हिलेरी से पहले मुंबई की इस महिला ने दी ट्रंप को टक्कर

इमेज कॉपीरइट AFP (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption पिछले नवंबर में स्मिता पनवलकर का देहांत हो गया था.

पांच साल पहले अमरीका के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और अरबपति रियल स्टेट बिज़नेसमैन डोनल्ड ट्रंप के आड़े आने की वजह से मुंबई की स्मिता पनवलकर सुर्ख़ियों में छा गईं थीं.

पिछले नवंबर में जब स्मिता का देहांत हुआ, तब उनकी उम्र क़रीब 50 साल के आस-पास रही होगी. वे 87 साल पुरानी चार मंजिला 'पठारे प्रभु बिल्डिंग' में अपने पति, बेटे और भाई के साथ रहती थीं.

लेकिन साल 2011 में दुनिया की सबसे चर्चित रियल स्टेट कंपनी के मालिक ने 'पठारे प्रभु बिल्डिंग' की जगह पर 65 मंज़िला 'ट्रंप टॉवर' बनाने की परियोजना शुरू की, तो स्मिता कंपनी के इस प्रोजेक्ट के सामने तन कर खड़ी हो गईं.

डोनल्ड ट्रंप की कंपनी की भारत में यह पहली परियोजना थी, जिसका स्मिता ने पुरज़ोर विरोध किया. इसके लिए ट्रंप की कंपनी ने एक स्थानीय डेवलपर के साथ क़रार किया था. इस बिल्डिंग में 50 आलीशान फ़्लैट बनने थे.

इमेज कॉपीरइट Anushree Fadnavis/Indus Images
Image caption स्मिता के पति प्रसाद पनवलकर कहते हैं कि उनकी पत्नी एक 'योद्धा' थीं.

'1990 से रह रहे हैं परिवार'

ज़मीन की क़िल्लत वाले मुंबई शहर में रियल स्टेट की क़ीमतें लगातार बढ़ते रहने की वजह से पुराने मकानों को तोड़कर नए मकान बनाए जा सकते हैं. बशर्ते डेवलपर वहां रह रहे बाशिदों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था करे.

दक्षिण मुंबई के संभ्रांत चौपाटी इलाके के पठारे प्रभु बिल्डिंग में पनवलकर और दूसरे 25 किरायेदार साल 1990 से रहते हैं. प्रसाद पनवलकर बताते हैं कि वे साधारण जीवन जीने वाले लोग हैं. साल 2011 से पहले वे भी एक आम मुंबईकर की तरह रह रहे थे. और अपने 560 फ़ीट के तीन कमरों वाले फ़्लैट का 185 रुपये किराया दिया करते थे.

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption ट्रंप टॉवर बनाने के लिए इस मकान को तोड़ना पड़ता, जिसमें 20 से अधिक परिवारों का बसेरा था.

यह ख़बर चारों ओर फैल गई कि डोनल्ड ट्रंप भारत की अपनी पहली परियोजना यहां शुरू करना चाहते हैं. इस मामले में मशहूर स्थानीय डेवलपर रोहन लाइफ़ स्केप्स ने ज़ल्द ही पहल की.

रोहन लाइफ़ स्केप्स के अध्यक्ष हरेश मेहता ने बताया, "हम न्यूयॉर्क में उनसे मिले और चार बैठकें कीं. उन्होंने भारत में दिलचस्पी दिखाई और हमने उन्हें मुंबई की संभावनाओं के बारे में भी बताया." इसके बाद दोनों के बीच ज़ल्द ही समझौता हो गया. यह तय हुआ कि 2,000 वर्गफ़ीट से अधिक जगह में चमकदार 65 मंजिला ट्रंप टॉवर बनाया जाएगा, जिसमें 50 अपार्टमेंट भी होंगे.

स्थानीय डेवलपर ने अगल-बगल के दो प्लॉट खरीद लिए. इनमें एक पर पनवलकर का मकान भी बना था. फ़्लैट की क़ीमत 40,000 रुपए से 50,000 प्रति वर्ग फ़ीट से शुरू होती थी.

इमेज कॉपीरइट Anushree Fadnavis/Indus Images
Image caption पनवलकर का परिवार इस मकान में 27 साल तक रहा.

मेहता कहते हैं, "यह ब्रैंडिंग क़रार था. रॉयलटी के बदले हम ट्रंप ब्रांड का इस्तेमाल कर सकते थे. ट्रंप को पैसा नहीं लगाना था. उनकी कंपनी मशहूर है. इस वजह से मार्केट में क़ीमतें भी बढ़तीं."

मकान के किरायेदारों को 2004 में बता दिया गया कि इस मकान को "फिर से विकसित" किया जाएगा. अधिकतर लोग राजी भी हो गए.

पनवलकर ने कहा, "लेकिन 2010 तक कुछ नहीं हुआ. फिर डेवलपर आए और हम लोगों से मकान खाली करने को कहा ताकि इसे विकसित क्या जा सके." वे कहते हैं कि उनकी पत्नी ने लोगों की अगुवाई की और घर खाली करने से इनकार कर दिया.

पनवलकर कहते हैं, "डेवलपर ने घर खाली करने को कहा और मुआवज़ा देने की पेशकश की. स्मिता ने उनसे कहा कि जब तक नए मकान में फ़्लैट नहीं दिए जाते, वे घर खाली नहीं करेंगे. काफ़ी बाद में हमें पता चला कि वह मकान मशहूर अमरीकी बिजनेसमैन डोनल्ड ट्रंप के नाम पर बनने वाला था."

