नोटबंदी से फ़ायदा भी, 'मकान होंगें सस्ते'

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500 और 1000 रुपए के नोट वापस लिए जाने के फ़ायदे पर सरकार ने इसको लेकर कई तरह के दावे किए हैं.

लेकिन जानकार क्या कहते हैं? कुछ मानते हैं इससे अगले कुछ माह में महंगाई गिरेगी, ब्याज दरों में गिरावट आएगी और अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ेगा.

कुछ का कहना है कि रुपए के मूल्य में पांच से सात प्रतिशत तक गिरावट होगी जिससे निर्यात बेहतर होगा, सोना, रियल इस्टेट वग़ैरह के दामों में गिरावट होगी. बचत खातों में पैसे जमा होंगे जिससे बैंकों की और सरकार की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी.

हालांकि खपत में कमी का असर आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है.

मैंने बात की अर्थव्यवस्था के दो जानकारों से:

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1. ईएमआई में गिरावट?: कोलकाता से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक़ स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया प्रमुख अरुंधति भट्टाचार्य ने इशारा दिया है कि घर ख़रीदने के दौरान लिए गए ऋण पर बैंक दर घटेंगे.

इसका असर ऋण की मासिक अदायगी या ईएमआई पर पड़ेगा और वो कम होंगे.

आईडीबीआई बैंक के पूर्व उप प्रबंध निदेशक बीके बत्रा भी मानते हैं कि बैंक में बचत खातों में रक़म बढ़ने से ब्याज दर नीचे जाएंगी जिसका असर ईएमआई पर पड़ेगा और वो नीचे जा सकती हैं.

2. रिस्टेट पर असर?: बत्रा मानते हैं कि इस क़दम से रियल एस्टेट में भारी गिरावट देखने को नहीं मिलेंगी और दामों में पांच, 10 या 15 प्रतिशत बदलाव दिखेगा क्योंकि रियल एस्टेट कंपनियां और निवेशक दाम बढ़ने का इंतज़ार करेंगे.

उधर यूटीआई म्यूचुअल फंड की एक्ज़ेक्युटिव वाइस प्रेसिडेंट और फंड मैनेजर स्वाति कुलकर्णी मानती हैं कि रियल एस्टेट के दामों में गिरावट देखने को मिल सकती है क्योंकि कंपनियों ज़्यादा वक्त तक तैयार घरों को बेचने से ज़्यादा देर तक नहीं रोक सकतीं.

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3. नुक़सान किसका?: बीके बत्रा कहते हैं कि सरकार के क़दम का सबसे बड़ा नुक़सान छोटे व्यापारियों को होगा क्योंकि वो ज़्यादातर नक़द में व्यापार करते है. हालांकि उनमें से कई के बैंक अकाउंट हैं.

वो कहते हैं, "एक आंकड़े के मुताबिक़ भारतीय अर्थवस्था का क़रीब 23 प्रतिशत अवैध है. इसमें से छोटे व्यापारियों का हिस्सा 20 प्रतिशत है."

बत्रा कहते हैं कि छोटे व्यापारी नक़द पैसा रखते हैं ताकि उनके ऊपर कर का बोझ न बढ़े और अभी ऐसा माहौल आने में वक्त लगेगा जिसमें ज़्यादातर काम चेक से हो, तब तक छोटे व्यापारी आसानी के लिए नक़द का इस्तेमाल करेंगे.

4. क्या काला धन कम होगा?: बीके बत्रा कहते हैं, इससे काला धन खत्म नहीं होगा लेकिन इसे रोकने में मदद मिलेगी लेकिन जिनके पास बहुत धन है, वो इसे सफ़ेद करने का रास्ता ढूंढ ही लेंगे.

स्वाति कुलकर्णी कहती हैं, इससे काला धन तो रहेगा लेकिन अर्थव्यवस्था में नक़दी की मात्रा घटेगी, ईमनी के इस्तेमाल में बेहतरी आएगी.

बत्रा कहते हैं कि ये देखना होगा कि सरकार फ़ॉलो अप में क्या क़दम उठाती है.

5. टैक्स जाल में फैलाव?: स्वाति कुलकर्णी के मुताबिक़ इस कदम से संपत्ति का पुनर्वितरण होगा और आने वाले सालों में टैक्स देने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी जिससे टैक्स टू जीडीपी रेशियो में बेहतरी आएगी.

पिछले कई सालों से आर्थिक प्रगति खपत पर आधारित थी. निवेश बढ़ने से इसका अर्थव्यवस्था पर बहुत अच्छा असर पड़ेगा.

6. क्या अर्थव्यवस्था सिकुड़ेगी? : बत्रा के अनुसार इस क़दम का अर्थव्यवस्था पर असर छह से 12 महीनों तक रहेगा.

स्वाती कुलकर्णी भी मानती हैं कि थोड़े समय में वक्त जब दुकानें बंद हैं, लोगों के हाथों में पैसे नहीं हैं, तो खपत पर निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट दिखेगी लेकिन छिपी संपत्ति के बेहतर इस्तेमाल से सरकारी खज़ाने में बेहतरी आएगी, मूलभूत सुविधाओं पर सरकार बेहतर खर्च पाएगी, ज्यादा कारख़ाने लगेंगे और ज़्यादा नौकरियां मिलेंगी.

एक सोच है कि सालों से लाखों करोड़ों रुपए के डूब के ऋणों से जूझ रहे बैंकों के लिए ये अच्छी ख़बर होगी.

7. 'टेरर फंडिंग' पर रोक : बत्रा कहते हैं कि इस ताज़ा कदम से आतंकवादी गतिविधियों की फंडिंग और नक़ली नोट की समस्या को रोकने में मदद मिलेगी.

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