नहीं होगी डीयू, जेएनयू प्रॉफ़ेसरों की गिरफ़्तारी

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Image caption दिल्ली विश्व विद्यालय प्रोफ़ेसर नंदिनी सुंदर

छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा है कि बस्तर में एक ग्रामीण की हत्या के मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर नंदिनी सुंदर और जेएनयू की प्रोफ़ेसर अर्चना प्रसाद समेत चार लोगों की न तो अभी गिरफ़्तारी होगी और ना ही उनसे पूछताछ की जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट में नंदिनी सुंदर की याचिका पर सुनवाई के दौरान मंगलवार को छत्तीसगढ़ सरकार ने एक रिपोर्ट पेश की.

छत्तीसगढ़ सरकार ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि इस मामले में नंदिनी सुंदर समेत सभी लोगों को पूछताछ से पहले कम से कम चार हफ्ते पहले नोटिस जारी किया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता नंदिनी सुंदर समेत अन्य लोगों को कहा कि अगर वे सरकार के किसी क़दम से असंतुष्ट हों तो वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं.

इससे पहले शुक्रवार को सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार ने 15 नवंबर तक इस मामले के आरोपियों की गिरफ़्तारी नहीं करने की बात कही थी.

गौरतलब है कि बस्तर के दरभा क्षेत्र के ग्राम नामा में 4 नवंबर को सामनाथ बघेल की हत्या कर दी गई थी.

पुलिस ने सामनाथ बघेल की पत्नी की कथित शिकायत पर तोंगपाल थाने में प्रोफ़ेसर नंदिनी सुंदर, प्रोफ़ेसर अर्चना प्रसाद, सीपीएम नेता संजय पराते, विनीत तिवारी, मंजू कवासी और मंगल राम कर्मा के ख़िलाफ़ 302, 120B, 147, 148, 149 ,452 तथा 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया है.

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Image caption सामनाथ बघेल की पत्नी के साथ पुलिस अधिकारी (फ़ाइल फ़ोटो)

हालांकि पुलिस के दावे के उलट मृतक सामनाथ बघेल की पत्नी ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने किसी के नाम से कोई रिपोर्ट दर्ज़ नहीं कराई है और ना ही पति की हत्या करने वाले किसी भी व्यक्ति को वो पहचानती हैं.

पिछले दो दशक से बस्तर में अकादमिक शोध करने वाली नंदिनी सुंदर ने बस्तर के नृविज्ञान, इतिहास, संस्कृति और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों को लेकर कई किताबें लिखीं हैं.

नंदिनी सुंदर की याचिका पर ही कथित रूप से माओवादियों के ख़िलाफ़ सरकार के संरक्षण में चलने वाले हथियारबंद आंदोलन सलवा जुड़ूम को सुप्रीम कोर्ट ने बंद करने का निर्देश दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की कड़ी आलोचना की थी कि उसने आदिवासियों को निजी सेना की तरह हथियार थमा दिए थे और उन्हें ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से कथित रूप से माओवादियों के ख़िलाफ़ युद्ध के मैदान में धकेल दिया था.

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नंदिनी सुंदर की याचिका पर ही पिछले महीने सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट पेश की थी, जिसके मुताबिक़ साल 2011 में ताड़मेटला गांव में विशेष पुलिस अधिकारियों ने 252 आदिवासियों के घर जला दिए थे. इसके अलावा इन गांवों में कुछ लोगों की हत्या और बलात्कार की घटनाएं सामने आई थीं.

आदिवासी सामनाथ बघेल की हत्या के मामले में अभियुक्त जेएनयू की प्रोफ़ेसर अर्चना प्रसाद आदिवासी मामलों की जानकार मानी जाती हैं.

जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर इंफॉर्मल सेक्टर एंड लेबर स्टडीज़ की प्रोफ़ेसर अर्चना प्रसाद की आदिवासियों की आजीविका के समकालीन इतिहास, महिला और श्रमिक, पर्यावरण और श्रमिक इतिहास जैसे विषयों में विशेषज्ञता रही है.

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Image caption जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर अर्चना प्रसाद

वे भारत सरकार के आदिवासी मंत्रालय में शोध सलाहकार समिति की सदस्य रही हैं. इसके अलावा वे वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की सदस्य भी रही हैं. अर्चना प्रसाद महिला आयोग और मानव संसाधन मंत्रालय में विषय विशेषज्ञ सदस्य भी रही हैं.

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