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption 45 दिनों तक बिजली गुल रहने के बावजूद पनवलकर का परिवार फ़्लैट में डटा रहा.

'प्रतिरोध का प्रतीक स्मिता'

स्थानीय मीडिया को 'प्रतिरोध का प्रतीक' एक नायिका मिल गई. 'मुंबई मिरर' ने छापा कि "किस तरह 54 साल की दमख़म वाली यह महिला डोनल्ड ट्रंप और भारत में उनकी परियोजना के बीच खड़ी हो गई है." एक दूसरे अख़बार ने छापा "पनवलकर को हराना मुश्किल है."

जनवरी 2012 में पूरे मकान में पनवलकर का परिवार ही रह गया था. दूसरे 25 किरायेदार घर खाली कर गए. पाइप से पानी रिसने लगा और सीढ़ियां पूरी तरह धूल से भर गईं. साल 2011 के मई महीने में शॉर्ट सर्किट की वजह से बिजली गुल हो गई और मकान में 45 दिनों तक बिजली नहीं आई.

यह वह समय था जब पनवलकर को भी लगा कि मकान खाली कर ही देना चाहिए, पर उनकी पत्नी ने इसका विरोध किया और टस से मस नहीं हुईं.

वे कहते हैं, "हम उमस भरी गर्मी में फ़्लैट में रहे और वहीं सोए. स्मिता को घर का कामकाज भी करना पड़ता था." अंधेरा छा जाने पर स्मिता पनवलकर मोमबत्तियां जलाकर खाना पकाती थीं और पूरा परिवार जल्द सो जाता था. उन्होंने एक रिपोर्टर से कहा था कि वे मधुमेह की दवा नहीं ले पाती थीं, क्योंकि फ्रिज़ काम नहीं करता था.

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption डोनल्ड ट्रंप एक नई परियोजना के साथ 2013 में मुंबई लौटे.

मेहता का दावा है कि पनवलकर पर "घर खाली करने का दवाब नहीं था." उन्होंने कहा कि अधिकांश किरायेदार ख़ुद ही घर खाली करके चले गए. वे कहते हैं, "पनवलकर कड़े किरायेदार थे, पर वे परियोजना को रोक नहीं सकते थे."

अगले छह साल तक पनवलकर परिवार डटा रहा और मकान ढहाने का विरोध करता रहा. मेहता कहते हैं, "टॉवर की परियोजना के सामने कई तरह की दिक्क़तें थीं. मंजूरी मिलने में देर हुई. कुछ दूसरे नियम क़ानून इसके आड़े आए."

वे बताते हैं कि परियोजना में देर होने की वजह से 2013 में ट्रंप की कंपनी ने आपसी सहमति से लाइसेंस का क़रार रद्द कर दिया.

इमेज कॉपीरइट Anushree Fadnavis/Indus Images
Image caption मुंबई का रियल स्टेट दूनिया के सबसे मंहगे रियल स्टेट में एक है.

दूसरी ओर, उस मकान में रहने वाले अकेले भाड़ेदार की ज़िंदगी भी सामान्य रूप से कटती रही. पर पिछले नंवबर में दिल का दौरा पड़ने से स्मिता पनवलकर की मौत हो गई.

उनके पति कहते हैं, "उन्हें काफ़ी तनाव में रहना पड़ा. उन्हें मधुमेह और उच्च रक्तचाप की समस्या थी." वे आगे जोड़ते हैं, "वे बेहद शांत रहने वाली महिला थीं. लेकिन भीतर से बहुत मज़बूत. उन्हें हमारा पूरा परिवार याद करता है."

स्मिता पनवलकर टेक्सटाइल डिज़ायनर थीं. वे मुंबई की मिलों के लिए फ्रीलांसिंग किया करती थीं. उन्होंने स्कूल में कुछ वक्त पढ़ाया भी. लेकिन शादी के बाद घर परिवार की देख भाल करने के लिए उन्होंने काम छोड़ दिया.

प्रसाद पनवलकर का कहना है कि "स्मिता की प्रतिबद्धता का सम्मान करने के लिए" वे उसी मकान में रहे. उन्होंने सूचना का अधिकार के तहत दर्जन भर से ज़्यादा अर्ज़ियां दे रखी हैं. बग़ैर बिजली के रह चुके हैं. हटाए जाने के तीन आदेशों का विरोध कर चुके हैं और अदालतों में मुक़दमे लड़ चुके हैं.

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption डेवलपर का कहना है कि नए ट्रंप टॉवर में जेट उतारने की सुविधा भी होगी.

बीते साल अप्रैल में पनवलकर का रोहन लाइफ़ स्केप्स के साथ समझौता हो गया, जिसके तहत वह उन्हें 12वीं मंजिल पर एक फ़्लैट देने को राज़ी हो गया. उन्होंने घर खाली कर दिया. उस जगह अब एक 22-मंजिला मकान बन रहा है.

अंत में, मुंबई में 75-मंजिला ट्रंप टॉवर बन रहा है. अपर वर्ली इलाक़े में बनने वाले इस मकान में 400 फ़्लैट होंगे और वहां जेट उतारने की सुविधा भी होगी. साल 2018 में लोगों को घर मिलने लगेगा.

डोनल्ड ट्रंप जब 2014 में मुंबई आए थे, उन्होंने कहा था, "आपके यहां रियल स्टेट इतना सस्ता है कि यकीन नहीं होता."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार