नोट पर ब्रेक से ट्रक वालों की ज़िंदगी फ़ेल

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Image caption ड्राइवर मोहम्मद अलीम को ट्रक की बुकिंग का इंतजार है

500 और 1,000 के नोट बंद हुए 10 दिन गुज़र चुके हैं, लेकिन हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं. घरों में गृहिणियां परेशान हैं, तो घर से दूर सड़क पर ज़िंदगी गुज़ारने वाले ट्रक ड्राइवर और उनके हेल्पर की ज़िंदगी और दूभर हो गई है.

नोटबंदी का असर कमाई से लेकर खाने-पीने तक पर पड़ा है. हरियाणा के पलवल के मोहम्मद अलीम फ़िलहाल पटना में अपने खाली ट्रक की बुकिंग के इंतज़ार में हैं. वे भी उन हज़ारों ड्राइवरों और उनके सहायकों में से हैं, जिन्हें सफ़र के दौरान इस बारे में पता चला.

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Image caption ट्रक ना चलने से ड्राइवरों और हेल्परों को कमीशन नहीं मिलता है

दिनेश ने बताया, ''गाड़ी चल नहीं रही है, हम बैठे हैं. तनख़्वाह तो मिल जाती है, लेकिन गाड़ी न चलने से कमीशन नहीं मिल रहा. आठ दिन में क़रीब पांच हज़ार का नुकसान हो चुका है.''

पप्पू कुमार की पटना बाइपास पर यादव ट्रांसपोर्ट सर्विस है. पप्पू के मुताबिक़, नोटबंदी की वजह से एक हफ़्ते में उनकी गाड़ियों की बुकिंग करीब 80 फ़ीसदी घट गई है. दूसरी एजेंसियों का भी यही हाल है.

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Image caption नोटबंदी की वजह से हेल्पर अमित कुमार को खाने-पीने की भी दिक्क़त हो रही है

ट्रक हेल्पर का काम करने वाले अलीम कहते हैं, ''500 का नोट 100 तो 1000 का नोट 200 रुपए के घाटे से दे रहे हैं. हम तो दस-दस रुपया देखते हैं, 100-200 का नुक़सान ग़रीब आदमी के लिए बहुत है. 20-25 दिन बाद घर क्या लेकर जाएंगे?''

पटना के ही ट्रक ड्राइवर दिनेश कुमार के मुताबिक़, बीते एक हफ़्ते के दौरान उनकी कमाई पर भी बुरा असर पड़ा है.

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पप्पू ने कहा, ''खरीद-बिक्री बहुत कम हो रही है. खरीद-बिक्री होगी तो माल इधर से उधर जाएगा. यह लगभग बंद है, लिहाज़ा, हमारी गाड़ियां भी खड़ी हैं.''

हेल्पर का काम करने वाले उत्तर प्रदेश के अमित कुमार के मुताबिक़, नोटबंदी के कारण वे सफ़र के दौरान पहली बार ख़ुद खाना बनाने को मजबूर हुए हैं.

इसकी वजह अमित ने यह बताई, ''खाने के लिए होटल जाने पर होटल वाले पहले 100 रुपए काटने की बात कहते हैं. हमने कुछ दिन यह परेशानी झेली, फिर हारकर ख़ुद खाना बनाने का फ़ैसला किया.''

नोटबंदी का एक फ़ायदा यह हुआ कि सरकार ने फ़िलहाल टोल टैक्स की वसूली रोक दी है.

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद शहर के राजीव कुमार भारत रोडलाइन्स का ट्रक चलाते हैं. राजीव ने कहा, ''एक हफ्ते में गुजरात से पटना आने में करीब छह-सात हज़ार का टोल बच गया. साथ ही जाम भी नहीं मिलता.''

राजीव की ख़्वाहिश है कि कम-से-कम टोल नाकों पर हमेशा ऐसा ही इंतजाम रहना चाहिए.

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Image caption कई ट्रक ड्राइवर पटना में फंस गए हैं

पटना की थोक फल मंडी बाजार समिति में परेशान दिख रहे ट्रक ड्राइवर युवराज सिंह से मुलाकात हुई. वे श्रीनगर से सेब लेकर पटना पहुंचे हैं. पंजाब के बटाला इलाके के ददियाना गांव के युवराज ने बताया, ''बीते चार दिनों से स्थानीय व्यापारी के यहां चक्कर लगा कर थक चुके हैं कि अपने ऑर्डर का माल लेकर वे ट्रक खाली कर दें.''

युवराज ने आगे बताया, ''नोटबंदी के कारण ऐसा पहली बार हो रहा है कि हमें अपनी भरी गाड़ियां लगाकर इंतज़ार करना पड़ रहा है.''

युवराज के मुताबिक़ उन्हें एक फेरे में लगभग 50,000 रुपए का नुक़सान उठाना पड़ रहा है. उन्हें डर है कि वे शायद बैंक कर्ज़ की यह किस्त न चुका पाएं.

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Image caption नोटबंदी के बाद से ही सुनसान पड़ी है पटना की फल मंडी

पंजाब के गुरदासपुर से आए ट्रक ड्राइवर मदन ने बीबीसी से कहा, ''बड़े नोट बंद होने के बाद खर्चा बढ़ गया है, धंधा आधा रह गया है.''

युवराज और मदन दोनों ने पटना आने के पहले छोटे नोटों का इंतजाम कर लिया था. इस कारण उन्हें रास्ते में तो ख़ास दिक्कत नहीं आई. लेकिन वे यहां आकर फंस गए हैं.

फल मंडी के व्यापारियों का कहना है कि आठ नवंबर के बाद उनका कारोबार करीब तीन-चैथाई तक कम हो गया है.

फलों के थोक व्यापारी मोहम्मद अकबर कहते हैं, ''ख़ुदरा दुकानदार बहुत कम माल उठा रहे हैं. वो बताते हैं कि बाज़ार में नकदी की कमी के कारण हम माल बेच नहीं पा रहे हैं. धीरे-धीरे हम भी व्यापारियों को कह रहे हैं कि वे हमें माल न भेजें.''

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