काले धन के खिलाफ बड़ा फैसला, पर दिक्कतें कई: अर्थशास्त्री

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Image caption मुंबई के एक एटीएम पर भीड़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि भारत में 500 और 1000 रूपए के पुराने नोटों का मंगलवार मध्यरात्री से इस्तेमाल नहीं हो पाएगा.

इस घोषणा से पूरे देश में, ख़ास तौर से शहरों और कस्बों में, जहाँ ये सुनी गई, व्यापक असर हुआ है.

लोग घबराए भी हुए हैं कि यदि इन नोटों को इस्तेमाल नहीं कर सकते तो फिर लेन-देन कैसे होगा?

बीबीसी ने दो अर्थशास्त्रियों से बात करके इस कदम का आकलन करने का प्रयास किया है. पढ़िए उनकी राय-

आलोक पुराणिक- आर्थिक मामलों के जानकार

पूरी दुनिया में काले धन का ट्रांज़ैक्शन ज़्यादातर बड़े नोटों में होता है. दिल्ली या किसी भी बड़े शहर में घरों की डील हमेशा काले धन में होती है. प्रापर्टी का रेट जितना होता है वो पूरा चेक से नहीं होता है. जो पैसा नगद दिया जाता है वो बड़े नोटों में ही होता है.

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अगर उदाहरण लें कि दो करोड़ की डील है और चेक से एक करोड़ दिए जा रहे हैं तो बाकी का एक करोड़ सौ रूपए में तो नहीं दिया जाएगा. वो तो पांच सौ या हज़ार में ही होगा.

अब प्रधानमंत्री की घोषणा से काले धन पर नियंत्रण हो सकता है.

वैसे ऐसा फैसला पहली बार नहीं हुआ है. मोरारजी देसाई जब वित्त मंत्री थे साठ के दशक में तब ऐसा फैसला किया गया था.

ऐसा माना जा रहा है कि 500 और 1000 के पुराने नोट जब सर्कुलेशन से निकल जाएंगे तो फिर नए नोट आ जाएंगे.

इससे उम्मीद ये है कि काले धन का एक बड़ा हिस्सा खत्म हो जाएगा.

दिक्कतें

इस तरह के फैसले की सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि भारत जैसे देश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र का है. जैसे कामवाली बाई है जो हमारे आपके घर आती है. उसे आप हज़ार रूपए दे देते हैं लेकिन उसके पास खाता नहीं है. तो वो क्या करेगी. ये सोचिए.

उनके लिए दिक्कत है जिनके पास बैंक खाते नहीं हैं. ये एक बड़ा झटका है.

अगर पैसे जितने भी हों लेकिन उसका हिसाब किताब हो, तब कोई दिक्कत नहीं है. दिक्कत वहां है जहां आपके पास पैसे का हिसाब नहीं हैं.

परंजॉय गुहा ठाकुरता- आर्थिक मामलों के पत्रकार

प्रधानमंत्री के इस ऐलान ने लोगों को हैरान कर दिया है. असल तस्वीर तो अगले कुछ दिनों में साफ होगी कि कितना काला धन इस तरीके से बाहर आ सकेगा.

हालांकि लोगों को थोड़ा डर तो है कि वो बाज़ार में जाते हैं और उनके पास पांच सौ या हज़ार रूपए का नोट ही है तो वो कैसे सामान ले पाएंगे. सरकार को लोगों को भरोसा दिलाना चाहिए कि जिनके पास काला धन नहीं है उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी.

रिज़र्व बैंक और वित्त मंत्रालय अगले कुछ दिनों में क्या कदम उठाते हैं ये देखने वाली बात होगी.

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