में आएं. यह बालाजी मंदिर के ठीक सामने है. हमने यहीं शादी की. बाद में मैंने कई जोड़ों को यहां शादी के लिए भेजा. यह 'लव मैरिज टेम्पल' के नाम से मशहूर हो गया.''

राव पिछले हफ़्ते हुई एक घटना को लेकर बहुत दुखी हैं.

महाकाली अनिल नाम के एक लड़के की हस्तपुरम मोनिका नाम की लड़की के परिवार वालों ने हत्या कर दी. लड़की के परिवार वालों को शादी से एतराज़ था.

हत्या की वजह से पुलिस को मामले में दख़ल देना पड़ा. जबकि मंदिर समिति के एक सदस्य ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि जब भी कोई परेशान जोड़ा पुलिस से मदद मांगने आता था तो पुलिस यहीं भेज देती थी.

मंदिर की समिति प्रमुख नागेंद्र रेड्डी ने बताया, "वरिष्ठ पुलिस अधिकारी घटना स्थल पर ख़ुद आए और हमे ये बोर्ड लगाने की सलाह दी कि यहां प्रेम विवाह पर पाबंदी है. उनके सुझाव के बाद ही मंदिर की समिति ने बोर्ड लगाने का फ़ैसला किया."

एक पुलिस अधिकारी ने भी, नाम ज़ाहिर नहीं करने की शर्त पर, बताया, "हमने किसी तरह का कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं दिया था. ये महज़ एक सलाह थी जिसपर मंदिर समिति ने अमल करने का फ़ैसला किया. हम नहीं चाहते कि लोग आपस में लड़ें और एक दूसरे को नुक़सान पहुंचाएं. और ऐसा भी नहीं है कि केवल यही एक मंदिर है जहां इस तरह की शादियां होती हों."

मंदिर के पुजारी वेंकटादरी स्वामी ने बताया, "इस मंदिर में केवल शादियां ही नहीं होती. लोग यहां नामकरण संस्कार और दूसरी कई तरह की पूजा भी करवाने आते हैं. लेकिन जब शादी करवाने की बात आती है तो हम पहचान पत्र या आधार कार्ड सहित सारे कागज़ातों की जांच करते हैं. हम ये देखते हैं कि शादी करने वाला जोड़ा कहीं नाबालिग़ तो नहीं हैं."

स्वामी का कहना है, "सभी प्रेमी जोड़ों की शादियां हम यहां करवाते हैं. फिर वो अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन करवाते हैं."

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उन्होंने इशारे से दिखाया कि मंदिर के पास ही शादी पंजीकरण कार्यालय भी है.

नागेंद्र रेड्डी ने बताया, 2003 से अब तक इस मंदिर में 3,000 शादियां हो चुकी हैं.

जब राव की 2003 में शादी हुई थी तब वे 23 साल के थे.

वे कहते हैं, "प्रेम विवाह पर क्यों पाबंदी हो. सबको अपनी मर्ज़ी से शादी करने की आज़ादी होनी चाहिए. ये मंदिर न केवल दो प्रेमियों बल्कि दो परिवारों को भी मजबूत बंधन में बांधने का ज़रिया बना है."

राव और दीप्ति के परिवार वालों के बीच अब न केवल दोस्ताना संबंध हैं बल्कि "मैं और दीप्ति भी एक खुशहाल वैवाहिक जीवन जी रहे हैं. हमारी दो प्यारी बेटियां भी हैं.''

राव अपनी आईटी की नौकरी छोड़कर आजकल हैदराबाद में वेबसाइट चलाते हैं, लेकिन वो साल में दो तीन बार तेलंगाना के इस मंदिर में ज़रूर आते हैं.

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