भारत में कैसा दिखा सुपरमून

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Image caption दिल्ली में अशोक स्तंभ सुपरमून में और खूबसूरत दिखा

सोमवार की रात दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और दूसरे कई जगहों पर लोगों ने सुपरमून देखा.

इस बार चांद पूरे 68 सालों के बाद धरती के सबसे क़रीब आया.

ये दिलकश चांद दूसरी पूर्णिमा के चांदों के मुकाबले कहीं ज्यादा बड़ा और चमकीला दिखा.

दिल्ली में कुतुब मीनार के पास अशोक स्तंभ का नजारा सुपरमून में कुछ अलग ही नजर आया.

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Image caption चंडीगढ़ में सुपरमून कुछ ऐसा दिखा.

इसी तरह चंडीगढ़ में सुपरमून का अंदाज़ अलग रहा.

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भारत के दक्षिणी शहर चेन्नई में भी लोगों ने पूरा चांद देखा. इसे देखने के लिए वे खासतौर पर समंदर किनारे जुटे और पूरे होते चांद का इंतजार किया.

अब ऐसा नायाब नज़ारा दोबारा देखने के लिए साल 2034 तक का इंतज़ार करना पड़ सकता है.

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Image caption चेन्नई में ही सुपरमून का एक और नजारा

दरअसल सुपरमून की स्थिति तब होती है जब चांद पृथ्वी के सबसे क़रीब आ जाता है. यह पहले से 14-30 फ़ीसद ज़्यादा चमकदार होता है.

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Image caption कोलकाता में सुपरमून का नजारा

सुपरमून के समय चांद और धरती के बीच की दूरी क़रीब 3,56,508 किलोमीटर होती है. ये दूरी सबसे कम मानी गई है.

कोलकाता में भी लोगों ने सुपरमून के चांद का आनंद लिया.

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Image caption कोलकाता

चांद धरती के चारों ओर अंडाकार कक्ष में घूमता है. और दोनों के बीच समय समय पर दूरी बदलती रहती है.

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