ऑनलाइन पेमेंट इंडस्ट्री को हो रहा है फायदा

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Image caption नोटबंदी से ऑनलाइन पेमेंट में जबर्दस्त उछाल

500 और 1000 के नोटों को रद्द करने का सबसे ज़्यादा फ़ायदा मोबाइल वॉलेट्स और उससे जुड़ी डिज़िटल पेमेंट इंडस्ट्री को हुआ है. इन दोनों बड़े नोटों को रद्द किए जाने के बाद पिछले 6 दिनों में ऑनलाइन पेमेंट में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. यदि यही गति रही तो भारत इस मामले में अन्य ब्रिक्स देशों की बराबरी कर लेगा.

पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन नवीन सूर्या ने बीबीसी हिन्दी से कहा, ''इस मामले में अभी माकूल आंकड़ा देना मुश्किल है लेकिन जो ट्रेंड मिला है उससे पता चलता है कि प्री-पेड वॉलेट्स में 60 से 70 पर्सेंट का ग्रोथ है.'' इंडिया में अब भी 90 फ़ीसदी लोग कैश का इस्तेमाल करते हैं. महज़ 10 फ़ीसदी लोग ही डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ क़दम मिलाकर चल रहे हैं.

इस 10 प्रतिशत लोगों में 30 फ़ीसदी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं तो 30 फ़ीसदी लोग डेबिट कार्ड के जरिए लेनदेन करते हैं. इसके अलावा 15 फ़ीसदी लोग नेट बैंकिंग और बाक़ी 20 से 30 फ़ीसदी लोग प्री-पेड मोबाइल वॉलेट्स का इस्तेमाल करते हैं. पिछले तीन सालों में क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि डेबिट कार्ड में यह ग्रोथ 30 से 40 फ़ीसदी है. नेट बैंकिंग इस्तेमाल करने वालों 25 से 30 फ़ीसदी और प्री-पेड वॉलेट्स में यह वृद्धि दर 60 से 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है.

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Image caption आने वाले पांच सालों में होगी जबर्दस्त बढ़ोतरी

लेकिन नोटों को अचानक रद्द किए जाने से इस इंडस्ट्री ने ग़जब की छलांग लगाई है. आने वाले तीन सालों में यहां वृद्धि दर सीधे दोगुनी हो जाएगी. सूर्या बताते हैं, ''अगले तीन सालों में हमलोग 30 से 40 प्रतिशत का आंकड़ा छू लेंगे. सरकार के इस फ़ैसले के बाद हमलोग ब्रिक्स देशों की बराबरी कर लेंगे, जहां हम 10 पर्सेंट नीचे थे.''

वो कहते हैं, ''न केवल प्री-पेड मोबाइल ऐप्स डाउनलोड किए गए बल्कि बिज़नेस के मामले में 20 से 80 पर्सेंट की बढ़ोतरी भी हुई. यह बड़ा फायदा हुआ है.' प्री-पेड वॉलेट्स नॉन बैंक कैटिगरी में आता है. इसका मतलब यह हुआ कि सभी रिटेलर्स वीज़ा और मास्टर कार्ड की तरह वॉलेट्स के ज़रिए भुगतान नहीं ले सकते. हालांकि प्री-पेड वॉलेट कंपनियां अलग से रिटेलर्स के साथ मिलकर इसकी व्यवस्था कर सकती हैं.

इन सभी समस्याओं के बावजूद सूर्या को भरोसा है कि वर्तमान में 10 से 12 मिलियन डॉलर की यह इंडस्ट्री अगले पांच सालों में 10 गुना ग्रोथ करेगी. जब मोदी ने इन नोटों को रद्द करने का फैसला किया था तो एक प्री-पेड वॉलेट कंपनी ने पीएम की तस्वीर विज्ञापन के तौर पर भी लगाया था.

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