नोटबंदी: सहकारी बैंक को लेकर केरल के मुख्यमंत्री और मंत्री धरने पर बैठे

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मोदी सरकार के नोटबंदी के फ़ैसले के बाद रिर्ज़व बैंक ऑफ इंडिया ने सहकारी बैंकों में नोट बदली से इनकार कर दिया है.

बैंक के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ आरबीआई कार्यालय के सामने एक दिवसीय धरने पर बैठ गए.

विजयन ने केंद्र सरकार पर नोटबंदी की आड़ में राज्यों में सहकारी बैंकों को ''तबाह'' करने का आरोप लगाया और साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा. विजयन के इस धरने में माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी भी शामिल हुए.

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यह विरोध प्रदर्शन बड़ी ही विचित्र परिस्थितियों में हुआ. पहले तीन दिन तक तो सहकारी बैंकों में नोटों की अदला-बदली हो रही थी, लेकिन इन बैंकों पर काले धन को सफ़ेद करने के आरोप लगने के बाद सरकार ने यह प्रतिबंध लगा दिए.

केरल का सहकारी बैंक सेक्टर राज्य की वित्तीय गतिविधियों की रीढ़ की हड्डी माने जाते है. राज्य में 1551 सहकारी बैंक हैं जिसमें लगभग 127000 करोड़ रुपये जमा हैं.

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प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए विजयन ने कहा, "काले धन और नोटबंदी के नाम पर केरल के सहकारी सेक्टर के अपमान पर केंद्र सरकार को दोबारा से विचार करना चाहिए. हम काले धन की रोकथाम के ख़िलाफ़ नहीं हैं."

भाजपा ने केरल सरकार के इस विरोध प्रदर्शन को "राजनीतिक" करार दिया है.

भाजपा का मानना है, "केरल की माकपा, सहकारी क्षेत्र के बैंक पर काबिज़ है. यही क्षेत्र इसकी आर्थिक शक्ति बना हुआ है. माकपा का सच इन बैंकों में काले धन के खु़लासे से सबके सामने न आ जाए इसीलिए वह डरी हुई है."

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माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने बीबीसी हिन्दी को बताया, "भाजपा की यह प्रतिक्रिया ही सिद्ध करती है कि केंद्र सरकार का यह कदम राजनीति से प्रेरित है. दुखद है कि भाजपा सरकार में हर निर्णय राजनीतिक और चुनावी हितों को ध्यान में रखकर लिया जा रहा है. ये लोग देश के जनवादी ढांचे को चुनाव के मक़सद के लिए बिगाड़ रहे हैं."

येचुरी ने बताया कि सहकारी क्षेत्र किसान समाज की रीढ़ है. सरकार के इस निर्णय का बुरा असर महाराष्ट्र, कर्नाटक और बंगाल पर भी पड़ेगा.

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