प्रदूषण पर प्रदर्शन लेकिन किसके ख़िलाफ़?

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के प्रति लोगों को जागरुक करने के उद्देश्य से जंतर मंतर पर स्कूली बच्चों और उनके मां-बाप और शिक्षकों ने मास्क लगाकर प्रदर्शन किया.

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इस कदर बढ़ गया है कि राज्य सरकार ने एमसीडी स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है. निजी स्कूल भी बंद किए गए हैं.

दिल्ली में रविवार सुबह एयर क्वालिटी इंडेक्स 999 के स्तर पर पहुंच गया, जो बेहद ख़तरनाक है. आम तौर पर 0-50 का पैमाना बहुत अच्छा माना जाता है. 51-100 तक भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं होता है.

प्रदर्शन में शामिल स्कूली बच्चों ने कहा, "हम खुले में खेलना चाहते हैं, स्कूल जाना चाहते हैं लेकिन सबने मिलकर हवा को बहुत ज़हरीला कर दिया है."

श्रीराम स्कूल की सह-अध्यक्ष वास्वी भरतराम ने कहा, "आसपास देखिए, कितना प्रदूषण है. न हम साफ़ देख सकते हैं, न सांस ले सकते हैं. बच्चों और बुज़ुर्गों को बहुत ज़्यादा दिक़्क़्त हो रही है."

ये प्रदर्शन किसके ख़िलाफ़ है इस सवाल पर सीमा जिंदल ने कहा, "प्रदूषण के लिए सभी ज़िम्मेदार हैं, इसलिए ये नहीं कह सकते कि ये प्रदर्शन सरकार के ख़िलाफ़ है, हम सबको सोचना चाहिए कि इस समस्या को कैसे रोका जाए. हम यहां जागरूकता लाने के लिए इकट्ठा हुए हैं. "

मास्क पहनकर जंतर-मंतर पर आए जयदीप खुराना ने कहा, "मैं मास्क के बिना सांस नहीं ले पा रहा था. हम प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं बल्कि प्रार्थना कर रहे हैं, सरकार से, जो फ़ैसले ले सकती है और आम लोगों से जो बदलाव ला सकते हैं."

खुराना कहते हैं, "प्रदूषण की चोट दिख नहीं रही है इसलिए लोग गंभीर नहीं है. लेकिन ये भीतर से आपको खा रहा है."

13 साल से दिल्ली में रह रहीं फीज़ियोथेरेपिस्ट वेस्ना जेकब ने कहा, "मैंने कभी दिल्ली में इतना ज़्यादा प्रदूषण नहीं देखा. इससे बाहरी वातावरण ख़राब हो गया है जिससे लोगों की आंतरिक शांति भी प्रभावित हो रही है."

उन्होंने कहा, "मैं दिल्ली से बाहर चली जाना चाहती हूं लेकिन अपने काम को छोड़कर नहीं जा सकती."

एक स्कूली बच्ची सोफ़ी का कहना था, "ये दुखद है कि हमें बाहर आकर ये लोगों को बताना पड़ रहा है कि देखो कितना प्रदूषण है."

दिल्ली के एक निजी अस्पातल में कार्यरत डॉक्टर नितिन वर्मा का कहना था, "हम लोगों को बाहर जाने या व्यायाम करने की सलाह भी नहीं दे सकते क्योंकि जितना आप व्यायाम करेंगे उतनी ज़्यादा सांस लेंगे और ज़्यादा प्रदूषण अंदर जाएगा."

प्रदूषण को कैसे रोका जा सकता है इस सवाल पर उन्होंने कहा, "घर में झाड़ू लगाने के बजाए पोंछा लगाए, अगरबत्ती न जलाए, कूड़ा न जलाए, निजी कार के बजाए सार्वजनिक यातायात या कार पूल का इस्तेमाल करें."

दिल्ली में प्रदूषण के भयावह स्तर पर पर्यावरण मंत्री अनिल दवे ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "दिल्ली जैसे महाननगर में पर्यावरण की स्थिति 364 दिन से खराब है. लेकिन अलग-अलग कारणों से पिछले 10-12 दिनों में हालात और बदतर हो गए हैं.

पेट्रोल, डीजल का इस्तेमाल और लकड़ी, सूखी पत्तियां और कोयला को जलाने से जो गंदगी फैल रही है, ये सबसे अहम हैं.

ऑटोमोबाइल, कार्बन मैनेजमेंट, खेतों से निकलने वाले खरपतवारों में लगातार धुआं निकलते रहना, झाड़ू लगाने के बाद कचरों में आग लगा देना, जेनरेटर को रात-दिन चलाया जाना और पुरानी डीजल कारें मुसीबत बढ़ा रही हैं.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि दिल्ली धुएं का चैंबर बन गई है. धुआं हट नहीं रहा है और यह काफ़ी भयानक स्थिति है

हवा इतनी ज़हरीली हो चली है कि राजधानी में मास्क की बिक्री में रिकार्ड तेज़ी आई है.

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