'गठबंधन' या 'विखंडन': आज उठ सकेगा पर्दा?

समाजवादी पार्टी में तीन नवंबर को अखिलेश की रथ यात्रा कार्यक्रम के दौरान परिवार की एकता दिखाने की कोशिश ज़रूर की गई, लेकिन शनिवार को होनेवाले कार्यक्रम में उस एकता का दिखावा भी बड़ा मुश्किल लग रहा है. पार्टी आज अपना 25 वां स्थापना दिवस समारोह मना रही है.

इसके लिए पार्टी ने जहां एक ओर कार्यक्रम की ज़ोरदार तैयारियां की हैं, कार्यक्रम स्थल जनेश्वर मिश्र पार्क को दुल्हन की तरह सजाया गया है और पूरा लखनऊ शहर पोस्टरों और बैनरों से पटा पड़ा है, वहीं पार्टी में चल रहे विवाद की छाया भी इस कार्यक्रम पर साफ़ दिख रही है.

कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नीतीश कुमार, शरद यादव, एचडी देवगौड़ा, अजित सिंह, ओमप्रकाश चौटाला जैसे नेताओं को घर-घर जाकर आमंत्रण बाँटे गए हैं, वहीं पार्टी से पिछले दिनों निकाले गए नेताओं को साफ़तौर पर कहा गया है कि वो यहां न आएं.

वैसे तो प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने तीन तारीख़ को ही साफ़ कर दिया था कि वो इस कार्यक्रम में पार्टी से निकाले गए लोगों को नहीं देखना चाहते. कल इस बारे में उन्होंने मुलायम सिंह यादव से बात भी की.

बताया जा रहा है कि इसके बाद इस बारे में बाक़ायदा सूचना जारी की गई है, लेकिन पार्टी के नेता इस बारे में खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं. पार्टी नेता मोहम्मद शाहिद कहते हैं कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है कि नेताओं को आने से मना किया गया है, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष ने ये ज़रूर कहा है कि यदि ये नेता मुलायम सिंह यादव से माफ़ी मांगते हैं तो उन्हें माफ़ किया जा सकता है.

शुक्रवार को दिन भर मीडिया में इस बात को लेकर चर्चाएं गर्म रहीं. दरअसल कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस बात से सहमत नहीं हैं क्योंकि निष्कासित सभी नेता उनके खेमे के हैं.

वहीं दूसरी ओर निष्कासित किए गए कुछ नेता ख़ुद ही कार्यक्रम में न आने का मन बना चुके हैं. पिछले दिनों मुलायम सिंह यादव को कथित विवादित पत्र लिखने वाले एमएलसी उदयवीर सिंह कहते हैं कि वो ख़ुद नहीं आएंगे लेकिन उनके समर्थक ज़रूर जाएंगे और तमाम आशंकाएं भी इसी बात को लेकर चल रही हैं कि कहीं दोनों धड़ों के समर्थक आमने-सामने न हों.

बहरहाल, पार्टी ने पुराने जनता दल से निकले कई नेताओं को भी इस कार्यक्रम में बुलाया है. इनमें से कौन आता है और कौन नहीं ये तो कार्यक्रम के बाद पता चलेगा, लेकिन इस बुलावे का मक़सद आगामी विधान सभा चुनाव के लिए महागठबंधन की संभावनाएं तलाशना भी है.

पर क्या ये गठबंधन बन पाएगा - इस सवाल के जवाब में वरिष्ठ पत्रकार सुभाष मिश्र कहते हैं, "बिहार की तरह यहां महागठबंधन की उम्मीद कम है. इसके दो कारण हैं- पहला ये कि इस महागठबंधन में क्या बीएसपी शामिल होगी? दूसरा ये कि मुलायम सिंह यादव राजनीतिक रूप से विश्वसनीय व्यक्ति नहीं हैं, ऐसे में अन्य पार्टियों के सभी नेता अखिलेश यादव के नेतृत्व में ही गठबंधन पर बात करना चाहेंगे."

सुभाष मिश्र गठबंधन पर आशंका ज़ाहिर कर रहे हैं. वहीं कुछ अन्य पर्यवेक्षकों का कहना है कि समाजवादी पार्टी में फ़िलहाल चुनौती अन्य पार्टियों से गठबंधन की नहीं बल्कि पार्टी की एकता को बनाए रखने की है. अब देखना ये है कि पार्टी के आज के कार्यक्रम में ऐसी तमाम आशंकाओं के बादल छटेंगे या फिर संशय ही बना रहेगा.

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