'बैंक में रुपए पड़े हैं, पति बगैर इलाज के चले गए'

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 500 और 1000 के नोट बंद करने के फ़ैसले के बाद देश के कुछ शहरों में बैंक की क़तार में लगे लोगों की मौत की खबरें आ रही हैं.

ख़बरों के मुताबिक मध्य प्रदेश के सागर में यूनियन बैंक की लाइन में खड़े एक बुज़ुर्ग की मौत हो गई.

बिहार के कैमूर के सिरहीरा गांव में बेटी की शादी की वजह से चिंता में डूबा एक अधेड़ आदमी चल बसा. वहीं मुंबई में भी एक बुज़ुर्ग की बैंक में मौत हो गई.

भोपाल से बीबीसी संवाददाता शुरैह नियाज़ी के मुताबिक मध्य प्रदेश के सागर में नोट बदलवाने के लिए लाइन में लगे एक बुज़ुर्ग की मौत हार्ट अटैक से हो गई.

शनिवार को 69 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी विनोद कुमार पांडे अपने 500 और 1000 रुपये के नोट बदलवाने के लिए यूनियन बैंक की शाखा के बाहर लाइन में लगे थे.

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काफी देर तक लाइऩ में इंतज़ार कर रहे पांडे को अचानक चक्कर आया और वह गिर गए.

सूचना मिलने पर उनके परिवार वाले आए और उन्हें अस्पताल लेकर गए, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी.

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इस बारे में उनके बेटे विनीत ने बताया, "वो यूनियन बैंक में नोट बदलवाने गए थे. लेकिन बैंक में सीनियर सिटीजन के लिए कोई अलग से व्यवस्था नहीं की गई थी. भीड़ की वजह से घबराहट के चलते उनकी जान चली गई."

वहां मौजूद कुछ लोगों का कहना है कि वहां लाइन बहुत लंबी थी और विनोद पांडे के गिरने के बावज़ूद भी लोग इस डर से मदद के लिए आए नहीं आए कि उनकी जगह लाइन में कोई और लग जाएगा.

सागर के पुलिस अधीक्षक सचिन अतुलकर का कहना है कि अगर परिवार इस मामले में कोई शिकायत करेगा तो मामले की जांच की जाएगी.

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उधर, बिहार से स्थानीय पत्रकार सीटू तिवारी ने बताया कि बिहार के कैमूर ज़िले के सिरहीरा गांव में राम अवध शाह के घर मातमी सन्नाटा है. गांव में परचून की दुकान चलाने वाले राम अवध की 12 नवंबर की सुबह मौत हो गई.

राम अवध के 18 साल के बेटे विकास ने बीबीसी को बताया, "तिलक चढ़ना था बहन का और पिताजी परेशान थे क्योंकि 500-1000 के नोट बंद हो गए और बैंक से पैसे नहीं निकल रहे थे."

उन्होंने कहा, "11 नवंबर की रात तकरीबन 11 बजे उन्हें सीने में दर्द हुआ, फिर तीन उल्टियां हुई. हम उन्हें पहले भभुआ के अस्तपाल ले गए, जहां से फिर बीएचयू ले गए, लेकिन वहां बेड की कमी की बात कहकर उन्हे भर्ती नहीं किया गया."

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विकास बताते हैं कि इसके बाद कई प्राइवेट अस्पताल ले गए. लेकिन सबने 500 -1000 का नोट देखकर राम अवध का इलाज नहीं किया. आख़िरकार बनारस के फोर्ड अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन 12 नवंबर की सुबह उनका देहांत हो गया.

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विकास का कहना है, "पिताजी को कोई भी बीमारी नहीं थी. डॉक्टर ने बताया कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा है और इसकी वजह सिर्फ इतनी है कि पैसा ना होने के चलते पिताजी बहुत चिंता में थे."

ऐसे में घर चलाने की चिंता भी पत्नी मनता देवी को खाए जा रही है. वह कहती है, "अब मेरे बच्चों को कौन देखेगा....दोनों लड़के छोटे हैं, बेटियों की शादी कैसे होगी, कोई जवाब देगा इसका."

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मनता देवी बार-बार बेहोश हो रही हैं. वो बार-बार दोहरा रही हैं, "मेरे पति और परिवार ने मोदी जी के लिए वोट किया था….बैंक में रुपए पड़े हैं, लेकिन पति बगैर इलाज के चले गए और बेटी का ब्याह रुक गया. ऐसा नहीं होता अगर 500 -1000 के नोट बंद नहीं होते."

गांव के मुखिया प्रतिनिधि शहजाद ने बीबीसी से फोन पर कहा, "42 साल का सेहतमंद आदमी नोट के चक्कर में हमारे बीच से चला गया. हम लोगों ने शुरुआती मदद तो की, लेकिन परिवार को और मदद की दरकार है. परिवार के पास सिर्फ एक परचून की दुकान है. कोई खेतीबाड़ी नहीं है."

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मुंबई से भी बुरी ख़बर है. स्थानीय पत्रकार अश्विन अघोर के मुताबिक भीड़ में मुंबई के मध्य उपनगर मुलुंड के निवासी 73 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक विश्वनाथ वर्तक घोषणा के दो दिन बाद बैंक पहुंचे थे.

लेकिन उन्हें घंटों तक कतार में खड़ा रहना पड़ा. मुलुंड के हरी ओम नगर के एक बैंक में उनका खाता था.

वर्तक 11 नवंबर को बैंक पहुंचे और कतार में खड़े हो गए. सुबह 11.30 बजे विश्वनाथ वर्तक को दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई.

मुलुंड के नवघर पुलिस थाने के वरिष्ठ निरीक्षक माधव मोरे कहते हैं, "विश्वनाथ वर्तक को पिछले 20 सालों से हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत थी. जब वह सीढ़ियां चढ़ रहे थे, उन्हें चक्कर आना शुरू हुआ, हाथ पैर कांपने लगे. उन्होंने आस -पास खड़े लोगों को अपनी बिगड़ती हालत के बारे में बताया. जिसके बाद लोगों ने उनकी मदद की, पास के ही एक डॉक्टर को बुलाया. लेकिन जब तक डॉक्टर मौके पर पहुँचते, वर्तक की मौत हो चुकी थी "

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मोरे ने बताया, " उनका शव पोस्टमॉर्टम के लिए राजावाडी अस्पताल भेजा गया."

राजावाडी अस्पताल के एक चिकित्सा अधिकारी के मुताबिक, "विश्वनाथ वर्तक की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई."

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