'क़ैदियों की गिनती का काम भी क़ैदियों के ज़िम्मे'

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Image caption भोपाल सेंट्रल जेल

कुछ दिन पहले भोपाल से आठ कैदियों के भागने और बाद में उनके एनकाउंटर में मारे जाने की बात पर बहुत हो हल्ला भी मचा था.

राज्य की जेलों में काम कर चुके अधिकारियों का कहना है कि मध्य प्रदेश की जेल व्यवस्था चरमरा रही है और जेल-ब्रेक की घटनाएं पुरानी हैं.

साल 2011 में नौ क़ैदी छह गार्ड्स की चाय में मिलावट कर उन्हें बेहोश कर निकल भागे. 2013 में जर्जर दीवारों और प्रहरियों की कमी से जूझ रही खंडवा जेल से पांच कैदी बाथरूम की खि़ड़की तोड़कर निकल भागे.

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11 केंद्रीय जेल, 72 तहसील जेल और ज़िला जेलों को मिलाकर मध्य प्रदेश में 124 जेल हैं. मॉडल जेल कोड के मुताबिक़ जहां जेल में भीड़ स्वीकृत संख्या से 10 प्रतिशत ही ज़्यादा होनी चाहिए, राज्य में जेल 40 प्रतिशत ज़्यादा भरे हैं.

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Image caption गूगल अर्थ की नज़र से भोपाल सेंट्रल जेल

भोपाल सेंट्रल जेल की क्षमता 1,400 की है लेकिन यहां 3,000 से ज़्यादा कैदी हैं. एक वक्त मध्य प्रदेशों की सभी जेलों के रखरखाव के लिए ज़िम्मेदार रहे रिटायर्ड जेल अधिकारी जी. के. अग्रवाल कहते हैं, "जेल व्यवस्था चरमरा रही है लेकिन किसी को परवाह नहीं."

वो मुझे वरिष्ठ अधिकारियों को हाथों से जेल सुधार पर लिखे गए कई पत्र दिखाते हैं जिन पर उनके मुताबिक़ कोई कार्रवाई नहीं हुई.

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दो साल पहले राज्य और केंद्र के अधिकारियों को लिखे एक पत्र में उन्होंने कहा था, "जेल भवन की संरचना, जेल भवन के भेद्य स्थान, सुरक्षा की अविवेकपूर्ण व्यवस्था, स्टाफ़ की दयनीय दशा जैसी स्थानीय समस्याओं के उपरांत भी यदि भोपाल जेल में कोई बड़ी दुर्घटना नहीं घटी है तो ये मानना भूल होगी कि व्यवस्थाएं उत्तम हैं."

Image caption रिटायर्ड जेल अधिकारी जी. के. अग्रवाल

उन्होंने लिखा था, "ईश्वर मदद कर रहा है लेकिन सदैव मदद करता ही रहेगा, ऐसा सोचना भूल होगी." भोपाल जेल की संरचना त्रिकोण जैसी है और इसे दो सेक्टरों ए और बी में विभाजित किया गया है.

हर सेक्टर के चारों और आठ से नौ फ़ीट ऊंची दीवार है और सबसे बाहर और ज़्यादा ऊंची दीवार है. सेल में लेटने के लिए सीमेंट का एक स्लैब होता है. मध्य प्रदेश के जेलों में अलीगढ़ के लोहे के तालों का इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि उन्हें सबसे मज़बूत माना जाता है.

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जेलों की क्षमता को बढ़ाने के लिए 90 के दशक में बनी सेंट्रल जेल के आलोचक इसके डिज़ाइन को दोषपूर्ण बता रहे हैं. अग्रवाल भोपाल सेंट्रल जेल को 'धर्मशाला' की तरह बताते हैं जहां बीच में एक बड़ा सा मैदान और चारों ओर बैरकें और जेलें हैं.

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Image caption 'भोपाल जेल में 200 कैदियों के लिए एक सुरक्षाकर्मी है'

अग्रवाल के अनुसार इतनी बड़ी संख्या में क़ैदियों को एक जगह इकट्ठा होने देना और चंद निहत्थे सुरक्षाकर्मियों पर संचालन की ज़िम्मेदारी डालना ख़तरे से खाली नहीं है. उनके अनुसार जेल की डिज़ाइन ऐसा होनी चाहिए कि क़ैदियों की गतिविधियों को सीमाबद्ध किया जा सके ताकि उन्हें संचालित करना आसान हो.

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रिटायर्ड भोपाल जेलर हरेंद्र सिंह जीके अग्रवाल से सहमत हैं. वो कहते हैं, "भोपाल जेल में 200 क़ैदियों के लिए एक सुरक्षाकर्मी है. ये ख़तरनाक स्थिति है."

अदालत के बाहर शांति भंग करने के आरोप में वकील डॉक्टर सिद्धार्थ गुप्ता ने दो दिन भोपाल जेल के बैरक नंबर 17 दिन बिताए हैं.

वो कहते हैं, "खाना बनाने से लेकर, दफ़्तर में काम करने और क़ैदियों की गिनती की ड्यूटी में सभी क़ैदियों को लगाया जाता है. विश्वास करना मुश्किल है लेकिन मेरे जेल में बिताए दो दिनों में एक भी सुरक्षाकर्मी नज़र नहीं आया."

Image caption भोपाल सेंट्रल जेल

जेल के भीतर किसी सुरक्षाकर्मी को निहत्थे ही जाना होता है. सभी हथियारों को जेल गेट के नज़दीक शस्त्रागार में रखा जाता है. भोपाल जेल के नए प्रमुख संजय चौधरी पर स्थिति सुधारने का दबाव है और वो तेज़ी से आधुनिकीकरण की बात कर रहे हैं.

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बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "हम सुरक्षा को और अपना अमला बढ़ा रहे हैं. साथ ही हम एक उच्च सुरक्षा ज़ोन की संरचना कर रहे हैं." जेल सुधार के दावों के बीच वकील परवेज़ आलम कह रहे हैं वो अपने सवालों के जवाबों के लिए सरकार को अदालत में घसीटेंगे.

Image caption भारत में जेलब्रेक के मामले

क्या मारे गए आठ लोगों की किसी ने मदद की? अगर हां तो जब उन्हें नए कपड़े या जूते दिए जा सकते थे तो भागने के लिए गाड़ी क्यों नहीं दी? अगर उन्हें भागना था तो वो एक साथ क्यों रहे और अलग अलग दिशा में क्यों नहीं भागे?

क्या प्रशासन ने जेल के सीसीटीवी कैमरों की हार्ड डिस्क ज़ब्त की? अगर नहीं तो क्यों नहीं? रमाशंकर यादव की हत्या करने वाला हथियार कहां है? क्या टूथब्रश को मोड़कर लोहे का मोटा ताला खोला जा सकता है?

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