'मेरा नाम सोनम है और मैं बेवफ़ा नहीं'

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स्कूल के दिनों में मेरी क्लास के बच्चे मुझे 80-90 के दशक की एक्ट्रेस सोनम के नाम से चिढ़ाते थे. मैं बड़ी परेशान होती थी. अपने मम्मी-पापा को कहा करती थी - आपको मेरा कोई दूसरा नाम रखना चाहिए था.

कई बार तो ग़ुस्से में मैं खाना भी नहीं खाती थी पर आज मन करता है कि उनके हाथ चूम लूँ और बार-बार उन्हें थैंक्यू बोलूँ, उनको वर्ल्ड टुअर पर ले जाऊं. आख़िर उन्हीं की वजह से तो मुझे भारत के लोग जानते हैं.

बदनामी ही सही, पर बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा..

पिछले सात-आठ दिनों में मेरे साथ जो घटनाएं घटी हैं उसके बाद तो मैं भी बेवफ़ाई का डॉयलॉग हर जगह खुलकर बोल रही हूँ.

मगर ख़बरदार मैं कोई वैंप वग़ैरह नहीं बल्कि आम लड़की हूँ जो दिल्ली में रहती है और भागदौड़ भरी ज़िंदगी जीती है, नौकरी करती है, अपना घर संभालती है.

यक़ीन मानिए, 10 तारीख़ के बाद से तो यूँ लग रहा है मानो मेरी बेवफ़ाई को छोड़कर दुनिया में किसी के पास बात करने को कुछ बचा ही नहीं. मुझे तो अब सब कुछ अच्छा-अच्छा लगने लगा है.

पैसा निकालने के लिए एटीएम के सामने तीन-चार घंटे की लाइनों में लगने पर भी मुझे कोफ़्त नहीं होती, बल्कि मज़ा आता है. हर कोई मेरे बारे में ही बात कर रहा होता है. ऑफ़िस के काम का दबाव भी मुझे आजकल अच्छा लग रहा है.

8 तारीख़ के बाद से फ़ेसबुक और ट्विटर से लेकर सड़कों तक मेरी बेवफ़ाई के चर्चे हैं और पर्चे (पुराने नोटों को अब यही कहते हैं) मेरी बेवफ़ाई से पटे पड़े हैं. हिंदुस्तान से न्यूज़ीलैंड तक और अमेरिका से लेकर यूरोप तक. हर नोट पर बस एक ही नाम - सोनम गुप्ता.

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नोट के लिए क़तार में खड़े लोग, सीरियलों से साज़िशें सीखने वाली सास-बहुएं और मोहल्ले की औरतें एक-दूसरे से यही पूछ रही हैं कि क्या सच में सोनम बेवफ़ा है?

नोटों की उलझन में फंसे बैंक वाले और दफ़्तरी बाबू भी बीच में वक़्त निकालकर पूछ ही लेते हैं कि आख़िर ये सोनम गुप्ता बेवफ़ा क्यों है?

मैं भी सोनम गुप्ता हूँ और जानना तो मैं भी चाहती हूँ कि ऐसा क्या हुआ सोनम गुप्ता के साथ, जिसने उसे बेवफ़ा बनने को मजबूर किया.

मुझे लगता है कि ये कहानी कुछ अक्षय कुमार, सुनील और शिल्पा शेट्टी की फ़िल्म ''धड़कन'' जैसी रही होगी.

जिसका ग़रीब हीरो सोनम गुप्ता से प्यार करता है पर बूढ़े और बीमार बाप के कारण सोनम को मजबूरी में किसी दूसरे से शादी करनी पड़ती है.

भड़के हुए आशिक ने कहा होगा ''जा सोनम तू आज मुझे पैसे के लिए छोड़ रही है लेकिन मैं भी क़सम खाता हूँ हर नोट पर तेरी बेवफ़ाई की कहानी गढ़ दूंगा.'' और नतीजा आज आप देख ही रहे हैं.

यह कहानी 10 तारीख़ से शुरू हुई, जब पहली बार मुझे 2000 रुपए के नोट पर किसी ने "सोनम गुप्ता बेवफ़ा है" लिखकर भेज दिया. हालांकि क़रीब आठ-दस महीने पहले भी मुझे ऐसा ही 10 रुपए का एक नोट मिला था. तब बेवफ़ाई पर किसी ने उंगली नहीं उठाई थी और न वह ख़बर बनी थी.

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इस बार तो बेवफ़ा सोनम गुप्ता सोशल मीडिया, टीवी और रेडियो हर जगह है. मुझे तो लगता है कि अगर मैं इस समय किसी चुनाव में खड़ी हो जाऊं, तो शायद सबकी ज़मानत ज़ब्त करा दूंगी. न मोदी, न केजरीवाल और न राहुल, अभी मेरी सुनामी के आगे कोई नहीं टिकने वाला.

मैं तो बस यही कहूँगी -

जिस नोट पर मुझे बेवफ़ा लिख दिया ग़ालिब

छिपाकर न रखते तो मैं ख़फ़ा ना होती

सही वक़्त ख़र्च लेते तो दफ़ा ना होती..

यूँ ही कोई सोनम गुप्ता बेवफ़ा नहीं होती..

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