छत्तीसगढ़: दो प्रोफ़ेसरों के ख़िलाफ़ सीआईडी जांच?

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Image caption कलूरी के खिलाफ राज्यपाल को ज्ञापन देने जाते लोग.

छत्तीसगढ़ के बस्तर में पुलिस ने दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर नंदिनी सुंदर और जेएनयू की प्रोफ़ेसर अर्चना प्रसाद समेत चार लोगों के ख़िलाफ़ एक ग्रामीण की हत्या के मामले की सीआईडी जांच की अनुशंसा की है.

पुलिस महानिदेशक को लिखे एक पत्र में बस्तर के आईजी पुलिस शिवराम प्रसाद कल्लुरी ने कहा है कि समाचार पत्रों एवं न्यूज़ चैनलों में नंदिनी सुंदर द्वारा मुझ पर व्यक्तिगत लांछन लगाया जा रहा है.

सुकमा ज़िले के पुलिस अधीक्षक आईके एलेसेला ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "आरोप-प्रत्यारोप के बजाये पूरे मामले की निष्पक्ष विवेचना में हमारा विश्वास है. इसलिए हम मामले की सीआईडी जांच चाहते हैं."

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Image caption दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर नंदिनी सुंदर.

इधर नंदिनी सुंदर ने कहा है कि उनके ख़िलाफ़ पुलिस ने फ़र्ज़ी तरीक़े से मामला दर्ज किया है. उन्होंने सीआईडी जांच पर कहा कि हमारे वकील इस पर कार्रवाई करेंगे.

ग़ौरतलब है कि दरभा क्षेत्र के ग्राम नामा में शुक्रवार की रात संदिग्ध माओवादियों ने सामनाथ बघेल की हत्या कर दी थी.

पुलिस ने इस मामले में सामनाथ बघेल की पत्नी की शिकायत पर तोंगपाल थाने में प्रोफ़ेसर नंदिनी सुन्दर, प्रोफ़ेसर अर्चना प्रसाद, सीपीएम नेता संजय पराते, विनीत तिवारी, मंजू कवासी और मंगल राम कर्मा के ख़िलाफ़ 302, 120B, 147, 148, 149 ,452 तथा 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया है.

बस्तर के आईजी शिवराम प्रसाद कल्लुरी के अनुसार इन सभी लोगों के ख़िलाफ़ पुलिस के पास प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष कई सबूत हैं.

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Image caption बस्तर में छत्तीसगढ़ पुलिस.

लेकिन नंदिनी सुंदर समेत दूसरे लोगों ने पुलिस के दावे का खंडन किया है. नंदिनी सुंदर ने कहा है कि उनके द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं के कारण बस्तर पुलिस और राज्य सरकार बदले की नियत से काम कर रही है, इसलिये फ़र्ज़ी मामले दर्ज किए गए हैं.

नंदिनी सुंदर ने कहा, "छत्तीसगढ़ में आम लोगों को हथियार देकर उन्हें माओवादियों से लड़ने के सरकारी अभियान सलवा जुड़ूम को 2011 में हमारी याचिका पर ही सुप्रीम कोर्ट ने बंद करने के निर्देश दिये थे. इसके अलावा पिछले महीने हमारी याचिका पर ही बस्तर में आदिवासियों के घर जलाने के मामले की सीबीआई जांच में पुलिस को इसके लिये ज़िम्मेवार ठहराया गया था."

इस साल मई में नंदिनी सुंदर समेत दूसरे लोगों ने सौतनार, नामा और कुमाकोलेंग का दौरा किया था. इस दौरे के बाद सामनाथ बघेल समेत दूसरे ग्रामीणों ने कथित रूप से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि नंदिनी सुंदर और दूसरे लोगों ने ग्रामीणों को पुलिस के ख़िलाफ़ भड़काया और माओवादियों का साथ देने के लिये ग्रामीणों को उकसाया.

हालांकि नंदिनी सुंदर और दूसरे लोगों ने इन आरोपों को झूठा बताया है.

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