पैसे की आस में लाइन में खड़ा है देश

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केंद्र सरकार ने पांच सौ और एक हज़ार रुपए के नोट बंद करने के फ़ैसले के बाद से देशभर में बैंकों, एटीएम और डाकघरों में लगी कतारें अभी भी कम नहीं हुई हैं.

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इस भीड़ को कम करने और लोगों को मदद पहुंचाने के लिए सरकार ने सोमवार को पैसे की निकासी की सीमा बढ़ाने और कई अन्य उपायों की घोषणा की गई थी.

सरकार के इस फैसले के बाद भी लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि पुराने नोटों को बदलने या चलाने की सीमा बढ़ाकर सरकार ने 24 नवबंर कर दी है.

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केंद्र सरकार के इस फ़ैसले का असर हर क्षेत्र में देखा जा रहा है. सिनेमाहाल और मंडियों में लोगों की आवाजाही कम हो रही है.

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इस फ़ैसले से आमजनों को होने वाली परेशानी को देखते हुए कुछ संगठन इसका विरोध कर रहे हैं.

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कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने सोमवार को बैठक कर इस फैसले का विचार-विमर्श किया. इसे देखते हुए 16 नवंबर से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र के हंगामेदार होने की संभावना है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस फ़ैसले का बचाव कर रहे हैं. उनका कहना है कि कालेधन को बाहर निकालने, नकली नोटों को ख़त्म करने और आतंकवाद के आर्थिक स्रोतों को खत्म करने लिए उनकी सरकार ने यह फैसला लिया है.

वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार के इस फ़ैसले का उद्देश्य कुछ ख़ास व्यापारिक घरानों को फ़ायदा पहुंचाना है. विपक्षी दल कह रहे हैं कि सरकार ने इस फ़ैसले की जानकारी अपने करीबी लोगों को पहले ही दे दी थी.

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