जेब से नोट ग़ायब, बाज़ार से ग्राहक

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500 और 1000 के नोट पर लगी पाबंदी ने बाज़ार और कारोबारी, दोनों को सकते में डाल दिया है.

जिन बाज़ारों में लेन-देन का मुख्य ज़रिया नकदी है, वहां हर तरफ़ भ्रम पसरा है.

कारोबारियों का कहना है कि फ़िलहाल किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा कि क्या किया जाए.

थोक बाज़ार में बुरा हाल

उनके मुताबिक़ बाज़ार में कारोबार के लिए सबसे ज़्यादा 500 और 1000 का नोट इस्तेमाल होते हैं, ऐसे में उनके ग़ायब होने से अजीबोग़रीब स्थिति पैदा हो गई है.

ख़ारी बावली व्यापार संघ के अध्यक्ष राजीव बत्रा ने बीबीसी को बताया कि इस फ़ैसले की वजह का बाज़ार पर बेहद बुरा असर हुआ है. उन्होंने कहा, ''लोग दहशत में हैं. कारोबार पूरी तरह ठप्प हो गया है.''

बोरों में भरकर पैसा लाना होगा

बत्रा ने कहा कि आम तौर पर ख़ारी बावली बाज़ार खुलते ही अफ़रा-तफ़री का माहौल होता है, लेकिन आज यहां सन्नाटा पसरा है.

उन्होंने कहा, ''घी का एक टिन 6000 रुपए का आता है, ऐसे में आप सोचिए की ग्राहक क्या और कैसे ख़रीदेगा. शादी का सीज़न शुरू हो रहा है और उसकी ख़रीदारी 2-2.5 लाख रुपए की होती है. अब उसे 100 रुपए के हज़ारों नोट भरकर बोरी में लाने होंगे.''

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बत्रा के मुताबिक़ बाज़ार ख़ाली है और अगले 15 दिन तक यही हाल रहने वाला है. सरकार के फ़ैसले पर उन्होंने कहा, ''ये फ़ैसला जल्दबाज़ी में हुआ है.''

कारोबारी तबक़ा इसलिए परेशान है क्योंकि जिन नोट पर पाबंदी लगी है, बाज़ार में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल उन्हीं का होता है.

कारोबारी तबका सकते में

कंफ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने बीबीसी से कहा, ''कुछ वक़्त के लिए बाज़ार अस्त-व्यस्त रहेंगे. 50 और 100 के नोट अब ग्राहक के हाथ में भी कम हैं और बाज़ार में 500, 1000 के नोट अभी कोई लेगा नहीं.''

खंडेलवाल ने कहा, ''बाज़ार में कुछ समय नक़दी की कमी रहेगी, क्योंकि कारोबार की मुख्य़ करेंसी ग़ायब हो जाएगी.'' उन्होंने कहा कि फ़िलहाल सब सकते की स्थिति में हैं, लेकिन ये माहौल कुछ वक़्त तक ही रहेगा.

सोने के काम में कमी की आशंका

नक़दी का भारी इस्तेमाल देखने वाले सर्राफ़ा बाज़ार में भी कुछ इसी तरह के हालात देखने को मिल रहे हैं.

बुलियन कारोबार से जुड़े नवीन ने बीबीसी से कहा, ''सर्राफ़ा बाज़ार में वैसे भी नक़दी का ज़्यादा इस्तेमाल होता है, ऐसे में ट्रेड कम होना तय है.''

हालांकि, सर्राफ़ा के कुछ कारोबारी इस बात से ख़फ़ा हैं कि अगर इस फ़ैसले का उद्देश्य काला धन पर लगाम कसना है तो फिर 2000 का नया नोट क्यों जारी किया जा रहा है.

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प्रॉपर्टी डील में आएगी और कमी

मोदी सरकार के इस फ़ैसले से प्रॉपर्टी बाज़ार भी डरा हुआ है. बिल्डर हो या ख़रीदार या फिर डीलर, इस बाज़ार में हर कोई ब्लैक मनी के इस्तेमाल से वाक़िफ़ है.

डिलाइट एसोसिएट्स के संजीव ने बताया, ''हर डील में ब्लैक होता ही है, चाहें वो छोटी हो या बड़ी. प्रॉपर्टी बाज़ार में पहले से कारोबार मंदा था, इस फ़ैसले से और मंदी आएगी.''

हालांकि, ऐसा भी कहा जा रहा है कि लंबे वक़्त में ये फ़ैसला फ़ायदा देगा.

सीबीआरई के चेयरमैन, इंडिया एंड साउथ एशिया अंशुमन मैगज़ीन ने कहा, ''ये साहसी क़दम है. छोटी अवधि में भले कुछ दिक्कत हो, लेकिन रियल्टी बाज़ार के लिए लंबी अवधि में ये सकारात्मक साबित होगा.''

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